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104 साल का हुआ संग्रहालय, देश की एकमात्र चामुंडा नवग्रह व अर्द्धनारीश्वर की मूर्तियां हैं यहां

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:31 AM IST

Jhalawar News - झालावाड़ संग्रहालय आने वाले एक जून को 104 साल का हो जाएगा। इन सालों में संग्रहालय की जगह से लेकर इसकी आभा भी बदल चुकी...

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झालावाड़ संग्रहालय आने वाले एक जून को 104 साल का हो जाएगा। इन सालों में संग्रहालय की जगह से लेकर इसकी आभा भी बदल चुकी है, लेकिन यहां नहीं बदला तो केवल संग्रहालय के बाहर से अतिक्रमण और गढ़ परिसर में लगे गंदगी के ढेर नहीं बदल पाए। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को संग्रहालय में रखी पुरा वस्तुएं और इसकी आभा तो भाती है, लेकिन जैसे ही संग्रहालय के बाहर निकलते ही अतिक्रमण देखकर अचंभित भी होते हैं।

संग्रहालय में वर्तमान में ढाई करोड़ रुपए खर्च कर इसका सौंदर्यीकरण करवाया गया है। इसके बाद यहां रखी मूर्तियों सहित अन्य सामानों का बेहतर डिस्प्ले हो गया है। जयपुर के सिटी पैलेस की तर्ज पर इसको चमकाया गया है। पहले संग्रहालय गढ़ दरवाजे के बाहर संचालित होता था। जहां मूर्तियां रखने तक की जगह नहीं थी, लेकिन फिर इसको करीब आठ साल पहले गढ़ भवन में शिफ्ट किया गया। अब जाकर इसका सौंदर्यीकरण हो पाया है। यहां अलग-अलग दीर्घाएं बनाई गई है। साथ ही इसमें लैंप लाईट और 108 अन्य लाइटें, शीशे के कार्य हुए हैं। रिसेप्शन से लेकर संग्रहालय को आधुनिक और पुरातात्विक रूप दिया गया है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को यह इन दिनों खूब पसंद आ रहा है, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इस बेहतरीन इमारत के बाहर से अतिक्रमण अभी तक नहीं हट पाए हैं। पहले यहां के दुकानदारों को पास ही मैदान में शिफ्ट किया गया था, लेकिन फिर अतिक्रमण हो गया।

ढाई करोड़ से करवाया सौंदर्यकरण...जयपुर के सिटी पैलेस की तर्ज पर चमकाया

झालावाड़। गढ़ संग्रहालय में रखी मूर्तियां।

पहले संग्रहालय अध्यक्ष ने जिले के गांवों में घूम कर एकत्रित किए थे सोने, चांदी, पीतल के प्राचीन सिक्के

संग्रहालय की स्थापना एक जून 1915 में तत्कालीन शासक महाराजराणा भवानीसिंह ने की थी। यह हाड़ौती का पहला संग्रहालय है। इसके प्रथम अध्यक्ष पंडित गोपाललाल व्यास थे। इन्होंने झालावाड़ राज्य के अनेक गांवों में घूम-घूमकर सोने, चांदी, तांबे, पीतल के अनेक प्राचीन सिक्के, ताम्रपत्र, मूर्तियों को खोजकर एकत्रित किया था। 1927 में महाराज भवानीसिंह ने संग्रहालय में अनेक ग्रंथ और कई हस्तनिर्मित चित्र, अस्त्र, शस्त्र भेंट किए। यहां घोडों की अनेक नस्लों एवं उनकी चिकित्सा पर सचित्र ग्रंथ शालिहौत्र मौजूद हैं। यहां हिंदू और मुस्लिमों के पवित्र ग्रंथ सहित मधुमालती, अवतार चरित्र, गीत गोविंद मौजूद हैं। यहां 10 प्राचीन शिलालेख हैं, जो 5वीं से 18वीं सदी तक के हैं। वर्तमान में यहां 2186 सोने, चांदी, तांबे और पीतल के सिक्के, 490 दुर्लभ मूर्तियां, 10 शिलालेख हैं। यहां 80 प्रतिमाएं, 41 अस्त्र-शस्त्र, 11 परिधान, 152 लघु चित्र, 30 पेंटिग्स और एक साइकिल गैलरी में सजी हुई है।

सबसे बड़ी यह खासियत है इस संग्रहालय की : झालावाड़ संग्रहालय में चामुंडा नवग्रह की मूर्ति और विश्व प्रसिद्ध अर्द्धनारीश्वर की मूर्ति यहां की विशेषताओं में शामिल है। यहां रखी चामुंडा नवग्रह की मूर्ति भारत की एकमात्र मूर्ति है। यह अष्ठबाहु है और इसमें चामुंडा देवी ने अपने दो मुख्य हाथों को बलपूर्वक ऊपर उठा रखा है। नवग्रह मूर्ति में दाएं से बाईं और है जो सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू और केतू के रूप में ऊकरे हुए हैं। लगभग 1300 वर्ष पुरानी यह मूर्ति आज भी क्रोध, रोद्र के तांत्रिक भाव को जीवंत रखने में समर्थ है।

आज निशुल्क रहेगा संग्रहालय और गागरोन में प्रवेश: विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर शनिवार को राजकीय संग्रहालय और गागरोन दुर्ग में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। यह जानकारी संग्रहालय प्रभारी संदीप सिंह जादौन ने दी।


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