बच्चे के भविष्य के लिए जल्द से जल्द निवेश शुरू करना बेहतर

Jalore News - माता-पिता का काफी वक्त बच्चे के भविष्य की चिंता में बीतता है। बच्चों की पढाई और उनके विवाह के लिए बचत और निवेश करना...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:46 AM IST
Bala News - rajasthan news better to start investing as early as possible for the future of the child
माता-पिता का काफी वक्त बच्चे के भविष्य की चिंता में बीतता है। बच्चों की पढाई और उनके विवाह के लिए बचत और निवेश करना उनके महत्वपूर्ण आर्थिक लक्ष्यों में एक होता है। हमारा इन-हाउस विश्लेषण यह बताता है कि पिछले 10 वर्षों में स्कूल फीस, ट्यूशन फीस और अन्य संबंधित खर्च 150% तक बढे हैं। प्राइवेट स्कूलों में पढाने का औसत खर्च इसी अवधि के दौरान 175% तक बढा है। प्रोफेशनल और तकनीकी शिक्षा का खर्च 96% तक ऊपर गया है। भारत में उच्च शिक्षा पर होनेवाला खर्च कुल घरेलू आय का 18.3% होता है। लेकिन सच्चाई ये है कि बहुत कम संख्या में माता-पिता अपने बच्चे की शिक्षा के लिए योजना बनाते हैं और खासतौर पर इसके लिए निवेश करते हैं। परिणामस्वरूप, बढ़ती आकांक्षाएं और शिक्षा की लागत के लिए कर्ज और शैक्षिक ऋण से ही धन का प्रबंध करना होता है। तो माता-पिता को क्या करना चाहिए? यहां पर ध्यान में रखने के लिए पांच महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं:

1. जल्दी शुरुआत करें : अपने बच्चों के भविष्य की जरूरतों के लिए जल्द योजना बनाएं और इन निवेशों को बढऩे के लिए पर्याप्त समय दें। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, आपको उतना ही अधिक लाभ मिल सकेगा। उदाहरण के लिए यदि आप अपने बच्चे के जन्म के समय ही बचत और निवेश शुरू करते हैं तो जरा कल्पना कीजिए कि जब वह 18 वर्ष का होगा तब आप कितना धन संग्रह कर चुके होंगे।

2. निवेश करना न भूलें : बच्चे के भविष्य की योजना बनाने के लिए रिटर्न का स्वरूप और समयावधि को देखते हुए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इक्विटी फंडों में भी कुछ समाधान केंद्रित इक्विटी फंड्स हैं जो बच्चों के भविष्य के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं, और उनकी लॉक-इन अवधि स्थिर अवधि के दौरान निवेश की आदत विकसित करती है। अच्छा रिटर्न पाने के लिए सही निवेश कीजिए।

3. अनुशासित बनिए: बच्चे के भविष्य के लिए आर्थिक नियोजन कोई अल्प कालिक लक्ष्य नहीं है। भावी खर्चों के स्वरूप और विविधता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक धन संग्रह करने के लिए सटीक नियोजन और स्थिर नजरिया आवश्यक होता है। निवेश विकल्पों के रूप में आप चाहे जो कुछ भी चुनें, सुनिश्चित करें कि ये सतत और नियमित हो।

4. एसआईपी का उपयोग कीजिए : एसआईपी आधारित निवेश सुनिश्चित करता है कि निवेशक अनुशासित रहें और उनकी आर्थिक योजना सही राह पर रहे। पूर्वनिर्धारित राशि उनके बैंक खाते से आवधिक अंतरालों पर अपने आप काट ली जाती है और उनका निवेश चुनिंदा म्युचुअल फंड योजनाओं में किया जाता है। एसआईपी में चक्रवृद्धि का लाभ मिलता है जो महंगाई को मात देनेवाले रिटर्न प्रदान करता है।

5. एसेट अलोकेशन के जरिए डायवर्सिफाई करें:

विभिन्न एसेट की श्रेणियों में अपने निवेशों को डायवर्सिफाई करना आपके पोर्टफोलियो को संतुलन प्रदान करता है। म्यूचुअल फंड्स के अंदर आप उसे 4 श्रेणियों में बांट सकते हैं: वेल्थ सोल्यूशन, इनकम सोल्यूशन्स, टैक्स-सेविंग सॉल्यूशन्स और सेविंग्स सोल्यूशन। म्यूचुअल फंड स्कीमों को इन चार समूहों के तहत वर्गीकृत किया जा सकता है और इन सभी चार जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विविधताएं उपलब्ध हैं।

ए.बालासुब्रमण्यन, एमडी, सीईओ आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी

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