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- Sayala News Rajasthan News Seven Posts Out Of Eight Vacant Responsibility Of All Sectors Depending On One Supervisor
आठ में से सात पद रिक्त, एक पर्यवेक्षक के भरोसे सभी सेक्टरों की जिम्मेदारी
राज्य सरकार आंगनवाड़ी पाठशालाओं से छोटे बच्चों को लाभाविंत करने के लिए बहुत सी योजनाओं को चला रही है। लेकिन उनके सफल संचालन के लिए अपेक्षित स्टाफ नही हैं। जानकारी के अनुसार उपखंड मुख्यालय पर महिला एवं बाल विकास परियोजना विभाग में एक सीडीपीओ व 8 पर्यवेक्षक के पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक सीडीपीओ का पद भरा हुआ है। जिस कारण आंगनवाडी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग करने में दिक्कतें आ रही है।
ब्लॉक में कुल 285 आंगनवाड़ी केंद्र : पदों के रिक्त होने के कारण नियमित रूप से विभागीय योजनाओं के संचालन, लाभार्थियों की जांच, मिलने वाले पोषाहार उपस्थिति की जांच नहीं हो पाती है। एक कार्मिक के भरोसे 8 सेक्टरों की जिम्मेदारी के कारण एक पर्यवेक्षक सभी केंद्रों पर नियमित नहीं पहुंच पाती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, पंजीयन, पोषण देने में कठिनाई आ रही है। पर्यवेक्षक फील्ड से सम्बंधित कार्य कर सभी जानकारी व सूचना संकलित कर सीडीपीओ को देती है, जो एक ही होने के कारण सभी कार्य समय पर नही हो पाते है। साथ ही कभी सरकारी बैठकों में शामिल होने पर स्थिति खराब हो जाती है।
सभी के वेतन व सूचना का कार्य भी पर्यवेक्षक के भरोसे : सीडीपीओ कार्यालय में एक ही लिपिक कार्यरत है। जिसके द्वारा सभी कार्य पूर्ण करने में दिक्कत आती है। जिस कारण विभागीय सूचना प्रेषित करने के लिए कभी कभार पर्यवेक्षक को सहयोग करना पड़ता है। वही सभी सेक्टरों की सूचना को समय पर एकत्रित करने व बिल बनाने में भी व्यस्त रहना पड़ता है। वही प्रशिक्षण शिविर के आयोजन करने में भी काफी परेशानी होती है।
7 पद रिक्त चल रहे हैं
कार्यालय में पर्यवेक्षक के 8पद स्वीकृत हैं, उनमें से 7 रिक्त चल रहे है। फिर भी सभी कार्यों को समय पर पूर्ण करने के प्रयास किया जाता है।
- ज्योति पाटीदार, पर्यवेक्षक सायला
ज्वाइन के कुछ समय बाद छोड़ दी नौकरी
महिला एवं बाल विकास परियोजना विभाग में करीब दो वर्ष पूर्व एक पर्यवेक्षक की नियुक्ति हुई थी। जिससे कार्य मे सहुलियत की आस जगी थी, लेकिन उस पर्यवेक्षक ने कुछ महीनों बाद ही नोकरी छोड़ दी थी। जिससे स्थिति पूर्व की भांति हो गई। उसके बाद अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हो पाई हैं, जिसका खामियाजा कार्यालय को भुगतना पड़ रहा है।