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शहर में आवारा सांडों का आतंक, रोजाना बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं हो रहे शिकार

एक वर्ष पहले
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शहर में आवारा सांड लगातार लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। सब्जीमंडी हो या बस स्टैंड अथवा शहर की अन्य कोई जगह आवारा सांडों के आतंक से शहर का कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है। वहीं, शुक्रवार को सुबह 10 बजे हरिश्चंद्र कॉलोनी में दो सांड आपस में भीड़ गए। जिससे कॉलोनी में काफी भीड़ जमा हो गई।

इस दौरान लोगों ने उन्हें खूब छुड़ाने का प्रयास किया। जिसमें वाहनों काे खराेच आने से क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, एक महिला इनकी चपेट में आते-आते बाल-बाल बची। शहर में इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन नगरपालिका प्रशासन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे आवारा सांडों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।

शहरवासियों ने बताया कि दिनभर आवारा सांड यहां-वहां घूमते रहते है। जिससे शहर का आवागमन भी पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों को सांड मारने दौड़ते है। अब तक कई लोग अब तक इनकी चपेट में आ चुके हैं। कई बार लोगों ने इन्हें शहर से बाहर करने की मांग की गई। परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हमेशा खतरे में रह रहे लोगों की पीड़ा

{सांड आए दिन जटा शंकर की गली व मोहल्लों में लड़ते रहते हैं। जिससे लोगों का बाहर बैठना भी मुश्किल हो गया है। कई बार कॉलोनी के बच्चें सांडों की धमक से बच्चे चोटिल हो चुके हैं। प्रशासन से शिकायत करने पर भी विभाग समाधान नहीं निकल पा रहा है।

-ओमप्रकाश यादव, शहरवासी

{शहर में महिला, स्कूली बच्चों, दर्शनार्थी एवं वृद्धों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। आवारा जानवर शहर में गंदगी फैलाते हैं। रोजाना इनकी चपेट में आने से कोई ना कोई घायल हो रहा है।

-राधेश्याम वर्मा, निवासी हरिश्चंद्र कॉलोनी

{खासकर सांड बुजुर्गों के लिए घातक बने हुए हैं। इन्हें बाहर छुड़वाने की कई बार प्रशासन से गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन इन्हें तो सिर्फ़ वोट से मतलब है।

-कैलाशचंद यादव

{आए दिन अखबारों में खबरें आती रहती है, प्रशासन को इस पर कार्यवाही कर समाधान निकालना चाहिए। होता कुछ नहीं।

-सरोज रावल, अध्यापिका

केस 2

महात्मा गांधी कॉलोनी निवासी देवराज यादव कुछ समय पहले स्कूल पढ़ाने जा रहे थे, अचानक सांडों का हमला होने के कारण मौके पर ही कमर की रीढ़ की हड्डी टूट गई वह घायल हो गए। जिसकी इंदौर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

केस 1

17 जून को मुकेरी मोहल्ला निवासी घासी खां मंसूरी नमाज पढ़ने मस्जिद जा रहे थे, अचानक सूर्य मंदिर पर सांड के हमले से घायल हो गए। जिसकी 19 जून को एसआरजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

{आवारा सांडों का शहर में लगा रहता है जमावड़ा

वर्तमान समय में सूरजपोल गेट, लंका गेट, सूर्य मंदिर, मुकेरी मोहल्ला व शहर परकोटे के अंदर आवारा सांडों का जमावड़ा लगा रहता है। इन आवारा सांडों को शहर से बाहर निकालने को लेकर नगरपालिका ने एक टीम गठित की, जिसमें सिर्फ एक दिन आवारा सांडों को बाहर निकाला गया। जिसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इनमें कई सांड ऐसे है, जो अकेले व्यक्ति को देखकर हमला कर देते है। इन सांडों के हमले से कुछ समय पहले भी कई लोग घायल व चोटिल हो चुके है। बीते 10 माह में 6 लोगों ने सांड के हमले से घायल होकर दम तोड़ दिया है। कुछ समय पहले भी झालरापाटन के दाऊदी बोहरा समाज के कब्रिस्तान में किसी मरहूम परिजन की कब्र पर फूल चढ़ाने गया, मुंबई से आया एक परिवार भी सांड के हमले का शिकार हो गया। जिसके कारण एक महिला और बुजुर्ग को सामने सींघमार कर घायल कर दिया था। वहीं वसुंधरा कॉलोनी इलाके में कुछ समय पहले भी घर के बाहर खड़े बुजुर्ग को एक सांड ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया था।

इधर, आवारा मवेशियों से परेशान शहरवासियों ने कई बार नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए हंगामा भी किया। लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन कार्यवाही कुछ नहीं हुई।

झालरापाटन. शुक्रवार को हरिश्चंद्र कॉलोनी में आपस में लड़ते सांड।
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