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सुबह उठते ही दुनिया रंगीन दिखाई दे इसलिए 20 रंगों से रंग दिए मकान

होली की मस्ती में जहां हर जगह नजर आएंगे रंगे -पुते चेहरे वहीं राजस्थान में अलवर जिले के तिजारा के पास स्थित सरहेटा...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 06:55 AM IST
होली की मस्ती में जहां हर जगह नजर आएंगे रंगे -पुते चेहरे वहीं राजस्थान में अलवर जिले के तिजारा के पास स्थित सरहेटा गांव की दीवारें भी होली के इसी रंग में रंग चुकी है। गांव की हर दीवार पर अलग तरह का रंग है। यहां तक की एक एक दीवार पर भी अनेक तरह के रंग नजर आने लगे है। यह सब सरकार की किसी योजना के तहत नहीं बल्कि गांव को रंगीला और हर सुबह को चमकीला करने के लिए किया गया है ताकि लोग वसंत की उस खुशबू को हर रोज महसूस कर सके जिसके लिए घरों में होली और खेतों में सरसों का इंतजार करना पड़ता है।

अलवर शहर से करीब सत्तर किलोमीटर दूर सरहेटा गांव। कल तक यहां जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए थे, लेकिन आज गांव की आबोहवा बदली हुई है। पहले इस गांव के लोग न तो साफ-सफाई के प्रति जागरूक थे और न ही अपने स्वास्थ्य के प्रति। एक एनजीओ ने गांव को गोद लिया और सूरत बदलने की शुरुआत कर दी। हाल ही में संस्था ने गांव के प्रत्येक मकान को अलग-अलग रंग से पुतवाया है। पूरे गांव में 20 से भी ज्यादा लाल, गुलाबी, बैंगनी, पीला, नीला अलग-अलग रंगों का प्रयोग किया गया है। गांव को रंगीला बनाने के पीछे सिर्फ एक उद्देश्य यह है कि यहां के लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। सुबह उठते ही उन्हें अपनी दुनिया रंगीन दिखाई दे। अच्छे और सकारात्मक भावों के साथ ग्रामीणों के दिन की शुरुआत हो।

तिजारा से करीब 8 किलोमीटर दूर सरहेटा पंचायत समिति मुख्यालय है। गांव में ढाई से तीन हजार की आबादी है। ग्रामीणों की आय का साधन खेती और पशुपालन है। इस गांव में मेव, गुर्जर, कुम्हार, अनुसूचित जाति के करीब 800 परिवार रह रहे हैं। गांव की स्थिति को देखते हुए करीब 3 साल पहले नीमराना ग्रुप ऑफ होटल्स ने इसे गोद लिया और सूरत बदलने का बीड़ा उठाया। शुरुआती दौर में गांव में साफ-सफाई की गई। गांव का आंगनबाड़ी केंद्र, जो पहले जर्जर हालात में था, आज बच्चों के खेलने की खास जगह बन चुका है।

दुनिया के पर्दे पर होगा यह गांव

नए रंगीले लुक को लेकर बताया जा रहा है कि यह अनोखा गांव है। अक्सर गांवों में बने कच्चे और पक्के घरों में पुताई नहीं होती है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग सुबह निकलने के बाद शाम को ही घर की सूरत देखते हैं। ऐसे में मकान पर रंग होने या नहीं होने से इनको बहुत ज्यादा मतलब नहीं रहता। इसके पीछे रंगीला गांव को पर्यटक के दृष्टि में विश्व पटल पर लाने का प्रयास है।