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गड़ीसर की कलात्मकता हो रही है खत्म

स्वर्णनगरी में अपनी स्थापत्य कला व बेजोड़ कारीगरी के लिए विश्व विख्यात गड़ीसर तालाब अपना मूर्त रूप खो रहा है। गड़ीसर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:40 AM IST
स्वर्णनगरी में अपनी स्थापत्य कला व बेजोड़ कारीगरी के लिए विश्व विख्यात गड़ीसर तालाब अपना मूर्त रूप खो रहा है। गड़ीसर तालाब में बनाए गए झरोखे गिरकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है। लेकिन उसके बावजूद जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जिससे गड़ीसर अपना मूल अस्तित्व खो रहा है। गड़ीसर में स्थित झरोखे जर्जर होकर गिर गए है। जिस पर नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा ना तो उनकों उठाया जा रहा है और ना ही टूटे झरोखों व कंगूरों को व्यवस्थित किया जा रहा है।

पर्यटकों को हो रही है निराशा : गड़ीसर के कंगूरों व झरोखों की स्थिति बेहद दयनीय अवस्था में पहुंच गई है। जिससे सैलानियों के मन में जैसलमेर के प्रति गलत छवि जा रही है। इसके साथ ही बेजोड़ कारीगरी व बेहतरीन स्थापत्य कला के नमूनों की दुर्दशा देखकर सैलानियों के मन में निराशा घर कर रही है।

जिम्मेदार नहीं दे रहे है ध्यान

गड़ीसर में गिर रहे झरोखों से जहां जैसलमेर का सौंदर्यीकरण प्रभावित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे है। जिससे सैलानियों में निराशा तथा यहां के स्थानीय वाशिंदों में रोष गहराता जा रहा है।

भास्कर संवाददाता | जैसलमेर

स्वर्णनगरी में अपनी स्थापत्य कला व बेजोड़ कारीगरी के लिए विश्व विख्यात गड़ीसर तालाब अपना मूर्त रूप खो रहा है। गड़ीसर तालाब में बनाए गए झरोखे गिरकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है। लेकिन उसके बावजूद जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जिससे गड़ीसर अपना मूल अस्तित्व खो रहा है। गड़ीसर में स्थित झरोखे जर्जर होकर गिर गए है। जिस पर नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा ना तो उनकों उठाया जा रहा है और ना ही टूटे झरोखों व कंगूरों को व्यवस्थित किया जा रहा है।

पर्यटकों को हो रही है निराशा : गड़ीसर के कंगूरों व झरोखों की स्थिति बेहद दयनीय अवस्था में पहुंच गई है। जिससे सैलानियों के मन में जैसलमेर के प्रति गलत छवि जा रही है। इसके साथ ही बेजोड़ कारीगरी व बेहतरीन स्थापत्य कला के नमूनों की दुर्दशा देखकर सैलानियों के मन में निराशा घर कर रही है।