दूसरे साल गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण, होंगे अनुष्ठान

Jaisalmaer News - गुरु पूर्णिमा पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा, किंतु इस बार चंद्रग्रहण होगा। शाम 4.30 बजे से सूतक लग जाएंगे और इस दौरान...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:50 AM IST
Jaisalmer News - rajasthan news lunar eclipse rituals on guru purnima second year
गुरु पूर्णिमा पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा, किंतु इस बार चंद्रग्रहण होगा। शाम 4.30 बजे से सूतक लग जाएंगे और इस दौरान भोजन करना वर्जित रहेगा।

इस सदी का दूसरा ढाई घंटे से अधिक लंबी अवधि वाला खंडग्रास चंद्रग्रहण गुरु पूर्णिमा पर 16 व 17 जुलाई की दरमियानी रात को होगा। इसकी अवधि 2.59 मिनट रहेगी। इसके पूर्व वर्ष 2018 में 27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण था, जो 3 घंटे 51 मिनट तक रहा था। इस दिन भी गुरु पूर्णिमा थी। इसके पहले वर्ष 2000 में गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण हुआ था। पंडितों के अनुसार इस बार चंद्रग्रहण रात 1.31 बजे प्रारंभ होकर तड़के 4.30 बजे तक रहेगा। इसके पूर्व इसका सूतक काल शाम 4.30 बजे प्रारंभ हो जाएगा। सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। घरों व मंदिरों में शाम की आरती नहीं होगी। अगले दिन सुबह शुद्धि करने के बाद ही पूजा घर खोले जाएंगे। इस दिन गुरु पूर्णिमा होने पर व्यास पूजा व दीक्षा आदि कार्यक्रम भी सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। इसलिए अधिकतर मंदिर दोपहर एक बजे तक खुलेंगे। ज्योतिषियों के अनुसार चंद्र ग्रहण के दाैरान विभिन्न राशियों के जातक अपने प्रधान ग्रहों के अनुसार दान-पुण्य कर पुण्यलाभ कमाएंगे। कहीं गोसेवा की जाएगी तो कहीं गरीबों में खाद्य सामग्री, फल और कपड़े बांटे जाएंगे। इसके साथ ही भजन-कीर्तन का भी आयोजन जोरों पर रहेगा। ग्रहण समाप्ति के बाद घरों और मंदिरों को धोकर विधि-विधान से प्रभु की पूजा-अर्चना की जाएगी और प्रसाद बांटा जाएगा।

भोजन से बचें, जरूरी हो तो जलग्रहण करें, क्योंकि स्वास्थ्य और धर्म विरुद्ध

सूतक काल में हमें भोजन से बचना चाहिए, बल्कि आवश्यक होने पर ही जल ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि भोजन करना स्वास्थ्य और धर्म की दृष्टि से अनुचित है। पंडितों ने बताया कि चंद्रग्रहण में सोम तत्व का प्रवाह कम हो जाता है। इससे आॅक्सीजन प्रभावित होता है। इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इस दौरान भोजन करने से आंत संबंधी रोग पनपते हैं। अध्यात्म की दृष्टि से माना गया है कि राहु के प्रभाव से चंद्रमा का संकट काल होता है। ऐसे में देवताओं को बल देने के लिए पूजा-आराधना, जाप, हवन, कीर्तन करना चाहिए। गरीबों को अन्नदान करना चाहिए।

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