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प्लांड फैमिली प्लानिंग से बचाई जा सकती है 90% महिलाओं की जिंदगी
{असुरक्षित सैक्स और अबॉर्शन महिलाओं की डेथ का मुख्य कारण बन रहा है।
Health issue
अलग आयुवर्ग में किस तरह प्रभावित होता स्वास्थ्य
किशोरावस्था : इस उम्र में लड़के की तरह लड़की को भी न्यूट्रीशियन युक्त डाइट दी जाएं। लिंग के आधार पर अबॉर्शन रोका जाएं। इस उम्र में अनवांटेड प्रेग्नेंसी व सैक्सुअल हैरसमेंट हैल्थ खराब होने का बड़ा फैक्टर हैं। इस उम्र में मां बेटी का विशेष ख्याल रखें। स्मोकिंग और अल्कोहल लेने की आदत इस उम्र में विकसित होने की ज्यादा संभावना होती है। ये आदतें एडल्ट एज और मां बनने के समय नुकसानदायक हो सकती है। दोस्तों के साथ इस आदत को नहीं अपनाएं।
लड़कियां आउटर अपीरियंस पर नहीं, डाइट-हैल्थ पर ध्यान दें
लोग क्या कहेंगे? टीनएज में लड़कियां इस पर ज्यादा ध्यान देती हैं। हर वक्त वे आउटर अपीरियंस को लेकर चिंतित रहती हैं। यही सोचती रहती हैं, चेहरे पर बाल तो नहीं आ रहे हैं। या फिर वे ज्यादा मोटी तो नहीं हो गई हैं। इससे उनकी सुंदरता बिगड़ जाएगी। वे अच्छी नहीं दिखेंगी तो लोग क्या कहेंगे? इसी वजह से वे हैल्थ पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। अच्छी डाइट नहीं लेने से उनमें विटामिंस, आयरन की कमी होती है। इसी उम्र में पीरियड के कारण ज्यादा ब्लड लॉस होता है। ऐसी स्थिति में, हैल्दी डाइट नहीं लेने से उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। इस उम्र में प्रोटीन, फाइबर, आयरनयुक्त डाइट लेनी चाहिए। स्पोटर्स एक्टीविटीज में शामिल रहें। रियल वर्ल्ड में जीएं
साइको सोश्यल इश्यू महत्वपूर्ण है। पेरेंट्स के अलावा हर रिश्ते की वैल्यू होती है। दोस्तों और रिश्तेदार के साथ कुछ वक्त बिताएं। ताकि अच्छी पर्सनैलिटी बन पाएं। रियल वर्ल्ड में जीएं। इंटरनेट के आदी नहीं बनें। इससे डिप्रेशन से बचाव हो पाएगा।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन से बचने के लिए टीनएज में एनिमिक नहीं बनें
टीनएज में लड़कियों को लड़कों के समान ही डाइट दें, क्योंकि इस उम्र में प्यूर्बिटी शुरू होती है। शुरूआती सालों में पीरियड अनियमित रहते हैं। ब्लीडिंग ज्यादा होती है। ऐसी स्थिति में, अगर मां बेटी की इस स्थिति की तरफ ध्यान नहीं देती हैं। कई महीनों और एक साल तक ज्यादा ब्लीडिंग रहती है। वहीं, उसे डाइट नहीं मिलने के कारण हीमोग्लोबिन 6 के नीचे तक पहुंच जाता है। लगातार ऐसा ही चलने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ सकती है। जबकि टीनएज में बेटी की हैल्थ का ख्याल रखना मां की जिम्मेदारी है। उसे एनिमिक होने से बचाएं। इस उम्र में वह एनिमिक हो जाती है। एडल्ट एज में उसे कई तरह की परेशानियां होगी। विशेष रूप से मां बनने पर उसकी तकलीफें बढ जाएंगी। कम वजनी बच्चे का जन्म होगा। पूरी जेनरेशन प्रभावित हो सकती है। इसलिए मां को जेंडर बायस्ड मानसिकता से बाहर आना जरूरी है। यदि इस उम्र में ही उचित डाइट दी जाएगी तो वह उम्र भर हैल्दी रहेगी।
मीनोपॉज के दो-तीन साल बाद ब्लीडिंग आने पर तुरंत चैकअप करवाएं, यह कैंसर का अर्ली साइन
