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अलसीसर की बेटी आईएएस डॉ. मंजू कर रही आदिवासी महिलाओं के उत्थान के लिए काम

एक वर्ष पहले
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अलसीसर के पास एक छोटी सी ढाणी में मेरा जन्म हुआ, ग्रामीण माहौल में पली, सरकारी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, मन में दृढ़ इच्छा शक्ति थी, इसलिए दिल्ली के लेडी हॉर्डिंग कॉलेज से एमबीबीएस व गुरु तेग बहादुर मेडिकल कॉलेज से पीजी किया। इसके बाद कुछ समय गायनी के पद पर काम किया। यहीं से भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर 2016 में पहले ही प्रयास में ही 59वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनी। बचपन में महिलाअों को कई बार पीड़ाजनक माहौल में देखती थी, आदिवासी महिलाओं के बीच काम करने संकल्प लिया था। सरकार ने उदयपुर संभाग के अादिवासी इलाके में बड़गांव में एसडीएम के रूप में नियुक्ति दी। पिछड़े आदिवासी इलाके में प्रशासनिक दायित्वों के साथ ही आदिवासी महिलाओं के कल्याण के लिए व्यक्तिगत प्रयास भी कर रही हूं। उस इलाके में लोग ‘अफसर जीजी’ के रूप में जानते हैं। जिस आदिवासी इलाके में चिकित्सक और शिक्षक ड्यूटी करने से कतराते हैं, वहां प्रशासनिक कामकाज के साथ ही महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल भी कर लेती हूं, उन्हें पढ़ाती भी हूं। आदिवासी महिलाएं मुझे अपने परिवार का सदस्य मानती हैं।

यह भी अच्छी बात है, मेरे पति सुरेश जाखड़ शिशु राेग विशेषज्ञ है। पीहर अौर ससुराल झुंझुनूं जिले में ही है। पहली बार ड्यूटी पर गई तो यह देख कर दंग रह गई थी कि राशन डीलर से लेकर बैंक के कर्मचारियों तक का बर्ताव आदिवासियों के साथ सही नहीं था, चिकित्सक कई-कई दिन तक अस्पताल में जाते ही नहीं। पहले सूची बनाई, फिर एक-एक कर समस्याओं का समाधान शुरू किया। जहां जरूरत पड़ी चिकित्सक की भूमिका भी खुद निभाई और स्वास्थ्य कर्मी की भी। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की जांच, निगरानी और देखभाल का कैलेंडर तैयार किया। आदिवासियों में शराब की लत छुड़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया।

डाॅ.मंजू श्याेराण

अलसीसर,

एसडीएम, बड़गांव
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