सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे दाेषी, एेसे ताे भरोसा उठ जाएगा: हाईकाेर्ट

Jalore News - नई दिल्ली | निर्भया के चाराें गुनहगाराें काे 22 जनवरी काे फांसी नहीं हाे पाएगी। डेथ वारंट के खिलाफ दाेषी मुकेश की...

Jan 16, 2020, 09:10 AM IST
Khara News - rajasthan news daesh who is misusing the system will lose confidence high court
नई दिल्ली | निर्भया के चाराें गुनहगाराें काे 22 जनवरी काे फांसी नहीं हाे पाएगी। डेथ वारंट के खिलाफ दाेषी मुकेश की याचिका पर सुनवाई के दाैरान दिल्ली सरकार ने बुधवार काे हाईकाेर्ट काे यह बताया। सरकार ने कहा कि अगर मुकेश की दया याचिका खारिज हाे गई ताे भी 14 दिन की मोहलत का नया डेथ वारंट जारी करना पड़ेगा। जेल मैनुअल के अनुसार चाराें दाेषियाें काे एक साथ ही फांसी की सजा दी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम काेर्ट से क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हाेने के बाद मुकेश ने मंगलवार काे राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी। डेथ वारंट के खिलाफ भी उसने हाईकाेर्ट में अर्जी लगाई थी। हालांकि, काेर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणियाें के साथ मुकेश की अर्जी खारिज कर दी। हाईकाेर्ट ने कहा कि दोषी चालाक रणनीति अपनाकर सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में लोगाें का सिस्टम से भरोसा ही उठ जाएगा। जस्टिस मनमाेहन अाैर संगीता ढींगरा सहगल की बेंच ने कहा कि दाेषी चालाकी से काेर्ट के साथ खेल रहे हैं।





काेर्ट ने मुकेश काे डेथ वारंट के खिलाफ ट्रायल काेर्ट में जाने काे कहा है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की पटियाला हाउस काेर्ट ने गत 7 जनवरी काे चाराें दाेषियाें का डेथ वारंट जारी किया था। उसमें 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी का वक्त तय किया गया था।

हाईकाेर्ट लाइव
मुकेश की याचिका पर जस्टिस मनमाेहन अाैर संगीता ढींगरा सहगल की बेंच ने सुनवाई की। मुकेश की अाेर से वकील रेबेका जाॅन ने पक्ष रखा। दिल्ली सरकार की अाेर से राहुल मेहरा, केंद्र की अाेर से एडिशनल साॅलिसीटर जनरल मनिंदर अाचार्य अाैर निर्भया के परिजनाें की अाेर से जितेंद्र झा ने दलीलें रखीं। पढ़िए हाईकाेर्ट की कार्यवाही लाइव...

रेबेका जॉन: मुकेश की दया याचिका लंबित है। इसलिए डेथ वारंट पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि दाेषी काे आखिरी सांस तक अपनी पैरवी का अधिकार है। क्यूरेटिव पिटीशन अाैर दया याचिका खारिज हाेने से पहले डेथ वारंट गलत है।

जस्टिस मनमोहन: माैत की सजा मई 2017 में सुनाई गई थी। क्यूरेटिव पिटीशन अाैर दया याचिका दायर में अापने ढाई साल लगा दिए। पुनर्विचार याचिका खारिज हाेने के बाद भी डेढ़ साल इंतजार क्यों किया?

रेबेका: कानून दो बार दया याचिका दाखिल करने की इजाजत नहीं देता। हम चाहते हैं कि डेथ वारंट रद्द हाे।

जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल: क्या दोषी डेथ वारंट का इंतजार कर रहा था? अब दया याचिका, अागे किसी अाैर याचिका काे लंबित बताकर स्टे की मांग करेगा।

जितेंद्र झा: जेल प्रशासन ने दया याचिका के लिए पिछले साल 29 अक्टूबर अाैर 18 दिसंबर काे दाेषियाें काे नाेटिस दिए थे।

जस्टिस मनमोहन: पहले नोटिस में इतनी देरी क्यों की? दोषी सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में तो लोगाें का सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा।