need to know
डॉ. एस. फयाज एचओडी, गाइनीकोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट, एसडीएमएच, जयपुर
50 साल की उम्र में डायबिटीज, हार्ट डिजीज व कैंसर होने की संभावना
पीसीओडी लाइफस्टाइल डिजीज है। स्वतः ही ठीक हो जाएगी। ज्यादातर मां यह मानते हुए बेटी की इस बीमारी पर ध्यान नहीं देती है। बचपन में होने वाली यह डिसऑर्डर एक या दो साल का नहीं है। इसका असर 50 साल की उम्र तक रह सकता है। इससे डायबिटीज और हार्ट डिजीज की संभावना बढ़ जाती है। पीरियड अनियमित होने से अबॉर्शन व कैंसर हो सकता हैै। कई बार इसे डायग्नोस करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि एक ही फैमिली में क्लस्टर ऑफ पीसीओ होता है। उदाहरण के लिए, मां इससे ग्रसित थी। उसकी दोनों बेटियों में यह डिसऑर्डर हो सकता है। इससे एक बेटी पतली और दूसरी मोटी होती है। इसका डायग्नोस सही तरीके से किया जाए। इससे अंडा बनने की क्षमता कम हो सकती है। जन्म के बाद बेटी को यह बीमारी नहीं हो पाएं। इसके लिए मां बेटी का विशेष ध्यान रखें। समय पर खाना खिलाएं। समय पर उसे सुलाएं। पीरियड शुरू होने पर हाइजीन का ध्यान रखें, इंफेक्शन के कारण फैलोपियन ट्यूब बंद हो सकती है। इससे मां बन पाना मुश्किल हो जाता है।
कैंसर से बचाव के लिए माइक्रोवेव, खाने की पैकेजिंग में प्लास्टिक का यूज न करें
लाइफस्टाइल में बदलाव आने की वजह से आर्टिफिशियल जिंदगी जी रहे हैं। प्लास्टिक का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। कम उम्र में इंफर्टिलिटी से बचाव के लिए खाने में प्लास्टिक की पैकेजिंग नहीं करें। स्टील व ग्लास से बने हुई चीजों को इस्तेमाल ज्यादा करें। माइक्रोवेव में खाना नहीं पकाएं। लोहे की कढ़ाई का यूज करें। शादी के बाद नियमित पैपस्मीयर टैस्ट करवाएं। ताकि शुरूआती अवस्था में ही सर्विक्स कैंसर डायग्नोस हो पाए। वहीं, जंक फूड मोटापा बढ़ा रहा है। मोटापा और इनमें यूज होने वाले आर्टिफिशियल फ्लेवर कैंसर बढ़ाने की बड़ी वजह बन चुका है। इसलिए पिछले कुछ सालों में कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर होने के केस तेजी से बढ़े हैं। इसलिए टीनएज से ही लड़कियों को जंक फूड खाने से बचना चाहिए। और न्यूट्रीशियन युक्त डाइट पर फोकस करना चाहिए।
29 की उम्र में घटी एग बनने की क्षमता, एयर पॉल्यूशन बना इंफर्टिलिटी की वजह
एडल्ट एज में इंफर्टिलिटी एक बड़ी बीमारी बन चुकी है, क्योंकि लड़कियां शादी के बजाय कॅरिअर पर फोकस कर रही हैं। इससे उनमें तनाव बढ़ रहा है। साथ ही बॉयोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ने से वे मां नहीं बन पा रही हैं। यहां तक की एयर पॉल्यूशन भी रिस्क फैक्टर में शामिल हो चुका है। एम्स की ओर से 4000 महिलाओं का ब्लड सैंपल लेकर एक स्टडी की गई है। इसमें पाया गया कि एयर पॉल्यूशन की वजह से मां बनने की क्षमता घट रही है। यहां तक कि 29 की उम्र में ही ओवरी में ही एग बनने की क्षमता घट रही है। यह अमेरिका व यूरोप की तुलना में बहुत कम उम्र है। जुवेनाइन टीबी बड़ी बीमारी बन चुकी है। शुरूआती स्टेज में महिलाओं को इसके बारे में मालूम नहीं चल पाता है। इससे फैलोपियन ट्यूब बंद और यूट्रस लाइन डैमेज होने से वे मां नहीं बन पाती हैं। 19-20 परसेंट महिलाओं में यह टीबी इंफर्टिलिटी की वजह है।
