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अब मोबाइल विंडो बनाकर करेंगे मरीज का ज्वाइंट रिप्लेसमेंट

एक वर्ष पहले
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झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग में अब मोबाइल विंडो बनाकर (छोटा चीरा लगाकर) मरीज का ज्वाइंट रिप्लेसमेंट किया जा रहा है। इस तकनीक से ऑपरेशन में इतना कम समय लगा कि एक ही दिन में चार मरीजों का कूल्हे का ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कर दिया गया। यानी मरीजों के इंवेजिव सर्जरी तकनीक से ऑपरेशन किए गए।

इससे पहले जो ऑपरेशन होते थे, उनमें मसल्स को काफी अधिक काटा जाता है और हड्डियों को बाहर निकालकर फिर इंप्लांट डाला जाता था, इससे मरीज को ठीक होने में समय भी ज्यादा लगता था और बड़ा चीरा लगने से खून भी अधिक बहता था, लेकिन नई तकनीक से मरीजों को इन परेशानियों से खासी राहत मिलेगी। ऑपरेशन के दूसरे दिन ही मरीजों को खड़ा कर दिया गया।

आर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पी झंवर ने बताया कि झालरापाटन निवासी अखिलेश, कोटा के आबिद व देविंदर और बारां के शंकर के कूल्हे के जोड़ खराब हो चुके थे। उनको झालावाड़ में ऑपरेशन की सलाह दी गई। बारां के शंकर हार्ट का मरीज होने से जान का खतरा अधिक था। आबिद का पुन: प्रत्यारोपण करना था अाैर देविंद के दूसरे कूल्हे का पूर्व में ऑपरेशन किया जा चुका था, इससे इनके संक्रमण का खतरा अधिक था। आर्थोपेडिक के विशेषज्ञों ने इसे चैलेंज के रूप में लिया। एक ही दिन में चारों का नई तकनीक मिनिमम इंवेजिव सर्जरी की गई। यह पहला मामला जब कि किसी बाहरी विशेषज्ञ डॉक्टर के बिना एक ही दिन में चार ऑपरेशन किए गए। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में मरीज का निशुल्क ऑपरेशन हुआ। टीम में प्रोफेसर डॉ. अरविंद बोहरा, डॉ. अनीस, डॉ. सक्षम, डॉ. राकेश, डॉ. विनोद, डॉ. विमल व डॉ. राहुल शामिल थे।

क्या है नई तकनीक: जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ सीनियर प्रोफेसर डॉ. शिव भगवान ने बताया कि मरीजों का मिनिमम इंवेजिव सर्जरी की गई। इस तकनीक में छोटे चीरे से मोबाइल विंडो बनाई गई। इस छोटे से चीरे से ही दूरबीन के जरिए आधुनिक इंप्लांट को अंदर डाला गया। इससे मरीज का खून कम बहा। साथ ही मरीज की रिकवरी जल्दी होगी।

एनेस्थीसिया देना भी था चैलेंजिग

एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. एसपी चित्तौड़ा ने बताया कि एनेस्थीसिया देना भी चैलेंजिंग होता है। ऐसे ऑपरेशन उम्रदराज लोगों के होते है, जिनको ब्लड प्रेशर, शुगर सहित कई बीमारियां होती है। ऐसे में एपीडयूरल हाइपोटेंसिव तकनीक से एनेस्थीसिया दिया गया।

झालावाड़. जिला एसआरजी अस्पताल में मरीज का किया गया जोड़ प्रत्यार्पण।
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