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ये हैं किताबो देवी, रोडवेज में चालक पति की मौत के बाद नौकरी में दिक्कत आई तो वैल्डिंग सीखी, नहीं तो हैल्पर होती

एक वर्ष पहले
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प्रदेश में पहली महिला

किताबो देवी पीथूसर की रहने वाली हैं। रोडवेज अधिकारियों की माने तो वे प्रदेश की पहली महिला वैल्डर हैं। इनका विवाह पिलानी निवासी श्रवण के साथ हुआ था। तब इनकी उम्र महज 18 साल थी।

फोटो : उत्तम जोशी

किताबो देवी अब थोड़ा बहुत पढ़ना लिखनी सीख चुकी है। अपनी पूरी कहानी उन्होंने हमें बोलकर लिखवाई।

पति रोडवेज में चालक थे। हंसता खेलता परिवार था। तीन बेटे मैं और पति। शादी के 15 साल बाद एक हादसे में पति की मौत हो गई। हमारा जैसे सब कुछ लुट गया। जीवन अब संकटमय लगने लगा था। मैं कभी स्कूल नहीं गई। पढ़ लिख नहीं सकी। हादसे के कुछ समय बाद पता चला कि मुझे रोडवेज में अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है। उसके लिए आवेदन किया तो सामने आया कि चूंकि मैं पढ़ी नहीं हूं इसलिए मेरे लायक कोई पोस्ट खाली नहीं थी। काफी चक्कर काटने के बाद पता चला कि हैल्पर या वैल्डर की पोस्ट मिल सकती है, लेकिन हैल्पर की पोस्ट भी खाली नहीं थी। अब संकट वैल्डिंग सीखने का था। घरवालों ने इसका विरोध किया, लेकिन मेरे सामने कोई उपाय ही नहीं था। किसी की परवाह किए बिना मैने यह काम सीखा। आज 21 साल से वैल्डिंग कर रही हूं। जब पहले दिन नौकरी पर आई थी तो वर्कशॉप में एक भी महिला नहीं थी, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी।


किताबो देवी

रोडवेज में वेल्डर
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