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कोरोना वायरस : दवा इंडस्ट्री के विकास पर खर्च होंगे 2 हजार करोड़

एक वर्ष पहले
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कोरोनावायरस से भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कच्चे माल के लिए चीन पर से निर्भरता खत्म करने और देश में ड्रग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रावधान करने की योजना तैयार की है। कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है, जो इसी माह कैबिनेट में पेश किया जाएगा। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मा विभाग की ओर से कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। पिछले दिनों सरकार की ओर से बनाई गई एक कमेटी ने भारत में ड्रग सिक्युरिटी के लिए मजबूत कदन उठाने की सिफारिश की थी।

विदेशी निवेशकों ने मार्च के शुरुआत में बाजार से 13,157 करोड़ निकाले

एजेंसी | नई दिल्ली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च के शुरुआती पांच कारोबारी दिनों में भारतीय बाजार से 13,157.12 करोड़ रुपए निकाल लिए। छह माह से जारी लिवाली के रुख से अलग इस दौरान एफपीआई ने शुद्ध बिकवाली की है। कोरोना वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।

डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार दो से छह मार्च के बीच एफपीआई ने शेयर बाजारों से 8,997.46 करोड़ रुपए और बांड बाजार से 4,159.66 करोड़ रुपए की निकासी की है। इस तरह उन्होंने पूंजी बाजार से 13,157.12 करोड़ रुपए निकाले हैं।

हीरो स्कूटर खरीदारों के लिए आज विशेष ऑफर

जयपुर | हीरो मोटोकॉर्प ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सभी बीएस-4 स्कूटर पर 20000 रुपए की बचत की पेशकश की है। लेकिन यह ऑफर 9 मार्च तक ही सीमित है। कंपनी के मुताबिक सोमवार को बीएस-4 हीरो स्कूटर खरीदने पर ग्राहक को 12500 रुपए की नकद छूट दी जाएगी। इसके अलावा 8000 रुपए का फायदा बीएस-6 मॉडल के कीमत के अंतर का मिलेगा। यह ऑफर केवल महिला ग्राहकों के लिए ही है। इसका मकसद महिला सशक्तीकरण के सामाजिक दायित्व का निर्वहन करना है। एक अप्रैल से बाजार में बीएस-6 के वाहन ही उपलब्ध होंगे। बीएस-6 वाहन बीएस-4 वाहनों की तुलना में लगभग 8000 रुपए तक महंंगे होंगे।

देश में इस साल 76 लाख टन सरसों उत्पादन का अनुमान

जयपुर | देश में इस वर्ष करीब 76 लाख टन सरसों उत्पादन की संभावना है। यह अनुमान मस्टर्ड ऑयल प्रॉड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मोपा) एवं सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कुईट) नई दिल्ली द्वारा क्रॉप एस्टीमेट कमेटी की बैठक में हाल ही जारी किया गया।

मोपा के अध्यक्ष बाबूलाल डाटा ने कहा कि पिछले साल भी देश में लगभग 76 लाख टन सरसों की पैदावार हुई थी। सर्दी लंबे समय तक रही तथा सरसों की बिजाई भी देरी से हुई। संयुक्त सचिव अनिल चतर ने बताया कि देश भर में सरसों पैदावार के सर्वे के लिए 60 सदस्यों की 8 टीमें बनाई गईं थी। जिन्होंने देश के उत्पादन केन्द्रों पर जाकर सरसों पैदावार की जानकारी ली तथा उत्पादन के आंकड़े जुटाए। देश की सभी उत्पादक मंडियों में इन दिनों तकरीबन दो लाख बोरी सरसों की प्रतिदिन आवक होने का अनुमान है। 20 मार्च बाद नई फसल की आवक और बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल नई सरसों में 10-18 फीसदी की नमी है।

कोरोनावायरस से भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कच्चे माल के लिए चीन पर से निर्भरता खत्म करने और देश में ड्रग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रावधान करने की योजना तैयार की है। कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है, जो इसी माह कैबिनेट में पेश किया जाएगा। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मा विभाग की ओर से कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। पिछले दिनों सरकार की ओर से बनाई गई एक कमेटी ने भारत में ड्रग सिक्युरिटी के लिए मजबूत कदन उठाने की सिफारिश की थी।

भारत में एपीआई तैयार करने पर चीन की तुलना में जो कीमतों में अंतर होगा उसे कुछ हद तक भारत सरकार पूरा कर सकती है। संभव है कैबिनेट नोट में यह शर्त रखी जाए कि उन्हीं कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा जो अपनी एपीआई का इस्तेमाल भारत के मरीजों के लिए ही करंे। भारत अगले पांच से सात वर्षों में चीन से अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है।

दवाओं का कच्चा माल देश में बनाने के लिए कंपनियों को प्रमोट किया जाएगा

दवा बनाने के लिए रॉ मेटेरियल एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स ) भारत में तैयार किया जा सके, इसके लिए इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रमोट किया जाएगा। इंडस्ट्री लगाने वाली कंपनियों को केन्द्र सरकार की ओर से कुछ आर्थिक रियायत दी जाएगी ताकि दवा इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सके। दरअसल चीन में तैयार होने वाली एपीआई की कीमत कम है, लिहाजा उससे तैयार दवा भी सस्ती होती है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि देश में ही एपीआई तैयार करने का पूरा ढ़ांचा खड़ा किया जाए, जिसके दूरगामी परिणाम हो।

चीन पर 50 से 100 फीसदी निर्भरता

भारत में चीन सहित विश्व के अलग-अलग देशों से दवा बनाने के लिए करीब 700 तरह की मॉलिक्यूल्स आयात होते हैं। सबसे ज्यादा करीब 378 तरह के मॉलिक्यूल्स चीन से ही आयात होते हैं। 58 तरह के मॉलिक्यूल्स ऐसे हैं जिसके लिए 50 से 100 फीसदी चीन पर ही निर्भरता है। इसमें एंटीबॉयोटिक्स, एंटीडायबिटिक, विटामिन, एनालजेसिक, स्टेरॉयड, एंटी-टीबी, एंटी-मलेरिया, हृदय संबंधी बीमारी की दवा, एंटी-पार्किंसन, डायरिया प्रमुख है। पेनिसिलिन-जी का स्टॉक दो माह और पैरासिटामोल बनाने के लिए रॉ मेटेरियल का स्टॉक एक माह का है। हालांकि बनी हुई दवा का स्टॉक तीन से चार माह के लिए बचा है।

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, झुंझुनूं, साेमवार, 9 मार्च, 2020
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