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आठ दिन में तीन बार ओलावृष्टि से हुआ अधिक नुकसान

एक वर्ष पहले
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पिछले करीब पांच साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि लगातार आठ दिन में तीन बार तेज बारिश व ओलावृष्टि हुई। इसका बड़ा नुकसान किसानों को हुआ है। खेतों में फसलें आड़ी पड़ी हैं। सबसे अधिक चिंता उन किसानों को हो रही है जिनकी सारी फसल खराब हो गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने लगातार गांवों में दौरे किए हैं। लगभग हर जगह 30 प्रतिशत के आसपास खराबा है। दाे तीन गांवाें में इससे अधिक भी नुकसान है। जिले के करीब 167 गांवों में सबसे अधिक असर हुआ है। यहां सबसे अहम बात किसानों को बीमा व मुआवजे की जानकारी की है। जिसके जरिए किसान अपने नुकसान की कुछ भरपाई कर सकते हैं। जिन किसानों को फसलों में 33 फीसदी से ज्यादा खराबा हुआ है। उनको बीमा कंपनी के अलावा राजस्व विभाग से मुआवजा मिलेगा। किसान क्रेडिट कार्ड धारक व ग्राम सेवा सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले किसानों का बीमा अनिवार्य रूप से होता है। जिले में करीब 1 लाख 80 हजार किसान केसीसी धारक है। कुल कृषकों की 70 से 75 फीसदी केसीसी धारक माने जाते हैं। लगभग 2000 किसान अऋणी है। उन्होंने भी बीमा करवा रखा है। भारत सरकार ने केसीसी धारकों के लिए अगले साल से अनिवार्य बीमा की शर्त को हटा दिया है। ये स्वेच्छा से बीमा करवा सकते हैं।

-डॉ. सुमन कस्वा, कृषि अधिकारी हैं। रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने फिल्ड से यह स्टोरी की।

लगातार तीन बार इस तरह हुआ नुकसान


पहली बार 29 फरवरी को हुई ओलावृष्टि के बाद कृषि विभाग ने 1 मार्च को मलसीसर व झुंझुनूं तहसील क्षेत्र के छह गांव नांद का बास, चूडैला, सीरियासर खुर्द, मोतीसर, शेखसर व कुमावास में सर्वे कराया है। इन गांवों में सरसों, गेहूं, चना, जाै व मैथी की फसल के 1181.14 हैक्टेयर में से 418 हैक्टेयर की फसलों में खराबा माना है। जो कुल फसलों का 10 से 30 फीसदी तक है।

दूसरी बार 4 मार्च को दूसर बार हुई ओलावृष्टि में चिड़ावा, उदयपुरवाटी, खेतड़ी व झुंझुनूं के 62 गांवो को प्रभावित मानकर बोई गई 22110 हैक्टेयर में से 10116 हैक्टेयर में फसल प्रभावित रही। इसमें भी 10 से 30 फीसदी खराबा माना।

तीसरी बार 6 मार्च को हुई ओलावृष्टि में नवलगढ़, उदयपुरवाटी, बुहाना, खेतड़ी, चिडावा और सूरजगढ़ के भी 99 गांवों काे प्रभावित मानकर बाेया गया 42 हजार 500 हैक्टेयर में से 22 हजार 600 हैक्टेयर में फसल का नुकसान माना है। इन क्षेत्रों में भी शुरुआती तौर पर 30 फीसदी खराबा माना जा रहा है।

किसानाें को कैसे मिलेगा फायदा


फसल बीमित प्रीमियम कृषक का

राशि प्रहै राशि प्रहै हिस्सा

चना 41500 622.50 डेढ़ फीसदी

सरसों 49500 742.50 डेढ़ फीसदी

गेहूं 67500 1012.50 डेढ़ फीसदी

जाै 57500 862.50 डेढ़ फीसदी

मैथी 54100 2705 पांच फीसदी

बीमा कंपनी को 72 घंटे में सूचना दें

प्राकृतिक आपदा की स्थिति में बीमित फसली कृषक को आपदा के 72 घंटों के अंदर जिले की अधिसूचित बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के टोल फ्री नंबर 1800116515 तथा बैंक, बीमा एजेंट व कृषि अधिकारियों को सात दिन में लिखित में आवेदन कर सकते हैं। ऐसा नहीं करने पर किसान को बीमा का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए समय रहते किसान को नुकसान की सूचना देने के प्रति सजग रहना चाहिए।
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