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पोलजी परिवार की गेर ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान, अब 4 पीढ़िया एक साथ करती है नृत्य
मारवाड़ अपने पर्व, परंपराओं और लोक संस्कृति के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। ऐसा ही एक उदाहरण इस होली के त्याेहार पर भी रंगों के साथ देखा जाता है। मारवाड़ में हर त्याेहार का अलग ही अंदाज में लुत्फ उठाया जाता है। होली के अवसर पर होलिका दहन, धुलंडी, महिलाओं की लूर एवं चंग पर गैर नृत्य का भी आयोजन होता है। लेकिन जालोर की गैर नृत्य को राष्ट्रीय स्तर तक अलग पहचान मिलने से इसका एक अलग ही विशेष स्थान है। जालोर के गैरिए देश की आजादी से पहले ही अपने विशेष अंदाज में गैर नृत्य का अानंद ले रहे हैं। आज होली के अवसर पर आयोजित होने वाली जालोर की प्रसिद्ध गैर नृत्य का नेतृत्व कर रहे जालोर के पोलजी परिवार के माली पोलजी के पुत्र माली वरदाजी कच्छवाह हर वर्ष होली के अवसर पर इस गैर नृत्य का आयोजन करते हैं। इसमें स्वयं 80 वर्षीय वरदाराम माली अपनी चार पीढ़ियाें के साथ गैर नृत्य करते हुए जिले की गैर को एक नई पहचान दिला रहे हैं। माली वरदाराम बताते हैं कि वे अपने पिता पोलजी माली के साथ गैर नृत्य करते थे और तब से आज तक आनंद से गैर नृत्य का होली त्याेहारों पर आयोजन कर रहे हैं। साथ ही मुझे देखकर चारों पुत्र भी गैर नृत्य करते हैं और इसी तरह मेरे सभी पौत्र एवं अब तो छोटे- छोटे पड़पाैत्र भी इस नृत्य में मेरे साथ कदम से कदम मिलाते हैं।
80 साल के वरदाजी 9 पौत्र और तीन पड़पौत्र के साथ करते हैं गेर नृत्य
मारवाड़ के परंपरागत लोक गैर नृत्य का आज भी होली के अवसर सहित विभिन्न आयोजनों में माली वरदाजी पोलजी गैर नृत्य मंडली द्वारा गैर नृत्य व चंग पर फागुन के गीत गाए जाते हैं। अनोखी बात यह है कि इस दौरान पोलजी के पुत्र 80 वर्षीय वृद्ध वरदाजी माली अपनी चार पीढिय़ों के साथ गैर नृत्य की प्रस्तुति देते हैं। जिसमें पोलजी के पुत्र स्वयं वरदाजी, उनके चारों पुत्र लच्छीराम, हिमताराम, मांगीलाल व गणपत के साथ अपने 9 पौत्रों तथा अपने 3 पड़पौत्र करण, अर्जुन व मनीष के साथ एक साथ गैर नृत्य करते हैं।
जोधपुर दरबार ने उपहार में दी 200 बीघा जमीन
पोलजी के पुत्र वरदाजी माली ने बताया कि तत्कालीन जोधपुर दरबार उम्मेदसिंह जालोर आए। उस समय पोलजी माली के गीतों के बारे में जानने पर जोधपुर दरबार ने पोलजी के गीत सुनने की इच्छा प्रकट की। इस पर पोलजी को बुलाकर गीतों की प्रस्तुति दिलाई गई। उस दौरान पोलजी ने दरबार के पूर्वज राजा मानसिंह का जलंधरनाथ महाराज की कृपा से राज्य तिलक पर भूरी-भूरी जटाओं वाला जलंधरनाथ मिलिया नाथ... गीत गाकर दरबार का मन मोह लिया और दरबार ने प्रसन्न होकर उपहार स्वरूप 200 बीघा जमीन प्रदान की।
पंडित नेहरू के हाथों स्वर्ण पदक का पाया सम्मान
देश की आजादी के बाद वर्ष 1954 में दिल्ली में आयोजित देश के स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में जालोर की इसी माली पोलजी मंडली ने दिल्ली के लाल किले पर चंग गीतों व गैर नृत्य की प्रस्तुति दी थी। इसे देख देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू अभिभूत हुए अाैर स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया। पं. नेहरू के अभिभूत होने का मुख्य कारण पोलजी के द्वारा गाए गए मीठा दिलों से पोयों..., नेहरू माला फैरता..., अंग्रेज हारिया रे... आदि देशभक्ति गीतों में देश की अंग्रेजों से जंग का जीवंत वर्णन था।
इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित
प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने नेहरू पदक व स्वर्ण पदक देकर पोलजी को पुरस्कृत किया। इसके बाद वही जन राज्य दिवस वर्ष 1954 में लोक नृत्य उत्सव में भी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वहीं, 1956 लोक नृत्य उत्सव में केंद्रीय उप शिक्षा मंत्री ने पोलजी माली को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया।
जालोर. चार पीढिय़ों के साथ गैर नृत्य करते हुए।
जालोर. बीच में खड़े पोलजी, जिन्होंने स्वर्ण पदक जितने के बाद दिल्ली में फोटो खिंचवाया।