राहुल मेहरा: दया याचिका खारिज होने के बाद ही फांसी हाे पाएगी। 22 जनवरी तक फांसी संभव नहीं है। दया याचिका खारिज हुई तो भी 14 दिन की मोहलत का नया डेथ वारंट जारी करना होगा। दया याचिका सरकार से उपराज्यपाल, वहां से गृह मंत्रालय अाैर फिर राष्ट्रपति के पास जाएगी।

जस्टिस मनमोहन: आपकी सरकार और केंद्र के बीच तालमेल में दिक्कत है। लंबा वक्त लग जाएगा। सिस्टम के दुरुपयोग के पीछे चालाक रणनीति दिखती है।

मनिंदर अाचार्य: याचिका पर सुनवाई नहीं हाेनी चाहिए। अब एक ने याचिका दायर की है, फिर दूसरा करेगा। उसके बाद तीसरा और फिर चौथा दायर करेगा। याचिकाअाें की कतार रहेगी अाैर सजा में देरी होती जाएगी। यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयाेग है।

जस्टिस मनमोहन: डेथ वारंट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ही पालन था। दाेषी सुप्रीम कोर्ट ही जाए। वह एक कोर्ट को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहा है। यह सब नए तरीके से हो रहा है। आप हमारे साथ गेम खेल रहे हैं। डेथ वारंट जारी होने के बाद 14 दिन का वक्त दिया जाता है। अाैर अाप 14वें दिन ही दया याचिका दायर करते हैं ताे क्या हाेगा? क्या इसका कोई वक्त नहीं होना चाहिए। उचित कारण जैसे मां काे कैंसर या मानसिक बीमारी इत्यादि के बिना सजा माफ नहीं की जाती।

जितेंद्र झा: इस मामले में दिल्ली सरकार ने भी देरी की है। दोषी अपने अधिकार की बात कर रहे हैं। पीड़ित परेशान हैं अाैर दोषी एनज्वॉय कर रहे हैं।

मेहरा: खराबी पूरे सिस्टम में ही है। सुप्रीम कोर्ट के अादेश के बाद जिला अदालत को डेथ वारंट जारी करना चाहिए था।

जितेंद्र झा: यह ताे दिल्ली सरकार की ड्यूटी थी कि सेशन कोर्ट जाकर मौत की सजा पर अमल कराएं।

जस्टिस मनमोहन: 7 जनवरी के निचली अदालत के आदेश में कोई कमी नहीं है। मई 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद क्यूरेटिव और दया याचिका दायर नहीं की गई। दोषियों ने नियमों का उल्लंघन किया है। वह निचली अदालत में ही जाएं।

महिला अायाेग ने मामला लटकाने के लिए दिल्ली सरकार की निंदा की

राष्ट्रीय महिला अायाेग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने निर्भया के दाेषियाें की फांसी लटकाने के हथकंडाें के लिए दिल्ली सरकार की निंदा की। उन्हाेंने अाग्रह किया कि दाेषियाें काे डेथ वारंट की तारीख 22 जनवरी काे ही फांसी पर लटकाया जाए।

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दिल्ली सरकार ने मुकेश की दया याचिका खारिज की, डेथ वारंट पर राेक लगवाने ट्रायल काेर्ट गया

दिल्ली सरकार ने मुकेश की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश उपराज्यपाल के पास भेज दी है। उपराज्यपाल यह सिफारिश गृह मंत्रालय काे भेजेंगे। वहां से यह राष्ट्रपति के पास जाएगी। वहीं, हाईकाेर्ट में अर्जी खारिज हाेने के बाद डेथ वारंट पर राेक लगवाने के लिए मुकेश बुधवार काे ही पटियाला हाउस काेर्ट की ट्रायल काेर्ट में पहुंच गया।



उसकी अर्जी पर एडिशनल सेशन जज सतीश कुमार अराेड़ा ने राज्य सरकार अाैर पीड़िता के परिजनाें काे गुरुवार के लिए नाेटिस जारी किया है।



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