आज यह तस्वीर देखकर आप मुस्कुराए बिना नहीं रह सकेंगे, 21 दिन पहले जिस बेटी को सर्द रात में मंदिर में छोड़ दिया था, आज मकर संक्रांति पर उसकी यह खुशियों की तस्वीर...इसके पीछे छिपा है किसी का दान / आज यह तस्वीर देखकर आप मुस्कुराए बिना नहीं रह सकेंगे, 21 दिन पहले जिस बेटी को सर्द रात में मंदिर में छोड़ दिया था, आज मकर संक्रांति पर उसकी यह खुशियों की तस्वीर...इसके पीछे छिपा है किसी का दान

झुंझुनूं न्यूज: यही सबसे बड़ा दान... खुद का दूध पिलाकर उस बेटी को जिंदगी दी...

Bhaskar News

Jan 14, 2019, 09:53 AM IST
Rajasthan News Special story of Makar Sankranti Seeing this picture will make you smile

झुंझुनूं (राजस्थान)। मकर संक्रांति दान पुण्य का दिन है। हम आपको एक ऐसी तस्वीर दिखा रहे हैं जो आज से आपके जीवन में दान का अर्थ ही बदल देगी। तस्वीर उस बेटी की है जो 21 दिन पहले सर्द रात में मंदिर में मिली थी। तब यह छह घंटे की थी और गंभीर स्थिति में अस्पताल लाई गई थी। आज यह बेटी एकदम स्वस्थ है। बहुत कुछ समझने लगी है, मुस्कुराने लगी है, कुछ चेहरों को पहचानने लगी है जो दिनरात इसके पास रहते हैं।


ऐसा होना चाहिए दान, जिसमें हो ये 3 भावनाएं


1 समर्पण...इसलिए दूध की कमी नहीं : दूसरों की जिंदगी में रोशनी भरने से अधिक बड़ा दान कोई और नहीं हो सकता। इस बेटी की जिंदगी लौटा लाने में इसी समर्पण भावना से काम किया गया है। मासूम को जब भी भूख लगती है नर्स रुपकला उसे अपना दूध पिलाती हैं। अस्पताल में और भी नव प्रसूताएं उसे अपना दूध पिलाती हैं।


2 सहयोग...इसलिए इस तरह की देखभाल : उस रात अपनों ने भले ही मासूम को छोड़ दिया, लेकिन अब यह एक मिनट अकेली नहीं छोड़ी जाती। पूरा नर्सिंग स्टाफ बारी बारी से देखभाल करता है। नर्सिंग स्टाफ सुमन बुडानिया, प्रियंका खटकड़, नीलम थाकन, अनिता जानू और सुबिता देखभाल करती हैं। समय-समय पर मालिश की जाती है। दवाएं आदि दी जाती हैं।


3 खुशी...इसलिए स्टाफ देता है ऐसा माहौल : जब से यह मासूम अस्पताल में आई है। यहां खुशियां का माहौल है। हर स्टाफ जैसे अपनी जिम्मेदारी के प्रति और सजग हो गया है। वार्ड प्रभारी राजेंद्र यादव बताते हैं कि हम लोग मासूम को देखने की खुशी में कई बार जल्दी आ जाते हैं। पूरा स्टाफ इसकी मुस्कान के लिए कई घंटे तक पास बैठा रहता है।

यह बेटी अब एकदम स्वस्थ है। हम एक दो दिन में समाज कल्याण विभाग से इसे शिफ्ट करने के लिए पत्र लिखेंगे। इसके बाद इसे जयपुर भेज दिया जाएगा।

- डॉ. वीडी बाजिया, शिशु रोग विशेषज्ञ

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