एडिशनल सप्लीमेंट लेने
में लापरवाही नहीं बरतें
पुरुष व घर की देखभाल में महिलाएं समय खाना लेना नहीं छोडें। यह उनकी हैल्थ के लिए नुकसानदायक है। अगर डाइट से विटामिंस, मिनरल्स, कैल्शियम की पूर्ति नहीं हो पा रही है। एडिशनल सप्लीमेंट लें। ये सप्लीमेंट लेने में लापरवाही नहीं बरतें। अक्सर महिलाएं ये सप्लीमेंट लेना अवॉइड कर देती है।
बच्चे की तरह मां प्रेग्नेंसी में खुद की जन्मपत्री बनवाएं
बच्चे के जन्म पर जिस तरह जन्मपत्री तैयार की जाती है। इसी तरह प्रेग्नेंसी के दौरान मां खुद की जन्मपत्री भी तैयार करें। जिसमें ब्लड ग्रुप, थैलेसिमिया स्क्रीनिंग, रुबेला सहित अन्य वैक्सीनेशन, हीमोग्लोबिन रिपोर्ट, प्रॉपर डाइट,फॉलिक एसिड, आयरन और अन्य दवाइयों की जानकारी उपलब्ध रहे। ताकि खुद हैल्दी रहने के साथ बच्चा हैल्दी रहे।
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बेटे को जन्म नहीं दे पाने के लिए पुरुष जिम्मेदार
सोसायटी में अभी भी यह मिथ बना हुआ है कि बेटे को जन्म नहीं दे पाने के लिए महिला जिम्मेदार है। जबकि साइंटिफिक तौर पर यह बिल्कुल गलत है। बेटे के जन्म के लिए एक्स और वाई क्रोमोजोम का मैच होना जरूरी है। वाई क्रोमोजोम सिर्फ पुरुषों में पाया जाता है। ना कि महिलाओं में। बेटा नहीं हो पाने के लिए पुरुष जिम्मेदार है, क्योंकि उसका वाई क्रोमोजोम कमजोर है। इसलिए पुरुषों को टैस्ट करवाना चाहए। इसके अलावा सैक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज भी महिलाओं में पुरुषों से ट्रांसफर होती हैं। इन्फर्टिलिटी के लिए 40 परसेंट पुरुष जिम्मेदार हैं।
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40 साल बाद रेगुलर पेपस्मीयर टैस्ट करवाएं
जिन महिलाओं में किसी तरह के लक्षण नहीं है। वे 40 साल की उम्र के बाद रेगुलर पेपस्मीयर टैस्ट जरूर करवाएं। सर्विक्स कैंसर से बचाव के लिए पीरियड शुरू होने के बाद बेटी को वैक्सीन लगवाएं। इसका असर ज्यादा रहता है। 45 साल की उम्र तक यह वैक्सीन लगवाया जा सकता है। मीनोपॉज के बाद वजन बढ़ना सामान्य है। हॉर्मोनल बदलाव इसकी मुख्य वजह है। कोशिश करें, वजन नहीं बढ़े। मीनोपॉज के दो से तीन साल बाद ब्लीडिंग हो रही है। चैकअप करवाएं। यह कैंसर का साइन है।
doctor\\\'s advice
शादी के बाद पीरियड जल्दी-जल्दी आने, वजन घटने, पैरों में दर्द को इग्नोर नहीं करें
, झुंझुनूं, सोमवार 09 मार्च, 2020
मां बेटी का विशेष ध्यान रखें
डाॅ.प्रतिभा सिंह, गाइनी डिपार्टमेंट हैड, एम्स जोधपुर
पीसीओडी होने पर मां बेटी में समय पर सोने की आदत डालें
डाॅ. लखवीर धालीवाल, पूर्व प्रोफेसर, पीजीआई चंडीगढ़
पीरियड की अनियमितता डायग्नोस करेगी बॉयोप्सी
डाॅ.एस फयाज, सीनियर गाइनी कंसल्टेंट, जयपुर
महिलाओं के लिए सुंदर दिखना ही काफी नहीं, स्वस्थ रहना ज्यादा जरूरी
डॉ.प्रेमलता मित्तल, प्रोफेसर, महिला चिकित्सालय, जयपुर
डॉ. सुनीला खंडेलवाल, एग्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर, इंटरनेशनल मीनोपोज सोसायटी
फैक्ट फाइल
