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जानलेवा गलतीः ब्लड बैंक ने O+ की जगह थमाया A- ब्लड, डॉक्टर और नर्सों ने बिना देखे 3 साल की मासूम को चढ़ाया यह खून, तबियत बिगड़ी और शुरू हो गई ब्लीडिंग

राजस्थान के झालावाड़ का मामला

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 01:08 PM IST
Negligence of health department in Jhalawar

झालावाड़ (राजस्थान). जिला जनाना अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग की पीआईसीयू में भर्ती 3 साल की मासूम बच्ची को दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया। ब्लड के रिएक्शन से बच्ची की तबीयत बिगड़ गई और ब्लीडिंग शुरू हो गई। गंभीर हालत में बच्ची को आईसीयू में लेकर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। समय रहते इलाज मिलने पर बच्ची की जान बच गई। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई, किसकी गलती से बच्ची को गलत ब्लड चढ़ाया गया, इसको लेकर शिशु विभाग व ब्लड बैंक प्रशासन एक-दूसरे की गलती बताते रहे।

गलत ब्लड चढ़ाते ही बिगड़ने लगी मासूम की हालत...

- झालावाड़ निवासी मोहनलाल टेलर की बेटी के शरीर में ब्लड नहीं बनता है। इससे उसके शरीर में खून की कमी हो रही है। बच्ची का हीमोग्लोबिन करीब 5 ग्राम ही रह गया था।

- ऐसे में बच्ची को ब्लड चढ़ाने के लिए परिजनों ने जिला जनाना अस्पताल में भर्ती कराया था। शिशु विभाग में बच्ची को ब्लड चढ़ाने के लिए सैंपल लिया।

- सैंपल ब्लड बैंक में क्रॉस मैच करने के बाद ब्लड इश्यू किया गया। ब्लड आने पर उसे बच्ची को चढ़ा दिया गया। ब्लड चढ़ने के कुछ ही देर बाद ब्लड का रिएक्शन शुरू हो गया।

- बच्ची ठंड से जूझने लगी, उल्टी हुई, इसके बाद बच्ची की ब्लीडिंग शुरू हो गई। ब्लीडिंग इतनी ज्यादा हुई कि बच्ची का हीमोग्लोबिन 3.5 ग्राम ही रह गया। मौके पर मौजूद डॉक्टर ने तुरंत बच्ची को संभाला। हालत गंभीर होता देख उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। बाद में उसे फ्रेश ब्लड चढ़ाया गया। तब जाकर बच्ची की जान बच सकी।

- बच्ची का ब्लड ग्रुप 'ओ' पॉजिटव था, उसे 'ए' पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया। इससे बच्ची गंभीर हो गई।

गलती...जान लेने वाली- दूसरी बार ब्लड आया तब मालूम पड़ा गलत चढ़ाया था ब्लड


बच्ची को 'ओ' पॉजिटिव की जगह 'ए' पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया जा रहा था। आधा ब्लड चढ़ने पर बच्ची को रिएक्शन होना शुरू हो गया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जबकि रिएक्शन होने पर ब्लड चढ़ाना रोक दिया जाता है और ब्लड बैंक से संपर्क किया जाता है। बच्ची को पूरा ब्लड चढ़ा दिया गया, इससे बच्ची गंभीर हो गई। रिएक्शन से ब्लीडिंग होने से चढ़ाया गया खून पूरा निकल गया। जब बाद में दूसरी बार ब्लड आया तो वह बच्ची के ग्रुप के अनुसार 'ओ' पॉजिटिव था। तब मालूम पड़ा कि बच्ची को पहले गलत ब्लड चढ़ा दिया गया था।

