भेदभाव नहीं, सभी के साथ समानता का व्यवहार करते हैं भगवान: माणकराम

Jaisalmaer News - पोकरण | शहर के जटाबास स्थित माली समाज सभा भवन में गुरूवार को पूर्णाहुति के साथ रामकथा का समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 10:15 AM IST
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पोकरण | शहर के जटाबास स्थित माली समाज सभा भवन में गुरूवार को पूर्णाहुति के साथ रामकथा का समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। कथा के अंतिम दिन शहर सहित आस-पास क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर राम कथा का आनंद लिया। कथा के अंतिम दिन रावण वृद्ध व शक्ति सैल का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। गुरूवार को सुबह 8.30 बजे कथा प्रारंभ हुई जो 10.30 बजे तक चलती है। कथा के अंतिम दिन विभिन्न प्रकार के झांकियों का भी प्रदर्शन किया। गया। इससे पहले कथा के अंतिम दिन कथा वाचक माणकराम व रामस्नेही संत गोपालदास का श्रद्धालुओं ने शॉल व माला पहनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। जटाबास स्थित माली सभा भवन में 13 मई से प्रारंभ हुई रामकथा 13 जून को सुबह 11 बजे पूर्णाहुति के साथ राम कथा का समापन हुआ। ठिकाणे में सुबह 10 बजे महा आरती का आयोजन किया गया। महाआरती के अवसर पर नगरपालिका उपाध्यक्ष शिवप्रताप माली, माली समाज के पंच शिवकरण, ठेकेदार पप्पूलाल सोलंकी, पूनाराम माली, पीथाराम सुथार, मगाराम सुथार, ईश्वरलाल सोलंकी, जैताराम मेघवाल, शिवदान चारण, इन्द्रगिरी, सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा में प्रवचन देते कथा वाचक माणकराम ने कहा कि घमंड से मति मलीन हो जाती है। नदियां जब तक सागर में नहीं मिल जाती तब तक उन्हें अपने नाम अर्थात गंगा, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, सिंधु या पाप विमोचनी होने का गर्व हो सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन जब यही समुद्र में जाकर समा जाती हैं तो उनमें अंतर करना मुश्किल है। कहने का आशय यह है कि नदियां पृथक-पृथक नामों व गुणों से चाहे जितनी विशेषता रखती हैं, लेकिन समुद्र में मिल जाने के बाद वह केवल समुद्र का जल ही कहलाता है।

पोकरण. जटावास में रामकथा के अंतिम दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

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