{एक तिहाई जनसंख्या अनप्लांड फैमिली प्लानिंग के कारण बढ़ रही है। इसे नियंत्रित करने से 32% मातृत्व, 90% अबॉर्शन डेथ को रोका जा सकता है। इनमें फिजिकल, इमोशनल और वायलेंस शामिल है।
{दूसरी तरफ, महिलाएं चैकअप के लिए पुरुष फैमिली मेंबर का इंतजार करती हैं। तब तक कई बार बीमारियां काफी हद तक अनियंत्रित हो जाती हैं। इसलिए लक्षण आते ही वे खुद चैकअप की पहल करें। पति, बेटे या भाई के साथ जाने का इंतजार नहीं करें।
90% अबॉर्शन से महिलाओं की डेथ हो रही है।
32% डिलीवरी के समय
20 मिलियन महिलाएं असुरक्षित अबॉर्शन से
ग्रसित होती है हर साल।
क्योंकि 170 मिलियन महिलाओं को सुरक्षित अबॉर्शन व कंंट्रासेप्शन के बारे में जानकारी नहीं है।
{अभी भी असुरक्षित अबॉर्शन की वजह से छह महीने बाद 8 गुना डेथ
होती हैं।
जरूरी है कि महिलाअाें काे अार्थिक, राजनीतिक के साथ-साथ स्वस्थ रहने के लिए समानता मिलनी चाहिए। यह अधिकार उन्हें किशाेरावस्था से ही मिलना चाहिए तभी वाे उम्रदराज हाेने तक फिट रह पाएंगी। हैल्थ भास्कर के इस अंक काे प्रतिष्ठित गाइनीकाेलाॅजिस्ट ने बताैर गेस्ट एडिटर तैयार किया है।
डॉ.सिमि सूद, सीनियर इंफर्टिलटी कंसल्टेंट, उदयपुर
डॉ. सोनिया मलिक, एडिटर, जर्नल ऑफ ग्लोबल हैल्थ
डॉ.सुनीला खंडेलवाल, सीनियर कंसलटेंट, जयपुर
डॉ. आदर्श भार्गव, पूर्व अधीक्षक, जनाना हॉस्पिटल
डॉ.नीना मल्होत्रा, सीनियर प्रोफेसर, एम्स, दिल्ली
अंधापन: पुरुषों से ज्यादा महिलाएं अंधेपन ग्रसित हैं। आंकड़ों के मुताबिक,ओल्ड एज में मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने वालों 64 परसेंट पुरुष और 36 परसेंट महिलाएं हैं। समय पर सर्जरी नहीं हो पाने के कारण वे अंधेपन से ग्रसित हो जाती हैं। एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी इसका एक बड़ा कारण बन रहा है। हॉर्मोन थेरेपी नहीं लेने के कारण यह बीमारी उनमें ज्यादा बढ़ जाती है। यदि मीनोपॉज के बाद इस थेरेपी को शुरू कर दिया जाए तो वे सामान्य रोशनी के साथ जिंदगी जी पाएंगी।
एडल्ट से ओल्ड एज: इस उम्र में बीमारियां बढऩे से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। महिला की क्वालिटी ऑफ लाइफ पर असर पड़ता है। यह सही तरीके से फैमिली प्लानिंग नहीं किए जाने की वजह से होता है।
डॉ प्रतिभा सिंह, प्रोफेसर, गाइनी डिपार्टमेंट हैड, एम्स,जोधपुर।
डॉ. सीमा सूद, सीनियर, गाइनीकोलॉिजस्ट
इन्फर्टिलिटी कंसल्टेंट उदयपुर।
डिलीवरी के बाद जख्म बनना भी कैंसर का संकेत
इंफेक्शन से बचाव करें। डिलीवरी के बाद अंदर की तरफ जख्म रह जाता है। यह शरीर के अन्य जख्म की तरह नहीं है। इसलिए महिला को लक्षण मालूम नहीं चल पाते हैं। जबकि यह कैंसर की प्री-स्टेज हो सकती है। सामान्य की तुलना में ज्यादा पानी डिस्चार्ज होना, सैक्सुअल रिलेशनशिप के बाद ब्लीडिंग हो रही है। यह कैंसर का संकेत हो सकता है। ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है। देरी नहीं करें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
