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दो गांवों की 300 महिलाएं करती हैं सब्जी उगाने से लेकर शहर में बेचने तक का काम
शहर के नजदीक दो गांवों की महिलाओं की दिनचर्या अन्य महिलाओं से काफी अलग है। सुबह जल्दी उठकर घर के काम काज करना और उसके बाद अपने पारिवारिक व्यवसाय में जुट जाना। मंडी से सब्जी लाना, अपने खेत में उगी सब्जियों को काटकर लाना और शहर में ले जाकर बेचना। ऐसे दो गांवों की महिलाओं की कहानी जहां लगभग हर परिवार में महिलाएं व्यवसाय से जुड़ी हैं। महिला सशक्तिकरण का यह बेमिसाल उदाहरण है। ये महिलाएं पीढ़ियाें से यह काम करती आ रही हैं हालांकि शिक्षा की दृष्टि से ये महिलाएं कमजोर हैं, लेकिन व्यापार करते-करते हिसाब किताब रखने में सबसे आगे है। शहर के नजदीक अमरसागर व बड़ाबाग दो गांव है। जहां सब्जियों का उत्पादन होता है। इन गांवों में माली समाज के लोग रहते हैं । करीब 300 से अधिक महिलाएं व्यापार करती हैं।
पीढ़ियों से यही व्यवसाय, व्यापार को बढ़ाने में पुरुषों से ज्यादा इन्हें अनुभव
वर्तमान में महिलाओं को बराबर का दर्जा देने की बातें हो रही है। लेकिन हमारे समाज में तो यह पहले से ही है। पीढ़ियाें से यही व्यवसाय करती है। और महिलाओं को इसका अनुभव भी पुरुषों से ज्यादा होता है।
-गोपी देवी
सब्जी उगाने से बेचने तक की जिम्मेदारी , शहर की सब्जी मंडियों में महिलाएं ही बेचती हंै सब्जियां
मुख्य रूप से बड़ाबाग में सब्जियों का उत्पादन होता है। यहां करीब 50 परिवारों की महिलाएं सब्जी उत्पादन में जुटी हुई हैं। ऐसे में सब्जियों को उगाने से लेकर उनकी कटाई, सफाई और बाद में शहर में आकर बेचने में दिन रात जुटी रहती है ये महिलाएं। जैसलमेर शहर में जिंदानी चौक में देसी सब्जियां मिलती है। यहां बैठने वाली महिलाएं बड़ाबाग में उगने वाली सब्जियों को लेकर आती है और यहां बेचती हैं। वहीं गोपा चौक सब्जी मंडी में सब्जी बेचने वाली महिलाएं सुबह सुबह कृषि मंडी जाकर जोधपुर से आने वाली सब्जियों को खरीदकर लाती हैं और गोपा चौक मंडी में में बेचती है।
जैसलमेर. जिन्दानी चाैक में सब्जी बेचती महिलाएं।
मैं 40 सालों से यह व्यापार कर रही हूं। हिसाब किताब रखने का तो अनुभव हो गया है। अब इस व्यापार में कोई अड़चने नहीं आती।
-रामू देवी
मेरे साथ घर की अन्य महिलाएं हाथ बंटाती है। सब्जियां खरीदने से लेकर बाजार में बेचने तक का काम महिलाएं ही करती हैं।
-मूली देवी
हमारे गांव में भी सब्जियों का उत्पादन होता है। पहले खेतों में उत्पादन में पुरुषों के साथ महिलाएं जुटती है और बाद में महिलाएं ही फसल कटाई करके शहर में बेचने आती हैं।
-जेठी देवी