मेरे सिंदूर लगाने और वंदे मातरम् बोलने से सिर्फ 10% लोग परेशान

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:00 AM IST
Dag News - rajasthan news only 10 of people worry about applying my vermilion and speaking vande mataram

-मैं ये सब नहीं सोचती हूं। निगेटिव तो बिल्कुल नहीं सोचती। इस तरह की निगेटिव सोच वाले 10% लोग ही होंगे। 90% अवाम मेरे समर्थन में खड़ी है, अच्छी बातें कर रही है।


-लोग धर्म मानते हैं, अंदर से मजबूती पाने के लिए। इसीलिए धर्म पर पूरा भराेसा किया जाता है। धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग हैं। इनको एक साथ नहीं रखना चाहिए।


-धर्म विश्वास है। जो दिल से आता है, वो धर्म है। और जो दिमाग से आता है, वो धर्म नहीं है।


- इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन मैं राजनीति में दूर होने के लिए नहीं आई हूं। मैं शूटिंग, घर परिवार, सब छोड़कर आई हूं, अपने लोगाें के लिए। ताकि समाज की भलाई के लिए कुछ करूं। मेरे तो वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता है।


-मैं यहां सिखाने नहीं खुद सीखने आई हंू। मैं तो यहां पर अभी नई हूं।


-नहीं, मैं हर साल रथ खींचती थी। तब खबर बनती थी कि मैंने धर्म परिवर्तन कर लिया। अब पति के साथ मंगल आरती करती हूं तो कहते हैं कि हिन्दू से शादी की है। मैं इस ओर ध्यान नहीं देती हूं।


-कुछ भी असंभव नहीं है। राजनीति मेरी जिम्मेदारी है। इसे हर हाल में पूरा करना होगा, फिल्में मेरा जुनून हैं। वो अपने लिए करती हूं। अपना घर हर इंसान को संभालना पड़ता है, यह दायित्व होता है।जिस चीज की ज्यादा जरूरत होगी, उसे अधिक समय दिया जाएगा। मैं शादी के लिए इस्तांबुल गई थी। मुझे पश्चिम बंगाल में मेरे संसदीय क्षेत्र बसीरहाट की हिंसा की जानकारी मिली तो मैंने विधायकों से फोन पर बात की।


-बंगाल में लोग जाति-धर्म से ऊपर की सोच रखते हैं। दुर्गा पूजा और ईद साथ मनाते हैं। जिस दिन रामनवमी यात्रा निकलती है, उसी दिन मोहर्रम की ताजिया निकलती हैं।

सवाल- चुनाव के समय दीदी ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को गुंडा तक कहा? क्या यह ठीक था या राजनीति में चलता है?

-बड़े लोग एक दूसरे को कोसते हैं, इस पर मैं ध्यान नहीं देती हूं। मैंने अभी तक इस तरह के आरोप प्रत्यारोप नहीं लगाए हैं। ऐसा आगे भी नहीं करूंगी।

शेष | पेज 9 पर


- मैंने कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। वे लोकतांत्रिक देश के मुखिया हैं। इसलिए सभी धर्म को बराबर अहमियत देना चाहिए। उन्होंने कहा भी है कि सभी को साथ लेकर चलेंगे। हां, मौजूदा समय में अल्पसंख्यकों पर मॉब लिंचिंग हो रही है, उससे भरोसा डगमगाता है।


- मेरे खिलााफ कोई फतवा जारी नहीं हुआ। वे सोच रहे थे कि जारी करेंगे लेकिन शायद उनकी सोच बदल गई। रही बात ताकत की तो खुद की लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है। मेरे नाम का मतलब है फतह, और फतह करने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। मेरा धर्म कोई मुझसे छीन नहीं सकता है। मैं मुस्लिम हूं और अंत तक मुस्लिम ही रहूंगी। अगर मैंने हिन्दू से शादी की है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। मैं हिन्दू समेत सभी धर्मों का सम्मान करती हूं।





तृणमूल सांसद और बांग्ला अभिनेत्री नुसरत जहां जैन कहती हैं कि मैं निगेटिव नहीं हूं। ससुराल, मायके, राजनीति और अभिनय की दुनिया में संतुलन बना रही नुसरत से भास्कर के शरद पाण्डेय और पवन कुमार ने बातचीत की-

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