शादी के बाद पीरियड अनियमित हो रहे हैं। या जल्दी-जल्दी आ रहे हैं। सामान्य की तुलना में व्हाइट डिस्चार्ज ज्यादा आ रहा है। वजन बढ़ने के बजाय घट रहा है। पैरों में दर्द और चक्कर महसूस हो रहे हैं। इन लक्षणों को साधारण मानते हुए इग्नोर नहीं करें। पेपस्मीयर करवाएं। यह कैंसर का संकेत हो सकता है। अगर कम उम्र में शादी हो चुकी है तो 25 साल की उम्र के बाद हर साल यह टैस्ट करवाना शुरू कर दें।
अक्सर महिलाएं बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। वे सोचती हैं कि जब हसबैंड को समय मिलेगा तभी टैस्ट करवाएंगे। टैस्ट करवाने में देरी कर देती हैं। यही उनके लिए नुकसानदायक है। पति का इंतजार नहीं करें। खुद ही पहल करते हुए ये लक्षण आने पर तुरंत चैक अप करवाएं। ताकि कैंसर सहित अन्य बड़ी बीमारियां अर्ली स्टेज पर डायग्नोस हो पाएं।
डॉ. सोनिया मलिक, एसोसिएट एडिटर, जर्नल ऑफ ग्लोबल हैल्थ
आजकल पीरियड में अनियमितता सामान्य परेशानी बन चुकी है। इसके लिए स्ट्रेस बड़ा रिस्क फैक्टर बन रहा है, क्योंकि स्ट्रेस से हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। पिटयूटरी ग्लैंड पर असर पड़ता है। इसी वजह से पीरियड अनियमित हो रहे हैं। कई केसों में, अनियमितता की वजह डायग्नोस करने के लिए ऑर्गेनिक पैथोलॉजी टैस्ट किया जाता है। इसमें यूटेराइन केविटी की कन्वेशनल और दूरबीन से बायोप्सी लेते हैं। बॉयोप्सी की रिपोर्ट के आधार पर ट्रीटमेंट देते हैं। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए खुद को मोटिवेट करें। न्यूट्रीशियन युक्त डाइट लें और एक्सरसाइज करें।
डॉ.आदर्श भार्गव, पूर्व अधीक्षक, जनाना, डॉ. प्रेमलता मित्तल, सीनियर प्रोफेसर, महिला चिकित्सालय, जयपुर
स्वस्थ मां, दादी, नानी बनने के लिए 15 साल की उम्र से ही डाइट पर ध्यान दें
महिलाओं के लिए सुंदर दिखना ही काफी नहीं है। इससे ज्यादा जरूरी है, उनका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तौर पर स्वस्थ रहना। इसकी शुरूआत उन्हें एडोलसेंट एज (15 साल) की उम्र से करनी पड़ेगी। अगर वे इस उम्र में स्वस्थ रहेंगी तभी वे स्वस्थ मां, दादी, नानी बन पाएंगी। इस उम्र में प्यूर्बिटी यानी पीरियड की शुरूआत होने की वजह से उनमें एनिमिया होने की संभावना ज्यादा रहती है। एनिमिक होने से ना सिर्फ उनकी पढाई प्रभावित होती है बल्कि फिटनेस पर असर पड़ता है। इसलिए पीरियड की अनियमितता और ज्यादा ब्लीडिंग को नजरअंदाज नहीं करें। ये बड़ी प्रॉब्लम बन सकती हैं।
हीमोग्लोबिन लेवल पर ध्यान दें। वजन नहीं बढ़ने दें। इस उम्र में ज्यादा खाने से वजन बढ़ता है। वहीं, न्यूट्रीशियन डाइट नहीं लेने से वे एनिमिक हो जाती है। इससे ओवरी की डायबिटीज होना सामान्य बीमारी है। यह पीसीओएस भी कहलाता है। साथ ही पीसीओडी सामान्य बीमारी है। इससे चेहरे पर बाल व पिंपल्स आते हैं। इसलिए इस उम्र में बच्चियों को न्यूट्रीशियन डाइट दें। ताकि वो एनिमिक नहीं बन पाएं। साथ ही किशोरावस्था में ब्लड की कमी होने से ब्लड सैल्स खत्म होती हैं। आयरन स्टोर में आयरन कम होने से एडल्ट एज में परेशानी हो सकती है। प्रेग्नेंसी में कॉम्पलिकेशन बढ़ जाती हैं। मां के एनिमिक होने से बच्चा कमजोर हो सकता है। वहीं, मां हार्ट फेल्योर में जा सकती है। इंफेक्शन से बचाव के लिए पीरियड के दौरान हाइजीन मेंटेन रखना चाहिए। ताकि इंफेक्शन के कारण होने वाली बीमारियां नहीं हो पाएं।