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संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम राेकने लिए सीमित संसाधन अपनाने पर जोर

2 वर्ष पहले
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चिमनपुरा (शाहपुरा-जयपुर) के राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसडी यादव का कहना है कि पिछले सौ साल में तेजी से हुए जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम अब हमें झेलने पड़ रहे हैं। पृथ्वी पर तामपान लगातार बढ़ रहा है। हिमखंड पिघल रहे हैं। हमारे समुद्रों का जल स्तर बढ़ रहा है। यह सिलसिला इसी तरह चला तो मानव जाति कुछ ही दशकों में महाप्रलय का शिकार हो सकती है। इसलिए हमें अपनी जरूरतों को कम करना होगा। सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने की तरफ लौटना होगा। वे शनिवार को चुड़ैला में श्री जेजेटी विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के संयोजन में “जलवायु परिवर्तन में मानवीय गतिविधियों की भूमिका’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। श्री गंगानगर के डॉ. बीआर अम्बेडकर राजकीय पीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम एस खींची ने कहा कि जितने ज्यादा एसी लगेंगे, फ्रीज काम में लिए जाएंगे, इनसे निकलने वाली गैसें वायुमंडल की गर्म करेंगी। असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. सुनील कुमार वर्मा, विश्वविद्यालय की प्रो-वोस्ट डॉ. निधि यादव, रजिस्ट्रार डॉ. मधु गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए। सेमीनार के कन्वीनर डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, को-कन्वीनर डॉ. तरूण यादव ने सेमीनार की विषय वस्तु के बारे में बताया। संचालन डॉ. तपेन्द्र शेखावत ने किया। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. हनुमान प्रसाद ने आभार जताया।

झुंझुनूं. जलवायु परिवर्तन संगोष्ठी को संबोधित करते डाॅ. यादव।

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