हर साल एक हजार पशुओं की बलि चढ़ती थी, जागरुकता फैलाई, आज प्रथा बंद हो गई

Jhalawar News - अगर इरादे पक्के हों तो पुरानी से पुरानी कुरीतियों को बदला जा सकता है। ऐसा ही कुछ पिड़ावा तहसील में पहाड़ी पर स्थित...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:16 AM IST
Bhawani mandi News - rajasthan news every year one thousand animals were sacrificed awareness spread today the practice ceased
अगर इरादे पक्के हों तो पुरानी से पुरानी कुरीतियों को बदला जा सकता है। ऐसा ही कुछ पिड़ावा तहसील में पहाड़ी पर स्थित पंच-पंछावा माताजी के यहां हुआ था। मान्यता के चलते वहां पर हर साल करीब एक हजार पशुओं की बलि चढ़ा दी जाती थी। यह बात अहिंसा के क्षेत्र में कार्य करने वाले बनी निवासी पूर्व जिला परिषद सदस्य नैनसिंह सदेश्वर को हमेशा खटकती थी।

उन्होंने आस्था के नाम पर पशुओं की बलि को रोकने के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाने की ठानी। अपने साथ अपने जैसे ही विचारों वाले लोगों का एक समूह बनाया। मंदिर पर विशेष आयोजन केे समय यह समूह वहां पहंुच जाता और लोगों को बलि नहीं करने के लिए समझाता। इस तरह उनकी विचारधारा से सहमत होने वाले लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती गई। वह दिन भी आया, जब बहुत से ग्रामीण बलि नहीं करने के लिए सहमत हो गए। फिर आसपास के ग्रामीणों को बुलाकर एक कार्यक्रम किया गया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने शपथ ली कि अब वहां पर कोई बलि नहीं की जाएगी। इस शपथ को लिए हुए आज करीब 15 साल हो चुके है। तब से वहां पर मुख्य रूप से मंदिर परिसर में कोई बलि नहीं हुई है। इस बात को याद कर नैनसिंह का दिल आज भी खुशी से भर उठता है कि उनके जरा से प्रयास ने किस तरह हजारों पशुओं की जान बचा ली थी। उन्होंने अहिंसा दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार शाम भास्कर से बात करते हुए कहा कि इसके बाद मंदिर परिसर में कोई बलि नहीं दी गई।

भवानीमंडी में भी बनाया गया था अहिंसा पार्क

भगवान महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण दिवस पर 1970 के दशक में रामनगर में नाव आकार का एक अहिंसा पार्क बनाया गया था। इसमें भगवान महावीर के नमोकार संदेश का एक शिलापट्ट लगाया गया था। अब इस पार्क में महाराणा प्रताप की मूर्ति भी लगा दी गई। इससे यह पार्क अहिंसा के साथ शौर्य का भी प्रतीक बन गया है।

नैनसिंह सद्देश्वर।

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