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जैसलमेर जिले में सरपंच से लेकर सांसद तक की राजनीति में भी वंशवाद हावी

देशभर में इन दिनों राजनीति में वंशवाद को लेकर बहस छिड़ी हुई है। राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद यह...

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2017, 12:35 PM IST
देशभर में इन दिनों राजनीति में वंशवाद को लेकर बहस छिड़ी हुई है। राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद यह बहस और भी बढ़ गई है। इस बीच जैसलमेर की राजनीति में वंशवाद कितना हावी है उसको लेकर पड़ताल की गई तो सामने आया कि जैसलमेर भी राजनीति के इस सच से अछूता नहीं है। कोई भी नेता हो, उसकी चाहत अपने परिवार से किसी को आगे करने की ही रहती है।

वह चाहे सरपंच का पद हो या फिर विधायक का। एक तरफ नेता अपने परिवार के सदस्यों को ही आगे लाना चाह रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टियों से जुड़े कार्यकर्ताओं में वंशवाद को लेकर नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बड़े राजनीतिक घराने सीट छोड़ना ही नहीं चाहते हैं। वे आगे से आगे अपने वंश को ही राजनीति में लाकर बड़ा पद दिलवा देते हैं। यहां तक कि यदि कोई सरपंच भी बना है तो वह प्रयास करता है कि उसके घर से ही कोई आगामी चुनाव में सरपंच बने। ऐसे दर्जनों उदाहरण जैसलमेर में देखने को मिल रहे हैं।

{यूआईटी चेयरमैन डॉ. जितेन्द्र सिंह के पिता हुकमसिंह जैसलमेर के दो बार विधायक रह चुके हैं। उसके बाद डॉ. जितेन्द्र सिंह लगातार राजनीति में सक्रिय है। वे जनता दल, कांग्रेस भाजपा तीनों ही पार्टियों से विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं। वर्तमान में यूआईटी चेयरमैन है।

{फकीर परिवार वंशवाद में सबसे ऊपर है। हालांकि गाजी फकीर खुद बड़ी राजनीति में नहीं आए और केवल किंग मेकर की भूमिका निभाई। वे खुद जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। उसके बाद भाई को विधायक का चुनाव लड़वाया। उसे प्रधान बाद में जिला प्रमुख बनाया। इतना ही नहीं गाजी फकीर के पुत्र शाले मोहम्मद जिला प्रमुख विधायक रह चुके हैं। दूसरा बेटा अब्दुला फकीर जिला प्रमुख रह चुका है और तीसरा बेटा अमरदीन फकीर वर्तमान में जैसलमेर समिति का प्रधान है।

{ रूपाराम धणदै परिवार भी राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय है। गत चुनावों में ही वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और पहली बार में विधायक का चुनाव लड़े। हार का सामना करना पड़ा। बाद में प्रदेश संगठन में सचिव का पद मिला। बेटी अंजना मेघवाल को जिला प्रमुख बना दिया और दो अन्य बेटियों को जिला परिषद सदस्य भी बनाया।

{ सांग सिंह भाटी जैसलमेर के विधायक रह चुके हैं। वे दो बार विधायक का चुनाव लड़े। इस बार बेटे आईदान सिंह को उप प्रधान बनाने की चाहत में पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़वाया। वर्तमान में वे अपने अपने बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।

{ पूर्व जिला प्रमुख रेणुका भाटी राजनीति में सक्रिय हैं। उनके पति चंद्रवीर सिंह जैसलमेर के विधायक रह चुके हैं। राज परिवार से जुड़ा यह परिवार वर्तमान में भी राजनीति में सक्रिय है।

{ पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह भाजपा के बड़े चेहरे के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने अपने बेटे मानवेन्द्र सिंह को बाड़मेर जैसलमेर का सांसद बना दिया। वर्तमान में मानवेन्द्र सिंह शिव के विधायक है और राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय है।

{ सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी चौथी बार सांसद बने हैं। उन्होंने अपने भाई हिम्मताराम को भाजपा संगठन में सक्रिय कर रखा है। वहीं अपने बेटे के लिए जमीन तलाश रहे हैं।

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