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मिनी सचिवालय में कलेक्टर ऑफिस के ठीक ऊपर है रसद विभाग, यहीं पर चल रहा था रिश्वत का खेल

एक वर्ष पहले
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एसीबी की टीम ने शुक्रवार को जिला रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी (ईओ) व सूचना सहायक को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी टीम ने ईओ की शर्ट की जेब से रिश्वत राशि बरामद की। ईओ ने सूचना सहायक के मार्फत एक राशन डीलर से नोटिस के जवाब को फाइल करने की एवज में रिश्वत मांगी थी।

एसीबी एएसपी भवानीशंकर मीणा ने बताया कि परिवादी खानपुर पिपलाज निवासी राशन डीलर राजाराम पुत्र कजोड़ीलाल माली ने एसीबी कार्यालय पहुंचकर 6 मार्च को शिकायत दी थी। उसने बताया कि उसकी उचित मूल्य की दुकान का 31 अक्टूबर 2019 को जिला रसद अधिकारी ने निरीक्षण किया था। इस दौरान अनियमितता मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। राशन डीलर ने 13 नवंबर 2019 को लिखित जवाब पेश कर दिया, लेकिन 4 माह बाद भी उसका जवाब फाइल नहीं किया गया। इस जवाब को फाइल करने की एवज में ईओ रणजीत नगर अलवर निवासी प्रशांत यादव ने टोडाभीम जिला करौली निवासी सूचना सहायक रविंद्र बैरवा के मार्फत रिश्वत मांगी। उसी दिन एसीबी ने ईओ द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का सत्यापन भी कर लिया।

शुक्रवार को एसीबी ने आरोपियों को ट्रैप करने के लिए जाल बिछाया। परिवादी को रिश्वत राशि 10 हजार रुपए लेकर रसद विभाग के कमरा नंबर 312 में भेजा गया, कक्ष में ईओ प्रशांत यादव व सूचना सहायक बैठे हुए थे। जैसे ही परिवादी ने रिश्वत राशि ईओ को दी, उसने शर्ट की जेब में रख ली। परिवादी के इशारा करते ही एसीबी टीम ने ईओ की शर्ट की बाईं तरफ की जेब से रिश्वत राशि बरामद की।

ऐसे होता है जवाब फाइल

रसद अधिकारियों द्वारा राशन दुकानों का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। राशन डीलर द्वारा उसका जवाब दिया जाता है। जवाब के साथ डीलर को रसद अधिकारी के समक्ष पेश होना होता है। रसद अधिकारी के मार्क के बाद डीलर के जवाब को फाइल में लगाया जाता है। उस जबाव को फाइल करने की एवज में ईओ द्वारा रिश्वत मांगी गई थी।

रिश्वत के लिए नहीं कर रहा था फाइल

परिवादी राशन डीलर ने नोटिस मिलने 12 दिन बाद ही उसका जबाव पेश कर दिया था, लेकिन ईओ प्रशांत यादव द्वारा उसको चार माह तक अटकाए रखा।

इन बिंदुओं से जानिए... किस तरह चलता है गड़बड़ियों का खेल...ताकि बंधी आती रहे

झालावाड़ में बुजुर्गों, दिव्यांगजनों के लिए चलाई गई बाईपास स्कीम का फायदा कुछ राशन डीलरों ने उठाया। इन्होंने बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के नाम का राशन खुद उठाकर उसको ब्लैक कर दिया। ऐसे में रसद विभाग ने एक डीलर को सस्पेंड किया, जबकि चार डीलरों पर कार्रवाई करना भूल गया। ईओ के पास ही यह जांच आई, लेकिन इस जांच में चार डीलरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। लोगों ने इस मामले की शिकायत एसीबी मुख्यालय जयपुर में की है। इसकी भी जांच होना बाकी है।


कलेक्टर ऑफिस

एसीबी गिरफ्त में ईओ (तौलिया लपेटे) व सूचना सहायक(सफेद शर्ट में बैठे)

