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स्वाइन फ्लू / 25 नए पॉजिटिव; 12 दिन में 21 मौत, 295 संक्रमित



21 deaths in 12 days from Swine flu
स्वाइन फ्लू वाॅर्ड के बाहर बैठे हर व्यक्ति ने चेहरों पर मास्क और आंखों में खौफ था। जरूरत सामूहिक प्रयासों से यह तस्वीर बदलने की है। स्वाइन फ्लू वाॅर्ड के बाहर बैठे हर व्यक्ति ने चेहरों पर मास्क और आंखों में खौफ था। जरूरत सामूहिक प्रयासों से यह तस्वीर बदलने की है।
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21 deaths in 12 days from Swine flu
स्वाइन फ्लू वाॅर्ड के बाहर बैठे हर व्यक्ति ने चेहरों पर मास्क और आंखों में खौफ था। जरूरत सामूहिक प्रयासों से यह तस्वीर बदलने की है।स्वाइन फ्लू वाॅर्ड के बाहर बैठे हर व्यक्ति ने चेहरों पर मास्क और आंखों में खौफ था। जरूरत सामूहिक प्रयासों से यह तस्वीर बदलने की है।

  • एम्स की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अनुराधा शर्मा ने बताया कि रेत भी हो रही घातक
  • थार की रेत भी पहुंचती है फेफड़ों में, प्रभावित लंग्स को स्वाइन फ्लू लेता है चपेट में

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 03:36 AM IST

जोधपुर (महावीर प्रसाद शर्मा). सरकार व चिकित्सा विभाग के कथित प्रयासों के बावजूद स्वाइन फ्लू काबू नहीं आ रहा है। शनिवार को इससे पीड़ित 3 लोगों ने दम तोड़ दिया, जबकि 25 नए पॉजिटिव सामने आए हैं। इसके साथ ही सिर्फ 12 दिन में 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 295 पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। शहर और पूरे संभाग में तेजी से फैलते स्वाइन फ्लू का एक बड़ा कारण हमारे यहां का मौसम और साथ ही वातावरण में छाए रहने वाले रेत के कण भी हैं।

 

एम्स जोधपुर की माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अनुराधा शर्मा बताती हैं कि जोधपुर और संभाग में डस्ट पार्टिकल्स (रेत के कणों)  के कारण प्रदूषण ज्यादा है। सर्दी-जुकाम के साथ हवा में पसरे ये धूल के कण व्यक्ति की सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचते हैं। यह कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है। फेफड़ों में सूजन आने लगती है। स्वाइन फ्लू का वायरस भी फेफड़ों को प्रभावित करता है। ऐसी परिस्थिति में एच1एन1 वायरस आसानी से फेफड़ों को शिकार बनाता है। यह घातक सिद्ध होता है। यही बात कुछ सालों में हुए रिसर्च और स्टडी में भी सामने आई है। ऐसा भी नहीं है कि इसका कोई समाधान नहीं है। स्वाइन फ्लू के खौफ से  घबराने की बजाय समय पर अस्पताल पहुंचकर उपचार लेकर स्वस्थ हो सकते हैं। यदि संभव हो तो होम आइसोलेशन (घर मे उपचार के साथ एकांतवास) में रहें।

 

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  • Q. इतनी मौत और फ्लू पॉजिटिव के बाद भी सरकार आमजन को वैक्सीन के बारे में क्यों नहीं बता रही है?
  • A. सीएमएचओ डॉ. सुनीलकुमार बिष्ट के अनुसार यह स्थानीय स्तर पर किया जाना संभव नहीं है। यह उच्चाधिकारियों के स्तर पर ही संभव हो सकेगा। यह वैक्सीन फ्लू से बचाव के लिए उपयोगी है। यह शहर में हर मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध भी है। आमजन खुद खरीदकर भी लगा सकते हैं। हालांकि यह सुझाव मैं सरकार के उच्चाधिकारियों को भेजूंगा।
  • Q. क्या वायरस में कुछ बदलाव हुआ, यह इतना घातक क्यों हो रहा?
  • A. 2009 में पहली बार जब स्वाइन फ्लू प्रदेश में आया था तो इस वायरस की स्टेन कैलिफोर्निया थी। धीरे धीरे लोगों में वायरस के अनुरूप रोग-प्रतिरोधकता विकसित होने से इसका असर कम होने लगा था। इसके बाद करीब 2 वर्ष पहले वायरस ने स्टेन चेंज किया, यह मिशिगन वायरस में तब्दील हो गया। इससे यह घातक सिद्ध होने लगा। इसका भी इलाज संभव है।

 

  • Q. वैक्सीन कहां मिल सकता है, यह कितने वायरस से बचाता है?
  • A. स्वाइन फ्लू से बचाव का वैक्सीन भी बाजार में उपलब्ध है। हालांकि आश्चर्यजनक रूप से सरकार व चिकित्सा विभाग दूसरे तमाम प्रयासों के बीच इस वैक्सीन को प्रमोट नहीं कर रहे हैं। जबकि हर साल इस बीमारी से निपटने के लिए यूएस में एक वैक्सीन तैयार किया जाता है। यह वैक्सीन वायरस के स्टेन के अनुरूप होता है और इस बीमारी से बचाने में प्रभावी होता है। वैक्सीन में चार वायरस से बचाव होता है। उधर सरकार व विभाग मरीजों की स्क्रीनिंग और सर्वे के प्रयासों में तो जुटे हैं।

