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मोक्ष प्राप्ति का सुलभ मार्ग है भक्ति :मुनि मेहुलप्रभ

2 वर्ष पहले
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महावीर भवन में जारी व्याख्यान माला का मुनि मयंकप्रभ ने नवकार मंत्र की धुन के साथ आगाज किया। इस अवसर पर मुनि मेहुलप्रभ ने कहा कि भक्ति मार्ग मोक्ष प्राप्ति का सर्वाधिक सुलभ मार्ग है। राजा श्रेणिक और लंकेश्वर रावण ने भक्ति मार्ग को अपना कर ही तीर्थंकर नाम गौत्र का बंधन किया। परमात्मा की भाव भक्ति का कोई समय निर्धारित नहीं होता। गुरु भगवंतों के दिशा निर्देश के द्वारा परमात्मा भक्ति में लीन बना जा सकता है। इसके अलावा ज्ञान मार्ग एवं योग मार्ग भी मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है, किन्तु उन दोनों की सार्थकता के लिए प्रबल पुरुषार्थ अनिवार्य है। चौदह पूर्वधारी आचार्य भद्रबाहु स्वामी ने अपने शिष्य स्थूलिभद्र को दस पूर्व का सरहस्य ज्ञान कंठस्थ करवाया किंतु इस ज्ञान के प्रभाव से छोटी सी माया रचने के कारण उन्हें आगे शिक्षा देने का मना कर दिया। सकल श्री संघ के निवेदन पर अंतिम 4 पूर्व के केवल सूत्रों का ज्ञान दिया। मुनि ने बताया कि ज्ञानी व्यक्ति में गंभीरता का गुण विशेष रूप से होना चाहिए। अविवेकी व्यक्ति ज्ञान का दुरुपयोग भी कर सकता है। परमात्मा ऋषभदेव के पुत्र बाहुबली ने योग मार्ग अपना कर कैवल्य प्राप्ति का प्रयास किया लेकिन अहं भाव के कारण उनके आसपास कैवल्य होते हुए भी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। ब्राह्मी और सुंदरी उन्हें प्रतिबोध देने आई, सांसारिक बहिनों की आवाज सुनकर बाहुबली को अभिमान रूपी गज पर सवार होने का आभास हुआ। जैसे ही उनके मन में उन साध्वी महाराज को वंदन करने के भाव आए उन्हें कैवल्य प्राप्त हो गया। सभी मार्गों का अंतिम ध्येय मोक्ष है किन्तु भक्ति मार्ग सबसे श्रेयस्कर मार्ग है जिसका पालन सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है। मुनि ने कहा कि परमात्मा प्रतिमा हर घर में स्थापित होनी चाहिए। धातु या र|ों की प्रतिमा घर के पूजा कक्ष में स्थापित करके मन मंदिर में स्थापना का प्रयास करना चाहिए। मांगलिक पाठ के पश्चात व्याख्यान पूर्ण हुआ।

धर्म . समाज

जैसलमेर. व्याख्यान माला के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।

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