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भास्कर टीम बांगड़ अस्पताल के हर वार्ड में पिस्टल लेकर घूमी हवा में भी लहराई, किसी ने नहीं रोका, सुरक्षाकर्मी बातों में थे व्यस्त

2 वर्ष पहले
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बांगड़ अस्पताल के सबसे संवेदनशील ट्रोमा वार्ड में रविवार रात घायल युवक पर हमला कर मरीजों में दहशत फैलाने वाली वारदात के बाद भी अस्पताल प्रबंधन सुरक्षा प्रबंधों को लेकर लापरवाह बना हुआ है। मंगलवार को दैनिक भास्कर टीम ने पुलिस प्रशासन को विश्वास मेंं लेकर सुरक्षा व्यवस्था की रियलिटी जांची। टीम ने दो युवकों के साथ लाइसेंसधारी पिस्टल लेकर अस्पताल में प्रवेश किया। हर वार्ड में घूमे, यहां तक कि कई स्थानों पर हवा में भी लहराई, लेकिन किसी ने रोका नहीं और न ही किसी ने टोका। खास बात यह थी कि रोज अस्पताल जाने वाला रिपोर्टर सिर्फ मॉनिटर कर रहा था। लाइसेंसधारी व्यक्ति ही अस्पताल में घूम रहा था। सुरक्षा गार्ड तो बातों में ही लगे नजर आए। यहां तक कि टीम ने सर्जिकल वार्ड में भर्ती घायल विनोद चौहान के पास भी कुछ मिनट तक बात की। हैरान करने वाली बात तो यह है कि उस वक्त स्टाफ कक्ष में कोई मौजूद नहीं था। एसपी आनंद शर्मा को भास्कर ने जब यह पूरी कहानी बताई तो वे खुद हैरत में पड़ गए।

भास्कर टीम ने शहर के ही दो जागरूक युवाओं के साथ पिस्टल लेकर मुख्य द्वार से पीएमअाे चैंबर, सर्जिकल वार्ड, अाेपीडी काउंटर, नर्सिंग अधीक्षक कक्ष हाेते हुए वापस अस्पताल से निकले। इस दाैरान कई नर्सिंगकर्मियों ने युवकों को पिस्टल के साथ देखा। बाद में दोनों पीछे के रास्ते से ट्राेमा व आर्थोपेडिक वार्ड में घूमे। इसके बाद नर्सिंग कक्ष से हाेते हुअा ट्राेमा वार्ड से बाहर निकले। यहां तीन सुरक्षाकर्मी तैनात थे। तीनों बातों मेंं ही इतने व्यस्त थे। इस 30 मिनट के स्टिंग में कई लाेगाें ने पिस्टल लिए युवकों काे देखा भी, लेकिन पुलिस में शिकायत तक दर्ज नहीं करवाई। मंगलवार देर रात खबर लिखे जाने तक मामले में किसी को भनक तक नहीं लगी थी।

रात में तो भगवान ही मालिक, क्योंकि पुलिसकर्मी खुद ताला लगाकर सोते हैं : रात में तो बांगड़ अस्पताल में भगवान भरोसे ही हो जाता है। रात में तो असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। यह लोग शराब की चुस्कियां भी अस्पताल परिसर में ही लेते रहते हैं। रात 11 बजे बाद तो पुलिसकर्मी भी चौकी के बाहर ताला लगाकर सो जाते हैं।

भास्कर स्टिंग

बांगड़ अस्पताल की सुरक्षा जांचने भास्कर ने मंगलवार को स्टिंग किया था। इसमें एक युवक हाथ में पिस्टल लेकर यूं पूरे अस्पताल में घूमा। सुरक्षा कारणों से इस युवक का नाम व चेहरा छुपाया गया है।

हैरानी है... रविवार रात ट्रोमा वार्ड में बेड पर बैठे इसी युवक से सात बदमाशों ने मारपीट की थी। स्टिंग में शामिल युवक पिस्टल लेकर उसके पास पहुंचा, लेकिन यहां भी उससे किसी ने पूछताछ नहीं की।

