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पुलवामा के शहीदों के सम्मान में देश का पहला स्मारक बनेगा नवलगढ़ में

3 वर्ष पहले
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पुलवामा हमले के कायरों के प्रति देश में जितना गुस्सा है उतना ही जवानों की शहादत पर गर्व भी है। इसीलिए हर किसी के दिल में शहीदों के प्रति कुछ कर गुजरने की तमन्नाएं जाग उठी हैं। नवलगढ़ के एक समाजसेवी नरोत्तम कालेर पुत्र कमलसिंह कालेर चौराड़ी ने इसी भावना के साथ शहीद स्मारक बनाने के लिए जमीन दी है। उन्होंने बलरिया डूंडलोद चौराहे के पास हाईवे पर 300 वर्ग गज जमीन देकर कहा कि यहां पुलवामा के शहीदों की याद में देश का पहला शहीद स्मारक बनाया जाएगा।

कालेर ने यह जमीन पूर्व सैनिक कल्याण समिति नवलगढ़ को देने की घोषणा की है। वे इस स्मारक की चारदीवारी बनाकर देंगे। कालेर ने बताया कि इस घटना से दो दिन से मन बेहद बैचेन है। इसलिए ख्याल आया कि इन सैनिकों की कुर्बानी को देशवासी कभी नहीं भूला सके, इसके लिए शहीद स्मारक बनाया जाए। पूर्व सैनिक कल्याण समिति से बात की है और उन्हें इस बारे में बताया तो वे तैयार हो गए। जुलाई महीने तक चारदीवारी बनाकर यह जमीन समिति को सौंप दी जाएगी।

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नरोत्तम कालेर

शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जिला बंद रहा
आक्रोश रैली व कैंडल मार्च निकाले, आज चिड़ावा व सूरजगढ़ कस्बा बंद
झुंझुनूं | पुलवामा हमले के विरोध में पूरे जिले में बंद रहा। कहीं बाजार नहीं खुले और यहां तक कि कई जगहों पर निजी बसों व ऑटो रिक्शा भी नहीं चले। जगह जगह पाकिस्तान के विरोध में प्रदर्शन किया गया। जिला मुख्यालय पर बाजार पूरी तरह से बंद रहे। नवलगढ़ और खेतड़ी में लोगों ने आक्रोश रैली निकाली। मलसीसर, महनसर जैसे कस्बों में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। जिला मुख्यालय पर दोपहर दो बजे तक अधिकांश बाजार बंद रहे। स्कूलों में शोकसभाओं का आयोजन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। मंडावा के रघुनाथ मंदिर में सभा हुई।

चिड़ावा. कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि देते युवा।

पूर्व सैनिकों की पीएम को लिखा पत्र युद्ध में शहीद होना सैनिक के लिए गर्व की बात, लेकिन यह कायराना हमला

चिड़ावा | 18 जाट पूर्व सैनिक समिति के संयोजक रतनवीर धनखड़ एवं चिड़ावा के पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री को पत्र लिखा है। लिखा है कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पूरा देश स्तब्ध है। इतनी बड़ी संख्या में शहादत से हर देशवासी को पीड़ा पहुंची है। ये सोचने के लिए मजबूर भी किया है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा? आमने-सामने अटैक में शहीद होना सैनिक के लिए फख्र की बात है लेकिन कायराना अंदाज से जवानों पर हमला हुआ वो बर्दाश्त के बाहर है। आपसे अनुरोध है कि भारत सरकार के मुखिया होने के नाते आप इस समस्या का स्थाई समाधान करें।

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