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9 साल के जितेंद्र के दिल में था छेद, जोधपुर में ऑपरेशन के बाद मिला नया जीवन

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बाबूलाल बिश्नोई ने बताया कि जन्मजात बीमारियां, शारीरिक और मानसिक कमजोरी...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:55 AM IST
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बाबूलाल बिश्नोई ने बताया कि जन्मजात बीमारियां, शारीरिक और मानसिक कमजोरी तथा बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आदि बीमारियों का उपचार इस कार्यक्रम के तहत होता है। वहीं जन्मजात मोतियाबिंद, कटे होंठ, कटे तालु, न्यूरलट्यूब डिफेक्ट आदि रोगों का उपचार भी किया जाता है। शून्य से 18 साल के जन्मजात विकृतियों से ग्रसित बच्चों का सरकार की ओर से सरकारी व निजी अस्पतालों में निशुल्क ऑपरेशन व इलाज कराने की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के तहत 38 प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। जिले में वर्ष 2017-18 में 1891 स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मदरसों में 1 लाख 46 हजार 775 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें से 9 हजार 320 बच्चे बीमार मिले, उनको उपचार के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया गया। इनमें से 5 हजार 740 बच्चों का उपचार हो चुका है। दिल की बीमारी से ग्रस्ति 6, कटे फटे होंट व तालू के 7, मुड़े हुए पैर के 4 तथा दंत रोग से ग्रस्ति 897 बच्चों का उपचार किया जा चुका है।

किसान पिता ने ली राहत की सांस, जताया चिकित्सा विभाग का आभार

भास्कर न्यूज | जालोर

जन्मजात विकृति से जूंझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हो रहा है। जालोर जिले के जसवंतपुरा ब्लॉक में तवाव गांव के 9 साल के जितेंद्र कुमार को इसी कार्यक्रम के तहत नया जीवन मिला है। जितेंद्र के दिल में छेद था जिसकी वजह से उसको सांस लेने व खेलने-कूदने में दिक्कत होती थी। थोड़ा सा चलने पर सांस फूल जाती थी।

पिता लसाराम खेतीबाड़ी करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने से बेटे के दिल का ऑपरेशन करवाना मुश्किल था। सरकार ने उसके बेटे का जोधुपर के निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाया है। ऑपरेशन का संपूर्ण खर्चा 1 लाख 15 हजार रुपए भी सरकार ने ही वहन किया है। आर्थिक रूप से कमजोर पिता लसाराम ने बेटे का ऑपरेशन करवाने पर चिकित्सा विभाग का आभार भी जताया। बीसीएमओ डॉ. विक्रमसिंह चारण ने बताया कि डॉ. रामदेव व उनकी टीम ने गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों की स्वास्थ्य जांच के दौरान जितेंद्र का ऑपरेशन के लिए चयन किया। ऑपरेशन के बाद जितेंद्र को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी हैं और घर पर स्वस्थ है।

स्कूल में स्वास्थ्य जांच के दौरान बीमारी की जानकारी हुई, अब परिजनों को भी मिली खुशी

आरबीएसके में 38 तरह की बीमारियों का होता है उपचार