एक साल पहले ही हुआ था झालावाड़ स्थानांतरण

प्रवर्तन अधिकारी (ईओ) प्रशांत का एक साल पहले ही झालावाड़ में स्थानांतरण हुआ था। तभी से पहले वह जांच करने पहुंचते, उसके बाद डीलर पर कार्रवाई भी करते, लेकिन बाद में जांच करके उसको क्लीन चिट या जांच को ठंडे बस्ते में डालने का मामला चलता रहता। झालावाड़ और खानपुर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें डीलरों के यहां जांच तो हुई, लेकिन दोषी पाए जाने पर भी कार्रवाई नहीं हो पाई।

टीम में यह थे शामिल: एसीबी टीम में सब इंस्पेक्टर कन्हैयालाल, गोपाललाल, मोहम्मद आफाक, देवदानसिंह, प्रमेश कुमार, सूरजमल शामिल थे।

खाद्य सुरक्षा योजना का फायदा लेने के लिए असनावर उपखंड में कई फर्जी नाम एकाएक जुड़ गए। इस उपखंड से बकानी और झालरापाटन सहित जिले के अन्य क्षेत्रों के नाम भी जोड़ दिए गए। तत्कालीन एसडीएम रणजीत सिंह ने मामला भी दर्ज कराया, लेकिन रसद विभाग के अधिकारी यह जांच नहीं कर पाए कि यह फर्जी नाम किस तरह से जुड़े।

रसद विभाग

10 हजार रुपए की रिश्वत लेते प्रवर्तन अधिकारी व सूचना सहायक गिरफ्तार

इनसाइड स्टोरी...पहले डीलरों की जांच करते, फिर कार्रवाई और घूस लेकर दे देते थे क्लीन चिट

मिनी सचिवालय में जिस जगह पर कलेक्टर बैठते हैं, उसी के ठीक ऊपर रसद विभाग का कार्यालय है। इसी कार्यालय में बैठकर अधिकारी रिश्वत का खेल खेल रहे थे। शुक्रवार को एसीबी की टीम ने प्रवर्तन अधिकारी व सूचना सहायक को पकड़ा। जैसे ही मिनी सचिवालय में स्थित रसद विभाग के कार्यालय में ईओ और सूचना सहायक पर कार्रवाई हुई तो सभी विभागों में हड़कंप मच गया। डीएसओ और वहां मौजूद इंस्पेक्टर भी अपनी सीटों से नदारद हो गए। करीब तीन घंटे तक कार्रवाई चलती रही। जिस ईओ को रिश्वत मामले में पकड़ा है, उनका दायरा खानपुर और झालरापाटन ब्लॉक है। ऐसे में यहां के डीलरों को जांच के नाम पर सस्पेंड करने के बाद शुरू होता था रिश्वत की मांग करने का सिलसिला। ऐसी कई गड़बड़ियां हैं, जिन पर रिश्वत का पर्दा चढ़ने के बाद जांच ही पूरी नहीं हो पा रही थी। कई दोषी डीलरों पर कार्रवाई न कर उनको क्लीन चिट देने तक का खेल यहां काफी समय से चल रहा था। जिले में कई राशन डीलरों की दुकानों पर सौ प्रतिशत तक वितरण हो रहा था, यह गड़बड़ी को दर्शाता है, लेकिन उसके बाद भी राशन डीलरों की जांच नहीं हो पाती थी कि यहां सौ प्रतिशत वितरण हो कैसे रहा है। फर्जी आधार कार्डों से वितरण भी हुए, लेकिन उसके बाद भी डीलर बचे रहे।


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30 फीसदी लोगों के राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक नहीं हैं। इससे जिन लोगों के राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं हैं तो उनके हिस्से का गेहूं डीलर किसी भी दूसरे आधार कार्ड से निकाल लेते हैं। ऐसे में शिकायतें पहुंचने के बाद डीलरों के यहां जाकर भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया।

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