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जिले के किसानों पर 23 करोड़ 17 लाख रुपए का कर्ज बोले-समर्थन नहीं लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए हमें

केंद्र सरकार ने गुरुवार को बजट जारी कर दिया, इसमें किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की घोषणा सहित...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:35 AM IST
जिले के किसानों पर 23 करोड़ 17 लाख रुपए का कर्ज 
 बोले-समर्थन नहीं लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए हमें
केंद्र सरकार ने गुरुवार को बजट जारी कर दिया, इसमें किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की घोषणा सहित किसानों के हितों में घोषणाएं की गई हैं, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि इसमें उन्हें राहत नहीं मिल पाई है।

जब भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि जिले में 1 लाख 8 हजार 412 किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड का 23 करोड़ 17 लाख रुपए का कर्ज है। ऐसे में किसान इसे राहत नहीं बता पा रहे हैं। दरअसल जिले में कर्ज में डूबने से चार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। ऐसे में किसान संगठनों की मुख्य मांगें हैं कि समर्थन मूल्य की जगह लाभकारी मूल्य दिया जाना चाहिए। इसमें किसान की लागत पर 30 फीसदी मुनाफा जोड़ा जाना चाहिए।

बजट में 1200 करोड़ बांस क्षेत्र के विकास के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन, बांस का पेड़ की श्रेणी से अलग किया जाएगा, लेकिन जिले में बांस की खेती के संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। राष्ट्रीय बेम्बू मिशन से जिले को जोड़ा हुआ है,अभी तक यह मिशन कागजों से आगे नहीं बढ़ पाया है। किसानों का कहना है कि फसलों का बीमे के प्रीमियम भरने के बावजूद भी फसलें खराब होने पर किसानों को ना तो बीमा कंपनियां मुआवजा दे पाती हैं और न ही सरकार। जिले में ऐसे कई किसान हैं जिनको अभी तक फसल खराबे का मुआवजा नहीं मिल पाया है। ऐसे में भास्कर टीम ने कृषि मंडियों सहित अन्य क्षेत्रों के हालात देखी और लाइव रिपोर्ट तैयार की।

मंडी से लाइव: किसान बोले-कर्ज तक नहीं चुका पा रहे

झालरापाटन. कृषि मंडी झालरापाटन में किसान गुरुवार को उपज तो लेकर आए, लेकिन मायूस चेहरे अधिक दिखाई दिए। किसानों का कहना है कि उनको न तो उपज का सही दाम मिल पा रहा है और न ही कर्ज माफ हो पा रहा है। जब उनसे बजट के बारे में पूछा गया तो अधिकतर किसानों का कहना रहा कि सबसे पहले क्रेडिट कार्ड को चुकाने की सीमा बढ़ाई जाए। झूमकी निवासी किसान भैरुसिंह ने बताया कि उसकी पिछले सीजन में सोयाबीन की फसल मौसम के कारण खराब हो गई थी, लेकिन अभी तक इसका मुआवजा नहीं मिल पाया। इसके चलते 2 लाख रुपए कर्ज लेकर अब फिर से खेती की है। यह फसल बिकेगी उसके बाद ही कर्ज चुक पाएगा। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो पाता है। नलखेड़ी के किसान गोपाल लाल ने बताया कि उसने फसल के लिए तीन लाख रुपए का कर्ज किसान क्रेडिट कार्ड के मध्यम से लिया था। इसको चुकाने में काफी परेशानी आ रही है। हालांकि समय पर किस्त भरने की कोशिश की जाती है, लेकिन उसके बावजूद भी एक दिन निकलते ही ब्याज जुड़ना शुरू हो जाता है। नलखेड़ी के किसान जगन्नाथ ने बताया कि बीमा करवाने के बावजूद भी जब फसल खराब हुई तो उसका कोई भुगतान कंपनी के माध्यम से नहीं हो पाया। ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लिया है। इसके अलावा बाजार से भी कर्ज ले रखा है। अब 3 लाख 50 हजार रुपए के कर्ज को चुकाने में दिक्कत हो रही है।

मेडिकल कॉलेजों की घोषणा...पर जिला अस्पताल ही बीमार पड़े हैं

झालावाड़. बजट में वित्त मंत्री द्वारा तीन संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है, लेकिन जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।

जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सोनोग्राफी व मेमोग्राफी जांच प्रभावित है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से आईसीयू व एनआईसीयू तक संचालित नहीं हो पा रहे हैं। तीन सीएचसी को छोड़कर शेष 12 सीएचसी पर केवल मरीजों को प्राथमिक उपचार मिल रहा है। जबकि यहां जटिल प्रसव तक की सुविधा यहां होनी चाहिए। मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी पीएचसी में नर्सिंग कर्मियों के भी पद रिक्त होने से संविदा भर्ती से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की बजाय सरकार को वर्तमान में संचालित मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी को अपडेट करने पर जोर देना चाहिए।

