तीन शहरों में दो-दो नगर निगम बनाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Jhunjhunu News - हाईकोर्ट ने जयपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने अाैर समय पर इनके चुनाव नहीं कराने को चुनौती देने वाली दो...

Dec 04, 2019, 12:41 PM IST
हाईकोर्ट ने जयपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने अाैर समय पर इनके चुनाव नहीं कराने को चुनौती देने वाली दो पीआईएल को आधारहीन मानते हुए मंगलवार को खारिज कर दिया। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस महेन्द्र गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश सतीश शर्मा व एक अन्य पीआईएल पर दिया। अदालत ने राज्य सरकार से उम्मीद जताई कि वह छह महीने में नगर निगम के चुनाव करा लेगी।

हाईकोर्ट के पीआईएल खारिज करने के फैसले के बाद अब एक तरह से राज्य सरकार के जयपुर सहित जोधपुर व कोटा में दो नगर निगम बनाए जाने के फैसले पर भी मुहर लग गई है। अदालत ने पिछले माह लगातार तीन दिन तक प्रार्थी सहित राज्य सरकार व चुनाव आयोग की दलीलें सुनीं। इसके बाद 21 नवंबर को पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद फैसला बाद में देना तय किया था।

राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा था कि दो नगर निगम बनाने का फैसला जनहित में लिया है और उन्हें ऐसा करने का अधिकार है।



वह 5 जनवरी तक जयपुर, जोधपुर व कोटा मेंं निगमों के वार्ड का परिसीमन का काम कर लेंगे। यदि चुनाव आयेाग को पूरी चुनावी प्रक्रिया के लिए कम से कम 96 दिन चाहिए तो राज्य सरकार जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के परिसीमन का काम 5 जनवरी तक पूरा कर लेगी। दूसरी अाेर, राज्य चुनाव आयोग का कहना था कि आयोग की निकाय चुनाव कराने की तैयारियां पूरी थीं। लेकिन राज्य सरकार ने जयपुर में दो नगर निगम बना दिए। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से वार्ड सीमांकन सहित अन्य जानकारियां आने पर आयोग चुनाव करा देगा। लेकिन उन्हें 96 दिन का समय चाहिए।

यह कहा है पीआईएल में: पीआईएल में कहा कि राज्य सरकार ने 18 अक्टूबर,2019 को जयपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटकर एक को जयपुर हेरिटेज नगर निगम व दूसरे को ग्रेटर जयपुर नगर निगम का नाम दिया। यहां पर वार्ड की संख्या भी 150 से बढ़ाकर 250 कर दी गई। राज्य सरकार द्वारा ऐसा करना संविधान के आर्टिकल 243 यू के विपरीत है क्योंकि इसके अनुसार नगर पालिका चुनाव हर स्थिति में पांच साल तक ही वैध रहेंगे और इस अवधि को नहीं बढ़ाया जा सकेगा। प्रदेश में अन्य नगर पालिकाओं के चुनाव करवाए जा रहे हैं लेकिन जयपुर, जोधपुर, कोटा में चुनाव तय समय पर नहीं हो रहे और राज्य सरकार ने ऐसा इन जगहों के निकाय चुनावों को टालने के लिए किया है।

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