• Hindi News
  • Rajasthan
  • Jalore
  • Bhinmal News rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth

देशभर में पहचान रखने वाले भीनमाल में जूती उद्योग घटने लगा, युवा बनाने को लेकर रुचि भी नहीं ले रहे

Jalore News - पिछले कई दशकों से दूर दराज तक अपनी पहचान बनाए हुए भीनमाल का जूती उद्योग अब दम तोडऩे लगा है। क्योंकि आज के इस...

Jan 16, 2020, 07:31 AM IST
Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
पिछले कई दशकों से दूर दराज तक अपनी पहचान बनाए हुए भीनमाल का जूती उद्योग अब दम तोडऩे लगा है। क्योंकि आज के इस परिवर्तनशील युग में जूती की जगह देशी-विदेशी कंपनियों में बनने वाले फैशनेबल शूज ने ले ली है। युवा पीढ़ी भी अब इस कला को सीखना भी नहीं चाहती है। एक समय था जब भीनमाल व बडगांव की जूती पहनने के लिए दूर से लोग भीनमाल पहुंचते थे। हालांकि कई शहरों में आज भी भीनमाल व बडगांव की जूती अपनी पहचान बनाए हुए हैं जिसे विदेशी भी पसंद करते है।

4 हजार तक में बिकती है जोडी : जूती की कीमत अलग अलग डिजायन व नाप के हिसाब से तय की जाती है। शुरूआती रेंज 1 हजार से शुरू होती है। लेकिन सबसे प्रसिद्ध पंजाबी चोच है जो आज भी 4 हजार रूपए में बिकती है। वही बडगांव कट, वाज, कंसीदा मोजड़ी 2 हजार के आसपास बिकती है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित गुजरात तक जाती है भीनमाल की मोजड़ी, अब कम होने लगा काम

युवा पीढ़ी नहीं सिखना चाहती कार्य : शहर के जीनगर बाजार स्थित जूती बाजार का सर्वे किया गया तो वर्तमान में सभी दुकानों पर सिर्फ बुजुर्ग ही जूती बनाने का कार्य करते हुए नजर आए। एक भी दुकानों पर कोई युवा कार्य करता हुआ नजर नहीं आया। कारीगर रामलाल जीनगर ने बताया कि उनकी उम्र अब 70 वर्ष हो गई है। वे पिछले 50 वर्षों से जूती बनाने का कार्य कर रहे हैं। लेकिन आने वाली युवा पीढ़ी इस काम को पसंद नहीं कर रही है इस वजह से यह उद्योग आने वाले समय में दम तोड़ता दिखाई दे रहा है।

भीनमाल. दुकान में तैयार की गई जूती। फोटो| भास्कर

विदेशी भी पसंद करते है भीनमाल की जूती

करीबन दो दशको पूर्व भीनमाल व बडगांव जूती उद्योग के लिए प्रसिद्ध माने जाते थे। दूर दराज से लोग जूती लेने के लिए इन दोनों शहरों में पहुंचते थे लेकिन समय के साथ जूती का दौर कम हुआ है। मोजड़ी के नाम से प्रसिद्ध जूती की जगह अब लाईट वेट शूज ने ले ली है। हालांकि कई व्यापारी आज भी भीनमाल की जूती को बाडमेर, जोधपुर, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, डिडवाना, जयपुर एवं गुजरात के थराद, दियोदर, धानेरा, डीसा, पालनपुर, अहमदाबाद में अपना माल भेजते है। विभिन्न देशों से जब पर्यटन के लिए पहुंचने वाले विदेशी उक्त शहरों में पहुंचते हैं तो वे मोजड़ी यानी जूती को जरूर खरीदते है।

क्या है जूती बनाने का प्रोसेस

शहर के खजूरिया नाला के पास स्थित कुंड में जूती बनाने के लिए सर्वप्रथम कच्चा चमडा तैयार किया जाता है। इसके पश्चात यह चमडा जीनगर बाजार में जूती बनाने के लिए सप्लाई होता है। चमड़े को अलग अलग नापों में काटकर इस पर हाथ से कंसीदे की कारीगरी की जाती है। कंसीदे की कारीगरी ज्यादातर महिलाएं ही करती है। इसके पश्चात इसको अंतिम रूप कारीगर द्वारा दिया जाता है। वर्तमान में जीनगर बाजार में जूती की 30 से 35 दुकानें है। हालांकि कई गांवों से करीगरों के यहा बसने से उनकी संख्या जरूर बढ़ी है।

युवाओं में क्रेज कम हुआ हैं


पहले की तुलना में अब कम बिकती


Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
X
Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
Bhinmal News - rajasthan news in bhinmal which has a nationwide identity the shoe industry started to decline not even taking interest in making youth
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना