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14 साल तक ही सर्विस के कारण पेंशन भी नहीं मिलती थी, रिटायरमेंट तक रह सकेंगी सेना में

एक वर्ष पहले
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इस तरह मिलेगा हक, 20 साल तक सर्विस पर पेंशन भी मिलेगी

सेना में महिलाओं की भर्ती शार्ट सर्विस कमीशन से होती है। इसके बाद वे केवल 14 साल तक सर्विस कर सकती हैं। जबकि पुरुषों के लिए ऐसी बाध्यता नहीं है। अब महिला अधिकारियों को 14 साल की सर्विस पर इसे जारी रखने का विकल्प दिया जाएगा। जो महिलाएं इस्तीफा देना चाहेंगी वे दे सकेंगी, लेकिन जो आगे सर्विस करना चाहेंगी उनका चयन बोर्ड करेगा। इस तरह महिलाओं को परमानेंट कमिशन मिलेगा। यानी वे सेना के बड़े पदों तक जा सकेंगी। सेना में पेंशन 20 साल की सर्विस पूरी होने पर ही मिलती है। चूंकि महिलाओं को 14 साल पर ही रिटायर कर दिया जाता, इसलिए वे पेंशन की हकदार नहीं होती। इस फैसले से उनकी सर्विस आगे जारी रहेगी और अब वे पेंशन की हकदार हो जाएंगी। यह एक बड़ा बदलाव होगा।


फायदा : बेटियों के लिए सुनहरे भविष्य के ज्यादा अवसर

शेखावाटी से सैन्य सेवाओं में महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। देश की पहली महिला फाइटर पायलट मोहाना सिंह झुंझुनूं से हैं। उनके अलावा दो और पायलट हैं। सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल इशरत अहमद भी झुंझुनूं के नूआं की हैं। वे प्रदेश की पहली मुस्लिम महिला हैं जो इस पद पर सेना में हैं। भविष्य में भी कई बेटियां सैन्य सेवाओं में जाने का जज्बा रखती हैं। यह फैसला लागू होने से इन सभी को भविष्य में और अधिक अवसर मिलेंगे।

निर्णय के बाद अब इन क्षेत्रों में भी मिल सकेगा स्थाई कमिशन

महिला अधिकारियों को सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन मिल सकेगा।

इशरत अहमद

लेफ्टिनेंट कर्नल
झुंझुनूं

भारतीय सेना में महिलाओं को परमानेंट कमिशन देने के आदेश के बाद सेना की महिला अधिकारियों में खुशी है। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2020 में यह फैसला आया। इसका एक बड़ा असर शेखावटी पर भी होगा। यहां की अनेक बेटियां सेना में विभिन्न पदों पर हैं। सेना की मौजूदा व्यवस्था के तहत महिलाओं को अब तक 14 साल तक की सर्विस ही करने का प्रावधान था। जिससे वे लेफ्टिनेंट कर्नल या ज्यादा से ज्यादा कर्नल के पदों तक ही पहुंच पाती हैं। अब यह नियम लागू होने से वे रिटायरमेंट की उम्र तक सर्विस कर सकेंगी और संभव है कि कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल तक के पदों पर पहुंच सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इसके लिए तीन माह का समय दिया है।
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