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देश के लिए लड़ने का जज्बा बरकरार सेना भर्ती के लिए युवाओं को देंगे ट्रेनिंग

एक वर्ष पहले
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सेना से रिटायर होने वाले सैनिकों में आज भी देश के लिए लड़ने का जज्बा बरकरार है। सेना से रिटायर हुए परसरामपुरा के सूबेदार ताराचंद धायल के परिवार में देशभक्ति भावना आज भी हिलोरे लेती प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि कोई सेना की तैयारी कर रहा युवक उनसे ट्रेनिंग लेना चाहे तो वो उसे निशुल्क ट्रेनिंग देने को तैयार हैं। ताराचंद के दो बेटे बलराम व राजेश भी उनकी देशभक्ति भावना को देख कर सेना में शामिल हुए। बलराम का कुछ दिनों पहले हार्ट अटैक से निधन हो गया था। ताराचंद यूएन का मैडल, चीफ आॅफ स्टाफ का मैडल व एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख से प्रशंसा अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं। सेवानिवृत्त सूबेदार ताराचंद कारगिल युद्ध देख चुके हैं। हाल ही सेना की तैयारी कर रहे युवाअों से चर्चा में उन्होंने कहा कि देश से बढ़ कर कुछ नहीं होता। पाक की हरकतों पर आज भी उनका खून खौलता है। सेना से निवृत्ति हो गई, लेकिन उनका कहना है कि सरकार मौका दे तो वे आज भी युद्ध में मोर्चा लेेने तो तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह लड़ाई पर जाने के लिए वेतन और भत्ता भी नहीं मांगेंगे। वे कहते हैं कि बहुत खुशनसीब हैं वह लोग जिनका लहू वतन के काम आता है। कुछ दिनों पहले उनके बेटे बलराम का हार्ट अटैक से निधन हो गया था, उसको याद करते हुए कहते है कि उनका बेटा बलराम बचपन से फौज में जाने की जिद करता था और कहता था कि वो देश सेवा करेगा और भारत के दुश्मनों को मुहं तोड़ जवाब देगा। वो जरूरतमंद बच्चों की फीस भी चुकाता था। वो कहता था कि जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए। बेटे राजेश में भी देशभक्ति की भावना भरी है। ताराचंद के छोटे भाई जयगोपाल भी फौज में हैं।

ताराचंद धायल।
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