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खाद्य सुरक्षा योजना में 4 साल में 72 लाख व्यक्ति के नाम हटाए

जयपुर में सबसे ज्यादा 12 लाख, नागौर में 8 लाख लोग योजना से निष्कासित जयपुर | खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:40 AM IST
जयपुर में सबसे ज्यादा 12 लाख, नागौर में 8 लाख लोग योजना से निष्कासित

जयपुर | खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा है कि प्रदेश में पिछले चार साल में 72 लाख से अधिक व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा योजना से निष्कासित किया गया है। इनमें सबसे अधिक 12 लाख लोग जयपुर और करीब साढ़े आठ लोग नागौर जिले से संबंधित हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से किसी भी पात्र लाभार्थी का नाम नहीं हटाया गया है। चयनित लाभार्थियों के सत्यापन कार्यक्रम के दौरान इनके पास प्रमाणित दस्तावेज नहीं पाए गए थे। इस कारण उनका नाम सूचियों से निष्कासित किया गया है। राज्य विधानसभा में सोमवार को एक सवाल के जबाव में यह जानकारी दी गई है। विधायक कामिनी जिंदल के सवाल के जबाव में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 4 करोड़ 42 लाख 81 हजार 458 लोग इस योजना से जुड़े हुए हैं। दस्तावेजों के अभाव में जनवरी, 2014 से जनवरी, 2018 तक 72 लाख 13 हजार 791 व्यक्तियों के नाम निष्कासित कर दिए गए हैं। छह जिलों में सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं। इनमें जयपुर में 12 लाख 41 हजार, नागौर में 8 लाख 49 हजार, हनुमानगढ़ में 5 लाख 76 हजार, बाड़मेर में 5 लाख 74 हजार, बीकानेर में 4 लाख 41 हजार और डूंगरपुर में 4 लाख 6 हजार लोग शामिल हैं।

जालोर में सबसे कम छह नाम हटाए : सरकार ने स्पष्ट किया कि जालोर में सबसे कम छह लोगों के नाम योजना से हटाए गए, जिनके पास दस्तावेज नहीं थे। इसी तरह चूरू में 1243, बूंदी में 2120, धौलपुर में 331, कोटा में 1023, प्रतापगढ़ में 1727, सिरोही में 1567, दौसा में 3899, उदयपुर में 5958, झुंझुनूं में 17560 व झालावाड़ में 13721 लोगों के नाम योजना से निष्कासित किए गए हैं। इसके अलावा 16 अन्य जिलों में 50 हजार से चार लाख लोगों तक के नाम हटाए गए हैं।

अपील के 2.50 लाख आवेदन निरस्त : पिछले चार साल में नाम जुड़वाने के लिए 8 लाख 56 हजार 239 लोगों ने आवेदन किया। इनमें से 4 लाख 89 हजार 182 आवेदनों को स्वीकार कर लिया गया। वहीं, 2 लाख 50 हजार 520 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया।



हालांकि, इसका कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है। एक लाख 16 हजार से ज्यादा आवेदन सरकार के पास लंबित है। इन पर निर्णय किया जाना है।