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तलाशी में ईओ के घर से मिले 1 लाख रुपए, सहायक के साथ जेल भेजा
एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) द्वारा शुक्रवार को रसद विभाग के ईओ प्रशांत यादव अाैर सूचना सहायक रविंद्र बैरवा को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
इसके बाद देररात को एसीबी टीम द्वारा गोदाम की तलाई स्थित ईओ के किराए के मकान में तलाशी चलती रही, जहां एक पुराने बैग में 1 लाख 8 हजार रुपए बरामद हुए। बैग में नोट ठूंस-ठूंसकर रखे थे, इससे लगता है कि ईओ इतनी रिश्वत ले रहा था कि उसे नोट की गड्डियां बनाने अथवा उन्हें व्यवस्थित रखने की फुर्सत नहीं थी। बैग में 2000 व 500 नोट के नोट मिले, जिन्हें एसीबी ने जब्त किया। सूचना सहायक के मकान में कुछ नहीं मिला। सर्च की कार्रवाई के बाद मकान को सील कर दिया। एसीबी के एएसपी भवानीशंकर मीणा ने बताया कि शुक्रवार काे कार्रवाई के दौरान परिवादी राशन डीलर राजाराम माली की फाइल डीएसओ की टेबल पर पड़ी हुई थी। जांच की तो सामने आया कि ईओ ने रिश्वत मिलने के बाद उसके नोटिस के जबाव को एक दिन पुरानी तारीख में फाइल कर उसे बहाल कर दिया। इससे पहले राशन डीलर नोटिस के जवाब को फाइल करने के लिए विभाग के 25 चक्कर लगा चुका था। यह भी सामने आया कि नियमानुसार तीन महीने के अंदर राशन डीलर के लाइसेंस को निरस्त करना होता है या बहाल करना होता है, लेकिन ईओ ने रिश्वत के कारण चार महीने तक उसकी फाइल को अटकाए रखी। इसमें डीएसओ की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई है।दोनों की गिरफ्तारी के बाद शनिवार को उन्हें कोटा एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
डीएसओ के खिलाफ भी हो सकती है तफ्तीश
राशन डीलर से रिश्वत मांगने में ईओ प्रशांत यादव व सूचना सहायक रविंद्र बैरवा के साथ डीएसओ आलोक झारवाल को भी एसीबी ने संदिग्ध माना है। एएसपी मीणा ने बताया कि कार्रवाई के दौरान परिवादी की फाइल डीएसओ की टेबल पर मिली, जाे मौका देखकर वहां से चुपचाप निकल गया। एसीबी ने डीएसओ को फोन भी लगाया, लेकिन उन्होंने फोन बंद कर लिया। इसके अलावा डीएसओ ने ही रिश्वत मिलने के बाद राशन डीलर की फाइल को मार्क कर उसके जवाब को फाइल किया। जानकारों का यह भी कहना कि कॉल रिकार्डिंग में डीएसओ की आवाज भी शामिल है। इस पर एसीबी ने डीएसओ आलोक झारवाल के खिलाफ एफआईआर तैयार कर मुख्यालय भेजी है। सोमवार तक मालूम पड़ेगा कि एफआईआर दर्ज होती है या जांच होगी।
भास्कर पड़ताल-मैपिंग के नाम पर सूचना सहायक लेता था राशन डीलरों से रिश्वत
रसद विभाग में सूचना सहायक रविंद्र बैरवा राशन डीलरों से 2-2 हजार रुपए तक रिश्वत लेकर राशनकार्डों की मैपिंग करते थे। राशन डीलर अपने वार्ड में राशनकार्डों की संख्या बढ़वाते थे, इससे उनको राशन सामग्री भी अधिक मिलती थी। ताकि उनको कमीशन भी अधिक मिले और कोई उपभोक्ता राशन लेने नहीं आए तो डीलर उसका राशन निकालकर गेहूं को अधिक दाम में ब्लेक कर दे। सूचना सहायक राशन डीलरों से लिए 2-2 हजार रुपए की रिश्वत को ईओ व डीएसओ तक पहुंचाते था। यानी ईओ के एजेंट के रूप में सूचना सहायक उसका काम करता था। इसी का नतीजा है कि आज तक समानी करण नहीं हो पाया। इससे कुछ डीलर तो रिश्वत देकर अच्छी आय प्राप्त कर रहे है और कुछ डीलरों के राशन कार्ड कम होने पर घर का खर्चा भी नहीं चल रहा है।
क्या है समानीकरण: सरकार दो साल पहले राशन डीलरों को समानीकरण करना चाहती थी, लेकिन ईओ व अन्य इंस्पेक्टरों के कारण समानीकरण आज तक सफल नहीं हो पाया। विभाग द्वारा राशनकार्डों की मैपिंग की ठीक से नहीं की गई। समानीकरण में प्रत्येक राशन डीलर को एक समान राशनकार्डों के अनुसार राशन सामग्री वितरण के लिए दी जानी थी, ताकि सभी की समान आय हो, लेकिन अधिकारियों ने अपने चहेते डीलरों को फायदा पहुंचाने के लिए उनके वार्ड में राशनकार्डों की मैपिंग ज्यादा कर दी।
जिलेभर की व्यवस्था
{कुल राशन डीलर-628
{हर माह का गेहूं- 57 हजार क्विंटल
{खाद्य सुरक्षा योजना में परिवार-2 लाख 91 हजार
(नाेट-ईओ प्रशांत यादव के पास खानपुर व झालरापाटन का प्रभार था। उनके अधिकार में खानपुर के 72 व झालरापाटन के 58 राशन डीलर अाते थे)।
लाल घेरे में रिश्वत के दोनों आरोपी।
झालावाड़. शहर में गोदाम की तलाई स्थित यह मकान, जिसमेंं ईअो किराए से रहता था।