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वराहश्याम मंदिर में 8 फीट की प्रतिमा, इसलिए क्षेत्र में अलग पहचान

2 वर्ष पहले
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मुख्या बाजार में स्थित भगवान वराहश्याम का मंदिर कई मान्यताओं को लेकर आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध माना जा रहा हैं। मान्यता है कि मंदिर में विराजमान प्रति प्राचीन वराहश्याम भगवान की प्रतिमा अयंत्र कहीं नहीं है। इसलिए किसी भी धार्मिक पर्व त्यौहार पर 36 कौम के शहरवासी वराहश्याम भगवान के दर्शन करके ही शुभ कार्य की शुरूआत करते हैं। ट्रस्ट की ओर से देवझूलनी एकादशी, गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी, ऊब छठ, दीपावली सहित कई पर्वो पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान वराहश्याम को विशेष अन्नकूट का भोग लगाया जाता है जिसमें 32 भोजन 33 साग के व्यंजन बनाए जाते है।

धर्म-समाज
वराहश्याम की प्रतिमा के पास विराजमान हैं इंद्राणी व नारद की प्रतिमाएं
मान्यताओं के अनुसार सैकड़ों वर्ष पुराना वराहश्याम का यह मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मंदिर में स्थापित आठ फीट लंबी प्रतिमा अपने आप में विशेष है। मूर्ति दाएं भुजा में मेदिनी (लक्ष्मी) को धारण किए हुए। उनके चरणों के पास नाग-नागिन का युगल है। इनके पास इंद्राणी तथा नारद की प्रतिमाएं भी विराजमान है। मंदिर परिसर में मुख्य देव प्रतिमा के अलावा ऐसी कई छोटी-छोटी मूर्तिया भी स्थापित है जो दुर्लभ है। मंदिर की अन्य दीवारों में शेषशायी विष्णु, चक्रधारी विष्णु, यक्ष देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित है। हालांकि मुख्य प्रतिमा के बारे में कोई स्पष्ट शिलालेख मौजूद नही है। मंदिर के पास वाली गली में सीधे दर्शनों के लिए एक छोटी खिड़की भी लगी हुई है।

विष्णु के अवतार भगवान वराहश्याम

वराह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तृतीय अवतार हैं जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवतरित हुए। एक समय जब पृथ्वी रसातल में डूब चुकी थी तो भगवान विष्णु ने वराह अवतार के रूप में प्रकट होकर पृथ्वी को समुद्र से अपने दांतो पर धारण कर बाहर निकाला था। उसी समय भगवान वराहश्याम पर आक्रमण करने पर हिरण्याक्ष को मार डाला था।

आज से मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रम

वराहजयंती पर रविवार को मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आज से ही शहर में निकलने वाली विभिन्न शोभायात्राओं की भी शुरूआत होगी। जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर एवं प्रतिमा को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। रविवार को वराहजयंती पर शहर में सांय को मेले का आयोजन किया जाएगा। 2 सितंबर को गणेश चतुर्थी एवं 9 को देवझूलनी एकादशी पर विशाल मेले का आयोजन इसी मंदिर से किया जाएगा। मेले में व्यवस्थाओं के लिए वराहश्याम ट्रस्ट के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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