अस्पताल में 30 सुरक्षा गार्ड, पुलिस चौकी भी फिर भी इतनी बड़ी लापरवाही

सबसे बड़ा सवाल है कि अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा के लिए 30 गार्डों की सेवाएं हायर कर रखी है। अस्पताल में होने वाली किसी भी घटना के लिए सबसे पहले यह जिम्मेदार है। इसके बाद भी गार्ड अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। बांगड़ अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के लिए कुल 30 गार्ड नियुक्त किए गए हैं। इसमें 5 गार्ड रात में ड्यूटी करते हैं। शेष 25 गार्ड दिन में सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा अस्पताल में पुलिस चौकी भी है। जहां 24 घंटे पुलिस स्टाफ तैनात रहता है। इसके बाद भी रविवार रात की वारदात ने अस्पताल तथा पुलिस चौकसी की पोल खोल दी थी।

6 अगस्त को प्रकाशित समाचार।

मैं हैरान हूं, अस्पताल में पिस्टल लेकर गई टीम को किसी ने नहीं रोका : एसपी

दैनिक भास्कर टीम ने मंगलवार सुबह बांगड़ अस्पताल की सुरक्षा में जांच के लिए स्टिंग में सहयोग मांगा था। मुझे भरोसा था कि एक रात पहले की घटना के बाद अस्पताल में गार्ड अलर्ट होंगे। वे भास्कर टीम को जरूर रोकेंगे। मुझे हैरानी है कि टीम लाइसेंसशुदा लोडेड पिस्टल लेकर वार्डों में घूमी, लेकिन किसी ने नहीं रोका। भास्कर ने अलर्ट कर दिया है। समाचार पत्र आगाह करते हैं, मैं इसके लिए धन्यवाद देता हूं। मैं बुधवार सुबह अस्पताल में बैठक करूंगा। गार्ड और स्थानीय पुलिस चौकी की टीम के साथ बैठक करूंगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था कड़ी हो। सीसीटीवी फुटेज भी तुरंत ठीक करवाने के प्रयास करूंगा। - आनंद शर्मा, एसपी, पाली

सीधी बात : अंबादान राव, पीएमओ

Q. युवक पिस्टल लेकर अस्पताल में घूमा उसे किसी ने नहीं राेका?

A.अस्पताल में 30 सिक्यूरिटी गार्ड है। किसी ने नहीं राेका ताे यह साेचने की बात है। मैं अभी नागाैर अाया हुअा हूं। चार्ज डाॅ. एचएम चाैधरी के पास था।

Q. सीसीटीवी कैमरे में भी युवक कैद हुअा हाेगा अाईटी विभाग क्या कर रहा था?

A. अस्पताल में आगे की तरफ 8 अाैर 4 कैमरे पीछे चालू है। बाकी 16 कैमरे खराब पड़े हैं। नए कैमरे की सरकार से मांग की गई है। बजट अाते ही लगवा दिए जाएंगे।

Q. सर्जिकल वार्ड में मारपीट का शिकार हुअा युवक भर्ती, लेकिन स्टाफ नदारद क्याें?

A. सर्जिकल वार्ड में जिसकी ड्यूटी थी उसे रहना चाहिए। यदि वह वहां से नदारद था तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Q. मारपीट का शिकार हुए युवक से पिस्टल युवक 1 मिनट तक बात करता है। काेई भी सुरक्षाकर्मी उसे क्याें नहीं राेकता?

A. सुरक्षाकर्मी उसे नहीं राेकते हैं ताे यह बहुत गलत है। दिन में 25 सुरक्षाकर्मियाें काे ड्यूटी हाेती है अस्पताल में भर्ती हुए मरीजाें की सुरक्षा करना। पाली अाने के बाद मामले की जानकारी लेता हूं।

पिस्टल वाले को नहीं रोका, ये तो सोचने वाली बात है

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