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ऑक्सफोर्ड में 100 साल पुरानी एक फेलोशिप सिर्फ महिलाओं के लिए थी, जेंडर गैप के आरोप लगे तो अब पुरुषों को भी मिलने लगी

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 05:51 AM IST

Jaisalmaer News - ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप पाने की ख्वाहिश हरेक स्टूडेंट्स की होती है। इस यूनिवर्सिटी में...

Nokh News - rajasthan news a 100 year old fellowship in oxford was for women only allegations of gender gap were now started to meet men too
ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप पाने की ख्वाहिश हरेक स्टूडेंट्स की होती है। इस यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट्स, म्यूजिक और साहित्य में पिछले 100 साल से सिर्फ छात्राओं को ही स्कॉलरशिप दी जा रही थी। छात्रों को नहीं। लेकिन छात्रों ने जेंडर गैप का आरोप लगाकर अपनी मांग यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने रखी, तो उसे मान लिया गया। अब छात्र भी स्काॅलरशिप के हकदार होंगे। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मान लिया है कि छात्रों को स्कॉलरशिप न देना रोजगार समानता एक्ट का उल्लंघन है। इसलिए अब फेलोशिप की शर्तों को बदला जा रहा है। 1932 में ब्रिटिश पुरातत्वविद और ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट डेविड रांडेल मैकाइवर ने अपनी प|ी जोआना रांडेल की याद में जूनियर रिसर्च फेलोशिप की घोषणा की थी।

इसमें फाइन आर्ट्स, म्यूजिक और साहित्य के पाठ्यक्रमों में केवल लड़कियों को ही स्कॉलरशिप दी जा रही थी। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा कि इस फैसले के बाद सालों से चली आ रही शर्तें बदल दी गई हैं। अब स्कॉलरशिप में लिंग भेद नहीं किया जाएगा। एडमिनिस्ट्रेशन को केवल एक लिंग के लिए किसी भी पदों पर विज्ञापन देने या भर्ती करने की इजाजत अब नहीं होगी। ऑक्सफोर्ड की प्रोफेसर एलिजाबेथ कुलिंगफोर्ड खुद इस फेलोशिप से पढ़ी हैं। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘मुझे लगता है कि एक या दो फैसलों से यूनिवर्सिटी जैसी बड़ी संस्था को कोई बड़ा खतरा नहीं होता। यह सही है कि लड़कों को भी स्कॉलरशिप मिलनी चाहिए, लेकिन इसे आप कोई महान फैसला नहीं कह सकते। इतिहास गवाह है कि समाज पुरुष प्रधान ही रहा है। सालों तक महिलाएं यूनिवर्सिटी में भी नहीं रहीं और कॉलेज तक नहीं जा पाती हैं। अभी भी महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।’

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा कि इस फैसले के बाद कई ट्रस्टों की शर्तों को बदल दिया गया है। इसलिए वे अब लिंग-विशिष्ट नहीं रहे। यूनिवर्सिटी कई स्तरों पर असंतुलन को खत्म कर रहा है। समानता को बढ़ावा देने के लिए महिला शिक्षकों की भर्ती की जा रही है और उनके विकास के लिए भी कई कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।







भविष्य में यहां असमानता का कोई भी कारण नहीं होगा।

लिंगभेद खत्म करने के लिए ‘झी’ संबोधन की पहल ऑक्सफोर्ड ने की थी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लिंग भेद को खत्म करने के लिए पहले भी कई पहल कर चुका है। दो साल पहले इस दिशा में की गई एक अनोखी पहल को यूनिवर्सिटी ने साबित भी कर दिखाया है। छात्र आज भी यहां एक-दूसरे को “ही’ और “शी’ की जगह “झी’ कहकर संबोधित करते हैं ताकि लड़के और लड़कियों के बीच भेद खत्म हो। इस पहल के अच्छे नतीजे से प्रेरित होकर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने भी ‘झी’ का संबोधन अपने यहां लागू कर दिया है।

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