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चाड़वास के झरोखे में अतीत व वर्तमान विषय पर जैन श्रावकों ने किया मंथन

छापर. चाड़वास के उपासना केंद्र में हुई संगोष्ठी को सम्बोधित करते जैन मुनि जम्बू कुमार। भास्कर न्यूज | छापर ...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:35 AM IST
छापर. चाड़वास के उपासना केंद्र में हुई संगोष्ठी को सम्बोधित करते जैन मुनि जम्बू कुमार।

भास्कर न्यूज | छापर

चाड़वास के उपासना केंद्र में बुधवार को होली व्यवस्था समिति के सहयोग से चाड़वास के झरोखे में अतीत व वर्तमान विषय पर संगोष्ठी हुई। आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि जम्बू कुमार के सानिध्य में हुए कार्यक्रम में प्रवासी जैन श्रावकों ने चाड़वास के अतीत व वर्तमान पर मंथन किया। मुनि जम्बू कुमार ने कहा कि चाड़वास का इतिहास गौरवशाली है जहां पर लगातार 10 वर्षों तक साधु-साध्वियों के चातुर्मास होते रहे। उन्होंने चाड़वास को तपोभूमि व उर्वरा भूमि बताते हुए कहा कि यहां पर ऐसे संतों का समागम हुआ जो त्यागी, तपस्वी, साधना व आराधना के बल पर समाधि मरण को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि मुनि छबील चाड़वास में बारह वर्ष, मुनि जोहरीमल ने बारह वर्ष व साध्वी पारपंताजी ने सोलह वर्ष रहकर श्रावक समाज में साधना का विकास किया। मंगलचंद दूगड़, बाबूलाल सुराणा, मनोज लूणिया, छापर के प्रदीप सुराणा, बादरमल सेठिया, संयज भटेरा, भाग्यश्री भंसाली ने चाड़वास के इतिहास को गौरवशाली बताया। जुगराज भंडारी, बाबूलाल बच्छावत, गुलाब बैद, भीकमचंद लूणिया, फूलचंद, बालचंद, प्रेम बच्छावत, संतोष संचेती, नोरत, जयश्री लूणिया, संतोक भंसाली व विनोद मौजूद थे।