व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा मानवधिकार की सीमा में

Jaisalmaer News - जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जिला कारागृह में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया...

Dec 11, 2019, 09:11 AM IST
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जिला कारागृह में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया जाकर बंदियों को विधिक जानकारियां प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने बताया कि मानव अधिकार से तात्पर्य उन सभी अधिकारों से है जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से वर्णित किए गए हैं और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है। जिसकी भारतीय संविधान न केवल गारंटी देता है, बल्कि इसका उल्लंघन करने वालों को अदालत सजा भी देती है। वैसे तो भारत में 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में लाया गया था और 12 अक्टूबर 1993 में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर 1948 को घोषणा पत्र को मान्यता दिए जाने पर 10 दिसंबर का दिन मानवाधिकार दिवस के लिए निश्चित किया गया। सचिव शरद तवंर ने बंदियों को विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया व पात्रता, लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों के निस्तारण, प्ली बार्गेनिंग के प्रावधान व बंदियों के अधिकार व कर्त्तव्यों के बारे में विधिक जानकारियां प्रदान की।

जैसलमेर. जिला कारागृह में अायाेजित शिविर के दाैरान उपस्थित बंदी।

कन्या महाविद्यालय में मनाया गया मानवाधिकार दिवस

जैसलमेर. कन्या कॉलेज में कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बालिकाएं व प्रोफेसर।

जैसलमेर | स्थानीय मिश्रीलाल सांवल राजकीय कन्या महाविद्यालय जैसलमेर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। प्राचार्य डाॅ. महेन्द्र सिंह जाट ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि मानवाधिकार मनुष्य के वे मूलभूत सार्वभौमिक अधिकार है जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, धर्म आदि किसी भी अन्य कारक के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता। भारतीय संविधान इन अधिकारों की न सिर्फ गारंटी देता है बल्कि उनका संरक्षण भी करता है। प्रो. अशोक आर्य ने छात्राओं को संविधान प्रदत अधिकारों के साथ साथ उनसे जुड़े दायित्वों के बारे में जागरूक किया। महाविद्यालय छात्रा करीना भाटी, जैसमिन एवं नीतू तंवर ने भी मानवाधिकारों के परिप्रेक्ष्य में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य ने सभी छात्राओं एवं शिक्षकों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता एवं उनके संरक्षण एवं संवद्र्वन में अपने कर्तव्य निर्वहन की शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम में प्रो. के.डी. रतनू, प्रो. अजय कुमार, प्रो. हीरालाल, डाॅ. एच. एस. यादव, प्रो. अनमोल शर्मा, कपिलसिंह, गजेंद्र व मेहराज उपस्थित रहे।

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