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25 मार्च से होगी विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत, इस वर्ष 4 के बजाय 5 माह सोएंगे देव, क्योंकि इस बार 13 माह होंगे
तीन साल बाद नव संवत्सर 2077 में एक माह अधिमास का भी होगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। संवत्सर के अनुसार इसमें 12 की बजाए 13 महीने होंगे। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता। पंडित रोहित (साेनू) पुजारी ने बताया कि विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत 25 मार्च से होगी। जो आनंद नामकीय संवत्सर रहेगा। इसके राजा बुध और मंत्री चंद्र रहेंगे। इसमें आश्विन के दो महीने होंगे। आश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। यानी इसकी अवधि करीब दो माह रहेगी। इन दो माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिमास रहेगा। इसके बाद जितने भी त्योहार आएंगे वे 10 से 15 दिन या इससे कुछ अधिक विलंब से आएंगे। दीपावली इस बार 14 नवंबर को होगी। साथ ही देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को आएगी।
संवत्सर 2077 में अधिमास की दो तिथियां शुक्ल पक्ष की तृतीया का क्षय 19 अक्टूबर को तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का क्षय 15 अक्टूबर है। इस कारण 3 सितंबर को श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र आरंभ होगा। श्राद्धपक्ष की सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन नवरात्र शुरू हो जाते हैं, लेकिन अमावस्या व नवरात्र के बीच पूरे एक माह का अंतर होगा। पंडितों के अनुसार पंचांग गणना के अनुसार 3 सितंबर कृष्ण पक्ष एक से आश्विन माह शुरू होगा, जो 31 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में 18 सितंबर को अधिकमास के रूप में प्रथम आश्विन की शुरुआत होगी। इस मास को श्रेष्ठ मास की गणना में गिना जाता है।
आप भी जानिए... कब होता है अधिकमास
पंडितों के अनुसार सौरमास 365 दिन का, जबकि चंद्रमास 354 दिन का होता है। इससे हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो तीन साल में बढ़कर एक माह से कुछ अधिक हो जाता है। यह 32 माह 16 दिन के अंतराल से हर तीसरे साल में होता है। 2018 में भाद्रपद में था तो अब आश्विन में हो रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं।
एक जुलाई के बाद 5 माह सोएंगे देव
इस वर्ष अधिकमास होने से देव भी पांच महीने सोएंगे। पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी एक जुलाई को मनाई जाएगी। इसके बाद शादी विवाह व शुभ कार्यों के कोई मुहूर्त नहीं होंगे। इस बीच अधिकमास शुरू होगा। श्राद्ध पक्ष के एक महीने बाद नवरात्र शुरू होंगे। दीपावली के बाद 25 नंवबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी।