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कोलाना हवाईपट्टी के विस्तार की अड़चन दूर

कोलाना हवाईपट्टी के विस्तारीकरण की बड़ी बाधा दूर होने वाली है। इसके लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:45 AM IST
कोलाना हवाईपट्टी के विस्तारीकरण की बड़ी बाधा दूर होने वाली है। इसके लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने विस्तारीकरण पर लगाए गए आक्षेपों पर मिनिट्स टू मीटिंग जारी कर दिए हैं। यानी प्रशासन की ओर से दिए गए जवाबों से संतुष्ट होकर कहा है कि इस प्रस्ताव को इन प्रिंसिपल अप्रूवल दी जाए। यह अप्रूवल वन विभाग के रीजनल केंद्र लखनऊ से मिलेगी।

यानी दिल्ली की पहली अड़चन दूर होती ही सीएस ने भी वीसी में कलेक्टर को कोलाना हवाईपट्टी के बचे हुए अंतिम बजट 69.35 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति जारी कर दी है। अब कोलाना हवाईपट्टी के विस्तारीकरण का रास्ता काफी हद तक साफ हो चुका है। कोलाना हवाईपट्टी के विस्तार के लिए जिला प्रशासन की ओर से 169.11 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इसमें से प्रथम चरण में वर्ष 2016-17 में 39.78 बजट मिला। इसमें मुआवजा सहित अन्य कार्यों में खर्च किया गया। इसके बाद द्वितीय चरण में वर्ष 2017-18 के लिए 59.98 करोड़ रुपए का बजट प्राप्त हुआ। अब इसमें तीसरे चरण का बजट 69.35 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति मंगलवार देर शाम को सीएस की कलेक्टर के साथ वीसी में प्राप्त हुई है। दरअसल कोलाना हवाईपट्टी को 1700 मीटर से 3 हजार मीटर किया जाना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाया जाना है। इसके लिए कंसल्टेंट ने जनवरी में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। इसका नक्शा भी फाइनल हो चुका है। अब सैद्धांतिक स्वीकृति आने के बाद इसका काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। अगस्त 2018में इसका पहला चरण पूरा होना है। तीन चरणों में इसका काम पूरा होगा। पूरा काम होने के बाद इसमें बोइंग विमान और एयरबस 300 तक उतारे जा सकेंगे। इधर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी में कोलाना हवाईपट्टी के विस्तार के लिए वन भूमि के डायवर्जन के प्रस्ताव को केंद्र ने आक्षेप लगाकर लौटा दिया था। अब इसमें मिनिट्स टू मीटिंग का चुके हैं। यानी इसमें दिल्ली से क्लियर हो चुका है कि इन प्रिंसिपल अप्रूवल दी जाए। इन प्रिंसिपल अप्रूवल रीजनल केंद्र लखनऊ से मिलेगी। दरअसल कोलाना हवाईपट्टी के विस्तार में120 हैक्टेयर वन भूमि के प्रस्ताव को 20 दिसंबर को दिल्ली में हुई केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में लोटा दिया था। इसमें बताया गया था कि मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से महज 5.6 किमी दूर ही है जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के हिसाब से 10 किमी क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन माना जाता है। इसके बाद 25 जनवरी को पीडब्ल्यूडी ने इन सभी आक्षेपों के जवाब बनाकर दिल्ली में हुई बैठक में पेश किए थे। अब वहीं से इसमें पॉजिटिव रूख अपनाया गया है। इसमें प्रशासन की ओर से दिए गए प्रस्ताव को सही माना गया है। मिनिट्स टू मीटिंग जारी करने का मतलब है कि अब इस प्रोजेक्ट के लिए कोई अड़चन नहीं आएगी। इसी के बाद अब सीएस ने भी इसमें अंतिम बजट की सैद्धांतिक स्वीकृति जारी कर दी है। सबसे खास बात यह है कि इको सेंसेटिव जोन की जहां तक बात है उसमें कई गतिविधियों में छूट है और एयरस्ट्रीप के मामले में यह छूट दी जा सकती है।


झालावाड़. कोलाना हवाई पट्टी।