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63 साल की शैलजा आदिवासी और ग्रामीण इलाकों की लड़कियों को कबड्‌डी सिखा रही; मैदान भी बनवाया, 40 खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रही हैं

एक वर्ष पहले
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नासिक से 150 किमी दूर ट्रेनिंग देने जाती हैं

ईरान की महिला कबड्‌डी टीम को एशियन चैंपियन बना चुकीं महाराष्ट्र की शैलजा जैन अब ग्रामीण और आदिवासी इलाके में इंटरनेशनल कबड्‌डी प्लेयर तलाश रही हैं। 63 साल की शैलजा नासिक से 150 किमी दूर गुही इलाके में लड़कियों को कबड्‌डी की ट्रेनिंग दे रही हैं। इसी इलाके की मिट्‌टी ने देश को ओलिंपियन मैराथनर कविता राऊत, मोनिका आथरे और ताई बामणे जैसी खिलाड़ी दी हैं।

बच्चों को लाने के लिए माता-पिता को समझाया

शैलजा ने एक साल पहले ट्रेनिंग देना शुरू किया था। उन्हांेने खुद गुही गांव जाकर बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित किया। उनके माता-पिता को भी मोटिवेट किया। कुछ पेरेंट्स अपनी लड़कियों को खेलने नहीं भेजना चाहते थे तो शैलजा ने उन्हें समझाया। इसके बाद जिन खिलाड़ियों में टैलेंट दिखा, उन्हें अपनी एकेडमी में लाकर ट्रेनिंग देना शुरू किया। वे खिलाड़ियों को सभी जरूरी सामान्य उपलब्ध कराती हैं। किट से लेकर डाइट तक की सुविधा देती हैं।


शैलजा 5 साल खेलीं, 1983 से कोचिंग करिअर की शुरुआत की

शैलजा 5 साल तक विदर्भ टीम, नागपुर यूनिवर्सिटी और नेशनल टीम से खेलीं। इसके बाद 1983 से कोचिंग करिअर शुरू किया। अपने कोचिंग करिअर में वे भारतीय महिला कबड्‌डी टीम, नेपाल और ईरान की टीम को भी ट्रेनिंग दे चुकी हैं।

ट्रेनिंग के दौरान खिलाड़ी।

शैलजा 40 खिलाड़ियों को लगातार ट्रेनिंग दे रही हैं। उन्होंने इन आदिवासी बच्चियों के लिए मैदान भी बनवाया है, ताकि उनकी ट्रेनिंग में किसी तरह की रुकावट न आए। उन्हें वनवासी कल्याण आश्रम की मदद भी मिल रही है।
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