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दो साल बाद जैसलमेर को मिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष, गुटबाजी को लगा विराम

Jaisalmaer News - दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिर जैसलमेर कांग्रेस कमेटी को अपना जिलाध्यक्ष मिल ही गया। रामगढ़ सरपंच गोविंद भार्गव...

Dainik Bhaskar

May 07, 2018, 02:00 AM IST
दो साल बाद जैसलमेर को मिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष, गुटबाजी को लगा विराम
दो साल के लंबे इंतजार के बाद आखिर जैसलमेर कांग्रेस कमेटी को अपना जिलाध्यक्ष मिल ही गया। रामगढ़ सरपंच गोविंद भार्गव को जिलाध्यक्ष बनाने की घोषणा शनिवार देर शाम को की गई। इसके साथ ही एक बार फिर गाजी फकीर का कांग्रेस में दबदबा साबित हो गया। दो साल पूर्व रावताराम पंवार के निधन से रिक्त हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद पर राजनीति शुरू होकर कांग्रेस के दिग्गज नेता अपने अपने गुट के व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाने की जुगत में लग गए और नित नए नाम सामने आने लगे। इनमें रूपाराम गुट से पवन सूदा, उम्मेदसिंह नरावत, मूलाराम चौधरी, छोटू खान कंधारी, सुमार खान का नाम सामने आने लगा। एक समय तो पूर्व विधायक गोवर्धन कल्ला के पुत्र राधेश्याम कल्ला ने भी जिलाध्यक्ष के पद के लिए दावेदारी दी। फकीर परिवार चाहता था कि आगामी चुनावों के मद्देनजर जो भी जिलाध्यक्ष बने वह उनका आदमी हो ताकि विधायक से लेकर अन्य पदों पर उनकी मर्जी चलती रहे।

जैसलमेर. नवनियुक्त जिलाध्यक्ष भार्गव

खडाल क्षेत्र में छोटा फकीर से जाने जाते है गाेविंद भार्गव

गोविंद भार्गव के अध्यक्ष बनने से गाजी फकीर का राजनैतिक कद एक बार फिर बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि गोविंद भार्गव को खडाल क्षेत्र में छोटे फकीर के नाम से ही जाना जाता है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गाजी फकीर जिलाध्यक्ष पद पर अपना विश्वस्त व्यक्ति ही बिठाना चाहते थे।

सबसे पहले अब्दुला का नाम आया था सामने

फकीर परिवार की तरफ से सबसे पहला नाम पूर्व जिला प्रमुख अब्दुला फकीर का आया। इसका हरीश गुट व रूपाराम गुट द्वारा जमकर विरोध होने पर फकीर गुट की तरफ से जनक सिंह भाटी, शंकरलाल माली, अशोक तंवर व विकास बादशाह के नाम सामने आए। जब ऐसा लगने लगा कि इन नामों पर सहमति नहीं बन पाएगी तो गोविंद भार्गव का नाम प्रस्तावित किया गया। गोविंद भार्गव के पक्ष में पूर्व सांसद हरीश चौधरी का भी सॉफ्ट कॉर्नर होने से बात बन गई और करीब तीन माह पूर्व ही प्रदेश अध्यक्ष ने मुहर लगा दी और शनिवार को गोविंद भार्गव के जिलाध्यक्ष की घोषणा भी कर दी।

गुटबाजी का मिला फायदा

जिलाध्यक्ष के पद को लेकर कांग्रेस में गुटबाजी लगातार बढ़ रही थी। पूर्व जिलाध्यक्ष के निधन के बाद खाली पड़े जिलाध्यक्ष के पद रामगढ़ सरपंच व कांग्रेसी नेता गोविंद भार्गव को मनोनीत किया गया है। ऐसे में कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर जिलाध्यक्ष पद के लिए घमासान मचा हुआ था। भार्गव के जिलाध्यक्ष की घोषणा होने के बाद जिलाध्यक्ष पद पर गुटबाजी व चर्चाओं पर विराम लग गया।

निष्क्रिय पड़ी कांग्रेस में अब आ सकती है जान

पिछले लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी कांग्रेस में जिलाध्यक्ष नियुक्त होने बाद जान आ सकती है। पहले जहां गुटबाजी के चलते कार्यकर्ता ही कार्यक्रमों में नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन अब जिलाध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की कमान मुखिया के हाथ में होने से कार्यकर्ताओं का रूख भी वापिस हो सकेगा।

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