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सरकारी स्कीमों में फंसा पीने का पानी...चछलाव, झालावाड़ में तय समय निकला, रायपुर में आठ करोड़ से काम हुआ, लेकिन आधी आबादी प्यासी

Jhalawar News - जिले के लोगों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई पेयजल स्कीमों को हरी झंडी मिली। इनमें से चछलाव और...

Nov 22, 2019, 08:52 AM IST
Jhalawar News - rajasthan news drinking water stuck in government schemes chachalav fixed time in jhalawar work in raipur with eight crores but half the population thirsty
जिले के लोगों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई पेयजल स्कीमों को हरी झंडी मिली। इनमें से चछलाव और झालावाड़ की स्कीमें तय समय निकल जाने के बाद भी अधूरी हैं। रायपुर और सारोला दोनों कस्बों में करीब 8 करोड़ रुपए से काम पूरे हो चुके हैं, फिर भी इन कस्बाें की अाधी अाबादी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

सारोला में तो पीएचईडी के अधिकारियों ने जिन निजी कॉलोनियों में एक मकान तक नहीं बना है, वहां पर पाइप लाइन बिछा दी है, जबकि आबादी क्षेत्र के कई हिस्से छोड़ दिए हैं। इसके चलते लोगों को वर्तमान में भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर की ओर से इसमें पड़ताल की गई कि आखिर क्यों यह स्कीमें धरातल पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इन स्कीमों को पिछली गर्मियों से पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक इन स्कीमों का काम अधूरा ही है। ऐसे में परेशानी सिर्फ लोगों को उठानी पड़ रही है।


भास्कर पड़ताल... जानिए, करोड़ों रुपए की पेयजल स्कीमों की हकीकत को

सारोलाकलां. एक निजी कॉलोनी में पेयजल लाइन बिछा दी गई।

अमृत योजना : 75 करोड़ से शुरू, दो बार अवधि बढ़ाई, अब भी पूरी नहीं हो पाई: शहर को 100 लाख लीटर पानी अतिरिक्त देने वाली सबसे बड़ी पेयजल परियोजना अमृत के हाल खराब हैं। अमृत योजना का काम 75 करोड़ रुपए से शुरू हुआ। अप्रैल 2019 से पहले ही इसके काम को पूरा किया जाना था, लेकिन इसके विपरीत हालात यह हैं कि काम अब तक अधूरा है। शहर में 13 हजार पेयजल कनेक्शन होने हैं, लेकिन 10 फीसदी कनेक्शन भी नहीं हो पाए। टंकियां बन चुकी हैं, लेकिन छापी पर पंप हाउस का निर्माण अधूरा होने से छापी का पानी शहर में नहीं आ पा रहा है। इसका काम 60 फीसदी भी नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में आने वाली गर्मियों में भी पानी मिलने की उम्मीद लोगों को दिखाई नहीं दे रही है। यहां मंगलपुरा पुराना पोस्ट ऑफिस क्षेत्र, कालीदास कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का कुछ हिस्सा, वंदावन गांव, अशोक विहार कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनियों में सालभर ही पेयजल संकट रहता है।

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रायपुर. कस्बे में 50 साल पुरानी पेयजल टंकी से की जा रही सप्लाई।

चछलाव गांव : 166 लाख से डेढ़ साल पहले शुरू हुआ था काम, अब तक अधूरा: पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने जब चछलाव गांव को गोद लिया तो यहां की सबसे बड़ी प्रॉब्लम पेयजल संकट को दूर करने के लिए 166 लाख रुपए की स्वीकृति दी। डेढ़ साल पहले अधिकारियों ने इसका काम भी शुरू कर दिया। 6 माह में काम पूरा कर लोगों को गर्मियों में इस परियोजना से राहत दी जानी थी, लेकिन इसके उलट अभी तक काम पूरा नहीं किया गया। यहां पूरे कस्बे में पेयजल लाइन से पानी की सप्लाई की जानी है। इसके लिए टंकियों का निर्माण तो हो चुका है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों का काम अब तक अधूरा है।

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झालावाड़. छापी बांध पर अधूरा पड़ा फिल्टर प्लांट।

रायपुर में भी वहीं हालात : 3 किमी का आबादी क्षेत्र रह गया लाइन डलने से वंचित

रायपुर में 498.50 लाख रुपए की लागत से पुनर्गठित पेयजल योजना का काम पूरा हो चुका है, लेकिन यहां अब तक 3 किमी के आबादी क्षेत्र में लोगों को पेयजल संकट से गुजरना पड़ रहा है। यहां आबादी क्षेत्र मुख्य बाजार, सेंट्रल बैंक के पीछे, सुनेल रोड सहित अन्य क्षेत्रों में नई पेयजल लाइन नहीं डल पाई। इससे इन क्षेत्रों में लोग पीने के पानी के लिए भी भटक रहे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। कस्बे के कुछ एरिया को पुरानी लाइन से ही जोड़ दिया गया है, जो गलत है।

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सारोलाकलां : निजी कॉलोनियों में बिछा दी पेयजल लाइन

सारोलाकलां में तो लापरवाही की इंतहा ही हो गई....। यहां एक निजी कॉलोनी में पेयजल की लाइनें बिछा दी गईं, जो जरूरत ही नहीं थी। दूसरी तरफ, कई बस्तियों में पेयजल की लाइनें डाली ही नहीं, जहां सबसे ज्यादा जरूरत थी। यहां पुरानी पुलिया से मुख्य रोड सहित अन्य आबादी की कॉलोनियां पेयजल लाइन से वंचित रह गईं। अब भी यहां कई क्षेत्रों में पुरानी पाइप लाइन से ही पानी दिया जा रहा है, जबकि नई पाइप लाइन से इसको जोड़ा जाना था। ऐसे में 4 करोड़ रुपए से काम होने के बाद भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। अब पीएचईडी ने फिर से 20 लाख रुपए की नई स्वीकृति मंगवाई है, जिसका काम दो माह पहले शुरू किया गया है। इसमें करीब 600 मीटर पेयजल लाइन और बिछाई जाएगी। वार्ड संख्या 3 के शंकरलाल माली का कहना है कि नई लाइनें निजी कॉलोनियों तक बिछा दी गईं, जबकि बस्ती के कुछ क्षेत्र छोड़ दिए गए। बिना कन्वर्जन की कॉलोनियों तक पेयजल लाइनें बिछा दी गई, जो गलत है। लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

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