- Hindi News
- National
- Ratlai News Rajasthan News Commodities Are Not Auctioned In Secondary Market Yet Traders Have To Pay Tax
गौण मंडी में नहीं हाेती जिंसों की नीलामी, फिर भी देना पड़ रहा व्यापारियों को टैक्स
किसानों को कृषि उपज के वाजिब दाम दिलवाने के उद्देश्य से सालों पूर्व 90 के दशक में यहां गौण कृषि उपज मंडी खोली गई थी, लेकिन मंडी में जिंसों की नीलामी नहीं हाेने से किसानों को कृषि की उपज खुले बाजारों में व्यापारियों के यहां जाकर बेचनी पड़ती है। या फिर किसान किराया भाड़ा भुगत कर झालरापाटन, रामगंजमंडी और कोटा की मंडियों तक का सफर करना पड़ रहा है। यहां सालों से मंडी केवल कागजों में चल रही है।
जिंसों की नीलामी नहीं होती, फिर भी मंडी प्रशासन द्वारा व्यापारियों से किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाने के बावजूद उनके द्वारा खरीदी गई कृषि उपज पर टैक्स लिया जाता है जो साल भर का लाखों में होता है। ज्ञातव्य है कि यहां रीझोन रोड पर गौण कृषि उपज मंडी के लिए जमीन आवंटित की गई है। जहां मंडी यार्ड बनाए जाना प्रस्तावित है। और इसके लिए कुछ काम हुआ भी था। लेकिन इसका मामला कोर्ट में चलने के कारण जहां मंडी यार्ड बनने की प्रक्रिया खटाई में पड़ गई है। ऐसे में किसानों को कृषि उपज के वाजिब दाम तक नहीं मिल पाते है।
विधायक से लेकर मुख्यमंत्री से लगा चुके गुहार
क्षेत्र के लोग व जनप्रतिनिधियों ने रटलाई गौण मंडी चालू करवाने के लिए बीते 10 सालों में विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र व ज्ञापन देकर गुहार कर चुके हैं । लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं निकल सका।क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गत कांग्रेस व भाजपा के शासन काल में कई बार सरकार को पत्र भेजकर मंडी में नीलामी प्रक्रिया व यार्ड बनाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिए जाने से मंडी शुरू नहीं हो सकी, और आज धीरे-धीरे रटलाई का विकास रुकता जा रहा है। क्योंकि मंडी चालू होने पर किसान, व्यापारी, मजदूर, हम्माल, दुकानदार सभी को रोजगार मिलने से क्षेत्र का विकास आगे बढ़ेगा।
मंडी नहीं लगने से रूक गया कस्बे का विकास: यह क्षेत्र कृषि पर अाधारित है। जहां आसपास के गांवों के अलावा मध्यप्रदेश सीमा से जुड़े गांवों के किसान भी अपनी उपज बेचने आते हैं। जो कृषि उपज बेचने के बाद यहां के दुकानदारों से कई प्रकार की खरीददारी करते थे। जिससे कई प्रकार के व्यवसायियों को इसका लाभ होता था। लेकिन करीब 10-12 सालों से यहां मंडी में नीलामी नहीं होने से यहां कृषि उपज बेचने वाले किसानों की संख्या सालाना घटती गई,और अब नगण्य रह गई है । साथ ही यहां से कई व्यापारियों ने भी पलायन कर अपने प्रतिष्ठान अन्यत्र स्थापित कर लिए हैं। जिससे कस्बे के विकास पर लगाम लग गई है। क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है कि गौण मंडी यार्ड निर्माण का मसला कोर्ट से समाधान होकर निकले और मंडी में नीलामी प्रक्रिया फिर से शुरू हो।
{रटलाई गौण मंडी चालू होने पर किसानों को दूर मंडियों में ले जाकर जींस बेचने जाने का किराया-भाड़ा बचेगा । साथ ही बाजारों की अपेक्षा भाव भी अच्छे मिलेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। इसलिए सरकार और प्रशासन को मंडी में नीलामी शुरू करवाने के प्रयास करने चाहिए।
बालकिशन शर्मा, रीझोन
{कागजों में चल रही गौण कृषि उपज मंडी में जिंसों की नीलामी नहीं होने से कस्बे का विकास रुक गया है। मंडी चालू हो तो क्षेत्र के लोगों के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, और किसानों को कृषि उपज के वाजिब दाम मिल सकेंगे । साथ ही व्यापारियों की सुविधाएं भी बढ़ेगी।
अशोक गुप्ता, गल्ला व्यापारी रटलाई
जमीन का मसला कोर्ट में लंबित: कस्बे में मंडी यार्ड बनाने के लिए प्रस्तावित जमीन संबंधी मामला करीब 8-10 सालों से कोर्ट में लंबित है। इस कारण यहां गौण मंडी यार्ड के लिए करवाए जा रहे निर्माण कार्य भी अधूरे पड़े हैं। वहीं इस मामले को लेकर प्रशासन और मंडी विभाग भी रुचि नहीं लेने के कारण किसानाें को नुकसान उठाना पड़ रहा है । ज्ञातव्य है कि रटलाई कस्बे से करीब 65 गांव जुड़े हैं, जहां के किसान अपनी कृषि उपज बेचने यहां आते हैं। लेकिन मंडी में नीलामी नहीं होने के कारण उन्हें अपनी उपज व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर ले जाकर बेचने पड़ती है।
रटलाई. गौण मंडी यार्ड जिसका काम अधूरा, परिसर में उगी झाड़ियां।