नर्सिंगकर्मियों ने खून चढ़ाते वक्त भी नहीं देखी ब्लड बैंक की पर्ची
जिला ब्लड बैंक से जब ब्लड इश्यू किया जाता है, तब ब्लड के पैकेट के साथ एक पर्ची भी दी जाती है, जिस पर ब्लड की मात्रा-ग्रुप आदि की जानकारी लिखी होती है। बच्ची को ब्लड चढ़ाने के लिए जब ब्लड को वार्ड में लाया गया, उस समय भी नर्सिंग स्टाफ ने ग्रुप को चेक नहीं किया और ब्लड आते ही उसे बच्ची को चढ़ाने के लिए लगा दिया। अगर स्टाफ ने एक बार ब्लड के साथ वाली पर्ची देख ली होती तो शायद बच्ची को दूसरे ग्रुप का ब्लड नहीं चढ़ता और न ही उसकी तबीयत बिगड़ती।

भास्कर नॉलेज : ब्लड बैंक में होता है सैंपल का क्रॉस मैच
संबंधित विभाग से डॉक्टर मरीज का सैंपल लेकर एक फार्म भरता है। इसमें मरीज का नाम पता, हीमोग्लोबिन, ब्लड, प्लेटलेट्स आदि की जानकारी होती है। सैंपल के साथ यह ब्लड बैंक आता है। ब्लड बैंक में सैंपल को क्रॉस मैच किया जाता है। सैंपल में जिस ग्रुप का ब्लड निकला है, वही ब्लड बैंक से इश्यू किया जाता है। ब्लड के साथ एक पर्ची दी जाती है। इसमें ब्लड ग्रुप, ब्लड कितना पुराना है, कब तक उपयोग किया जा सकता है आदि लिखा होता है।

दूसरा ग्रुप चढ़ने से ये होते हैं रिएक्शन
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राम पाटीदार के अनुसार मरीज ओ पॉजिटिव हो, उसे ए पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया है तो रिएक्शन होगा ही। दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ने से ब्लड सेल्स टूट जाते हैं। इससे वह ब्लड शरीर में नहीं टिकता है। ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। हालांकि कई बार सही ग्रुप का ब्लड चढ़ने पर भी रिएक्शन होता है और ब्लीडिंग हो सकती है। अलग-अलग ब्लड ग्रुप के अलग-अलग रिएक्शन होते हैं। फिजिशियन डॉ. केके सोनी के अनुसार दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ने से रिएक्शन हो सकता है, लेकिन मरीज की जान नहीं जाती है।

शिशु विभाग की सफाई- ब्लड बैंक में ही क्रॉस मैच में गलती हुई

बच्ची को दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ने का मामला संज्ञान में आया है। शिशु विभाग की तरफ से कोई गलती नहीं हुई है। ब्लड बैंक में ही क्रॉस मैच में गलती हुई है। इस बारे में हम अस्पताल प्रशासन को लिख रहे हैं।

- डॉ. कपूर मीणा, एचओडी, शिशु विभाग

ब्लड बैंक की सफाई- हमारे पास ए पॉजिटिव का ही सैंपल आया था
शिशु वार्ड से हमारे पास सैंपल आया था, वह ए पॉजिटिव का ही था और हमने ए पॉजिटिव ही ब्लड इश्यू किया है। क्रॉस मैच में कहीं गलती नहीं हुई है। बाद में बच्ची को ओ पॉजिटिव ब्लड जारी किया गया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है, मेरी ड्यूटी खत्म हो गई थी।

- डॉ. नीलम, ड्यूटी डॉक्टर, जिला ब्लड बैंक

हमने सही ब्लड दिया, जांच कर लें
वंशिका के नाम से सैंपल आया था, उसमें ब्लड बैंक की तरफ से कोई गलती नहीं हुई है। पहले हमारे पास सैंपल आया था, तब ए पॉजिटिव आया था और वही ब्लड इश्यू किया। बाद में सैंपल आया वह ओ पॉजिटिव का था, हमने ओ पॉजिटिव दिया। हम सैंपल को सात दिन तक संभाल कर रखते हैं। दोनों सैंपलों की पुन: जांच की जा सकती है।

- डॉ. सुमित राठौर, प्रभारी, जिला ब्लड बैंक

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