गोपाल

जगन्नाथ

जगन्नाथ

भेरू सिंह

फसल का मुनाफा जोड़कर लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए

खानपुर. खानपुर कृषि मंडी में भी गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। कुछ किसान अपनी जिंसों को लेकर मंडी में पहुंचे, लेकिन फसलों के मिलने वाले दामों से वह संतुष्ट नहीं हो पाए। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष सीताराम नागर कहा कहना है कि समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना बढ़ाया जाना केवल धोखा है। जबकि इसके बजाय किसानों को लागत पर 30 फीसदी मुनाफा जोड़कर लाभकारी मूल्य दिया जाना चाहिए। किसान की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर ही बिकनी चाहिए। सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद तो होती है, लेकिन किसानों के अच्छे माल को भी रिजेक्ट कर दिया जाता है। किसान औने-पौने दामों में अपनी उपज बेचने को मजबूर रहता है।

असनावर. मंडी में कृषि जिंसों की आवक तो हो रही है, लेकिन फिर भी किसानों के चेहरों पर मायूसी दिखाई दी। कई किसान कर्ज में डूबे हुए हैं तो कई को अभी तक फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाया है। भारतीय किसान संघ के जिलामंत्री केवल चंद पाटीदार ने बताया कि कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई गई है। कृषि को उद्योगों से जोड़ना चाहिए और किसानों के खेतों पर प्लांट लगाने के लिए सहायता की जानी चाहिए तब जाकर किसानों को फायदा मिलेगा। अभी लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की बजट में घोषणा की गई है, लेकिन लागत का आंकलन किस तरह से किया जाएगा यह भी बड़ा सवाल है।

बजट विकासोन्मुखी: भारतीय जनता पार्टी आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक सीए दिनेश कश्यप बोहरा ने बताया कि यह ऐतिहासिक बजट है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र को प्रमुखता से लिया गया है। बजट विकासोन्मुखी और सुधारवादी है। इसमें गरीब, किसान, महिलाएं, चिकित्सा, स्वास्थ्य हर एक का ध्यान रखा गया है।

कहां-क्या स्थिति




-200 उपस्वास्थ्य केंद्र है। यह एएनएम के भरोसे रहते हैं।

सीताराम नागर

किसान और युवा वर्ग के साथ साथ गांव और गरीब को समर्पित बजट

आर्थिक सुधारों की गति को मजबूत करने वाला बजट है। वित्त मंत्री ने इसमें देश के सर्वांगिण विकास की रूपरेखा को प्रतिबिंबित किया है। विशेष रूप से अन्नदाता किसान और युवा वर्ग के साथ साथ गांव और गरीब को समर्पित बजट है। बजट में 10 करोड़ पिछड़े और गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा, युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ते हुए नौकरियों के 70 लाख अवसर उत्पन्न करने की कार्ययोजना सराहनीय है। किसानों के लिए 11 करोड़ की राशि का ऋण आवंटन भी सराहनीय है। रेलवे के विकास के लिए 1.45 लाख करोड़ की योजनाओं की घोषणा स्वागत योग्य है।

-दुष्यंत सिंह, सांसद झालावाड़-बारां

किसानों के कर्ज माफ किए जाने थे, नहीं हुए

जिला कांग्रेस अध्यक्ष मदनलाल वर्मा ने कहा कि बजट में किसानों को कोई फायदा नहीं हुअा है। किसानों के कर्ज माफ किए जाने चाहिए थे, लेकिन न तो कर्ज माफ हो पाए और न ही युवाओं के रोजगार सृजन के लिए कुछ हो पाया। बजट किसान, गांव और गरीब विरोधी है। देश की रीड की हड्डी समझी जाने वाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह भूला दिया। बजट में निचले तबके, मध्यवर्ग के लिए कोई घोषणा नहीं की और खास कर आम आदमी पिछड़े वर्गों और दलितों को नजर अंदाज किया।

नौकरियों में कम होगा पुरुष महिला के बीच का अंतर

गृहिणी आकांक्षा जैन ने बताया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए नौकरियां दी जाएंगी। बजट घोषणा से फर्म नियोक्ता अधिक से अधिक महिलाओं को नौकरियों पर रखेंगे। नौकरियों में पुरुष और महिलाओं के बीच का अंतर खत्म होगा।

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