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अधूरी तैयारियों के बीच नामांकन प्रक्रिया के एक दिन पहले किसानों को मिलेगा सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:01 AM IST

Jalore News - भास्कर न्यूज | जालोर/सांचौर विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से एक दिन पहले सांचौर व...

Sanchore - farmers will get narmada water for irrigation one day before the nomination process incomplete preparations
भास्कर न्यूज | जालोर/सांचौर

विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से एक दिन पहले सांचौर व चितलवाना क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी रविवार को ही देना शुरू किया जा रहा है। हालांकि किसानों के लिए ये खुशी की खबर है, लेकिन नर्मदा विभाग की तैयारियां अधूरी है। जिस कारण कई किसानों को पानी मिलना संभव नहीं हो पाएगा। दरअसल, कई स्थानों पर वितरिकाओं की सफाई नहीं हुई है तो कहीं पर मोटरों से ऑयल व कॉपर भी गायब हो चुका है। जिस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाएगा।

नर्मदा विभाग की ओर से रविवार से किसानों को रबी सीजन की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल स्तर पर न तो वितरिकाओं की सफाई का कार्य किया गया है और न ही मोटरों को ठीक किया गया है। कई मोटरों से तो चोरों ने कॉपर भी चुरा ली है। यह ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। बल्कि हर बार विभाग की ओर से समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है और वितरिकाओं में पानी छोड़ दिया जाता है। कई बार तो वितरिकाएं अव्यवस्था के कारण क्षतिग्रस्त भी हो चुकी है। उपखंड क्षेत्र के करीब 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई के लिए नर्मदा मुख्य नहर से निकाली गई सांचौर लिफ्ट कैनाल की सिंचाई कई वर्ष बीत जाने के बाद भी व्यवस्थित रूप से विभाग शुरू नहीं करवा पाया है। ऐसे में सिंचाई के पानी को लेकर किसानों को हर साल धरना प्रदर्शन सहित विरोध करने के बाद भी किसानों को भरपूर पानी मुहैया विभाग नहीं करवा पा रहा है।

कई मोटरों से कॉपर भी हो चुका है चोरी, रबी सीजन की सिंचाई के लिए गुजरात से अधिक मिलेगा पानी

सांचौर. रेत से अटी पड़ी लिफ्ट कैनाल से निकलने वाली वितरिका व चौरा माइनर पर डिग्गी से चोरी व तोडफ़ोड़ को दिखाता किसान।

डिग्गियों पर लगे ट्रांसफार्मर्स से चुरा लिया है ऑयल

वर्तमान में सांचौर लिफ्ट कैनाल से निकलने वाली कई वितरिकाओं पर बनी डिग्गीयों पर लगे विद्युत ट्रांसफॉर्मर के अंदर से ऑयल व तांबा चुराकर हाथ साफ कर लिया है, लेकिन विभाग अभी भी चोरी किया गया माल बरामदगी का इंतजार कर रहा है। चौरा माइनर सहित कई माइनरों व वितरिकाओं से चोरी किया जा चुका है। जिसका मामला पुलिस थाने में दर्ज है, लेकिन विभाग के अधिकारी बता रहे है उन वितरिकाओं पर चोरी हुआ माल बरामद होने के बाद ही वापिस लगाया जाएगा। ऐसे में अधूरे कार्य के कारण पानी टेल तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है। टेल के किसानों की यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

पुलिस टीम करेगी गश्त : पिछले तीन वर्ष से विभाग सिंचाई के लिए नर्मदा की सभी वितरिकाओं में पानी छोड़ते है, लेकिन तीन सालों से वितरिकाओं से किसान अवैध रूप से सिंचाई कर लेते हैं। जिस कारण कार्य अव्यवस्थित हो जाता है। इस बार अवैध सिंचाई रोकने के लिए पुलिस टीम तैनात की जाएगी जो सिंचाई के दौरान गश्त करेगी।

वितरिका अटी पड़ी है कचरे में, आखिर टेल तक कैसे पहुंचेगा पानी

लिफ्ट कैनाल से निकलने वाले सभी अधिकांश वितरिकाओं व माइनर में रविवार से पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन वितरिकाओं पूरी तरह से रेत में अटी हुई है। ऐसे में सभी वितरिकाओं के अंतिम छोर तक आखिरी कैसे पानी पहुंचेगा। इधर, अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश वितरिकाओं की सफाई हो गई बाकी पर अध्यक्षों को निर्देशित किया गया है, लेकिन अध्यक्षों का कहना है कि कोई निर्देश नहीं मिला है।

635 मिलियन घन मीटर मिलेगा पानी

नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की सरदार सरोवर जलाशय नियंत्रण समिति की बैठक 2 नवम्बर को इंदौर में आयोजित हुई थी। जिसमें बांध के एरिया में बारिश कम होने का हवाला देते हुए आवश्यक 597 मिलियन घन मीटर के विरुद्ध राजस्थान को 396 मिलियन घन मीटर पानी देने की सहमति हुई थी, लेकिन यह पानी राजस्थान में सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं था। जिसके बाद राजस्थान के अधिकारियों की मांग पर पिछले साल राजस्थान के हिस्से का पानी गुजरात को दिया गया था। उस 239 मिलियन घन मीटर पानी गुजरात के हिस्से से कम करके राजस्थान को दिया जाएगा। जिसके कारण अब राजस्थान को 635 मिलियन घन मीटर पानी मिल सकेगा।

सांचौर लिफ्ट कैनाल पर एक नजर

सांचौर लिफ्ट कैनाल लालपुर हैड से बागली टेल तक 46 किलोमीटर की लंबाई, 2 लिफ्ट सिस्टम, 13 माइनर, 11 सब माइनर, 371 डिग्गी, 50 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचाई का लक्ष्य है।

पिछली सीजन में नहीं मिला था सिंचाई के लिए पानी

जानकारी के अनुसार सांचौर व चितलवाना उपखंड के गांवों में नहर से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है, लेकिन 2017 में आई बाढ़ के कारण नहरी तंत्र पूरी तरह बिखर गया था, जिसके बाद पिछली सीजन में रबी की सीजन के लिए किसानों को पानी नहीं दिया गया था। नर्मदा नहर परियोजना के मुख्य अभियंता गिरीश लोढ़ा ने बताया कि पिछली साल नहर की ज्यादातर वितरिकाएं क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी नहीं दिया गया था। वहीं पिछले साल पानी की सप्लाई शुरू नहीं होने के कारण नहर की सभी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं का वापस निर्माण कार्य किया गया। अब सभी वितरिकाओं में रबी की फसलों में सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा।

अंतिम छोर तक पानी पहुंचना मुश्किल


अधिकांश माइनर रेत से अटी पड़ी


आज से पानी छोड़ेंगे, मोटरें ठीक करेंगे


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