 

  • Q. मैं वैक्सीन कैसे लगवा सकता हूं
  • A. हर साल सर्दियों में स्वाइन फ्लू के सीजन से पहले सरकार या व्यक्ति खुद निर्धारित शुल्क देकर वैक्सीनेशन कराए तो इसकी रोकथाम की जा सकती है। इसके अलावा सरकार यदि डायग्नोसिस सेंटर की संख्या बढ़ाए तो जल्दी रिपोर्ट आने से उपचार भी शीघ्र शुरू हो सकता है।

 

बीमारी का संक्रमण, बचाव- इलाज उनसे जानिए, जिन्होंने कई पॉजिटिव को स्वस्थ किया

 

1. संक्रमण: कम प्रतिरोधकता व बीमारों को लेता है चपेट में

डॉ. नवीनदत्त, एसोसिएट प्रोफेसर, पल्मोनरी मेडिसिन, एम्स

जनवरी में अब तक हुई मौतों में अधिकांश सीओपीडी और अस्थमा, डायबिटीज से पीड़ित एवं गर्भवती थे। यह बच्चों-बुजुर्गों, गर्भवती और कम रोग-प्रतिरोधकता वाले लोगों को गिरफ्त में लेता है। वायरस सांस के रास्ते खाने को प्रोसेस करने वाले अंगों में, हार्ट और किडनी में भी चला जाता है। मरीज की 2-3 तीन दिन में मौत तक हो जाती है।

 

2. बचाव: उपचार- सर्दी-जुकाम होते ही सचेत हो जाएं

डॉ. मनोज लाखोटिया, प्राचार्य मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज

मामूली सर्दी-जुकाम होने पर व्यक्ति अगर दवाएं लेकर होम आइसोलेशन में रहे तो वायरस नहीं फैलेगा। लगातार 2-3 दिन तक बुखार सही नहीं हो रहा है और सर्दी-जुकाम भी है, तो तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टर की सलाह से इलाज लें। सर्दी-जुकाम के मरीज ज्यादा भीड़ वाले क्षेत्रों में नहीं जाएं। दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में नहीं आए।
 

3. उदाहरण: मैक्सिको में 

7 दिन तक सब लोगों को घरों में रखा, तब संक्रमण रुका

डॉ. सुनीलकुमार बिष्ट, सीएमएचओ

मैक्सिको के एक शहर में जब स्वाइन फ्लू बीमारी फैली तो उन्होंने 7 दिन के लिए पूरे शहर का ट्रांसपोर्टेशन रोक दिया। शहरवासियों को 7 दिन तक अपने घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई। इस प्रकार बीमारी को फैलने से रोका। हालांकि यह हमारे शहर और देश में संभव नहीं है।

 

18 दिन में कलेक्टर दूसरी बार पहुंचे व्यवस्थाएं जांचने

18 दिन में दूसरी बार शनिवार को कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए एमडीएमएच में की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर वार्ड के अंदर तो नहीं गए, बाहर खड़े होकर अधीक्षक से जानकारी ली। एमडीएम अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी, सीएमएचओ डॉ. सुनील बिष्ट व बीसीएमओ डॉ मोहनदान के साथ बैठक की। 

 

2.50 लाख घरों का सर्वे करने के निर्देश
सीएमएचओ ने बताया कि एमडीएमएच में कलेक्टर ने निरीक्षण के बाद बैठक लेकर निर्देश दिए है कि नर्सिंग स्टाफ से सोमवार, मंगलवार और बुधवार को शहर व आसपास 2.50 लाख घरों का सर्वें कर संदिग्ध मरीजों को अस्पताल भेजने का काम करवाया जाए।

 

लापरवाही पर डॉक्टर व 3 एएनएम को नोटिस 
सीएमएचओ ने बताया कि मतौड़ा पीएचसी पर जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. गौतम पंडित ने सांयकालीन ओपीडी का निरीक्षण 8 जनवरी को किया तो  वहां कार्यरत दो चिकित्सा अधिकारी समेत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नदारद मिले थे। जिस पर कार्यवाही करते हुए सभी को 17 सीसी का नोटिस दिया है। इधर शहर में हो रहे स्वाइन फ्लू के संदिग्धों की पहचान के  सर्वे में एएनएम द्वारा गड़बड़ करने पर उसे 17सीसी का नोटिस दिया है। डॉ. बिष्ट ने बताया कि संदिग्ध मरीजों को गंभीर स्थिति से पहले ही बचाने के लिए शहरभर में सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के कार्य को जब क्राॅस चेक किया गया तो पता चला कि नागौरी गेट की दो एएनएम और झालामंड की एक एएनएम ने सर्वें में गड़बड़ किया है। जिस पर कार्यवाही करते हुए उन्हें 17सीसी का नोटिस दिया गया है।

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