जोधपुर

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नहा रही बेटी को डूबते देख मां व मौसी बचाने कूदी, 3 घंटे बाद तीनों की निकली बॉडी

शवों को तलाशने में फेल रही रेस्क्यू टीम, टूटी नाव लेकर नदी में उतरे युवाओं ने खोज निकाला शव।

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 04:57 PM IST
माही नदी के बैक वाटर में 3.30 घंटेे बाद इस तरह निकाला मौसी लाडू का शव। माही नदी के बैक वाटर में 3.30 घंटेे बाद इस तरह निकाला मौसी लाडू का शव।

बांसवाड़ा (जोधपुर). शहर से 15 किमी दूर गेमन पुल के पास बुधवार दोपहर 1 बजे मां-बेटी और मौसी की डूबने से मौत हो गई। हादसे के वक्त एक और महिला वहां मौजूद थी लेकिन वह चाहकर भी तीनों को बचा नहीं पाई। महिला ने परिजन और पुलिस को घटना की जानकारी दी। सिविल डिफेंस टीम रेस्क्यू में फेल रही। आखिरकार युवा टूटी नाव लेकर नदी में उतरे और शव निकालकर लेकर आए। शवों को तलाशने में साढ़े 3 घंटे लग गए। जती (30), उसकी बेटी मनु (11), और मौसी लाडू (25) की मौत हो गई। ये लोग रतलाम (मप्र) से 15 दिन पहले ही बांसवाड़ा आए थे। यहां गेमन पुल के समीप इन्होंने अपना डेरा जमाया है। ऐसे हुआ हादसा...

- बुधवार को बेटी मनु नदी के बैक वाटर में नहाने गई, जहां अचानक वो डूबने लगी। उसे बचाने के लिए जती ने उसका हाथ थामा लेकिन वह संतुलन नहीं रख सकी और डूबने लगी।

- मां-बेटी को डूबते देख मौसी लाडू बचाने नदी में उतरी लेकिन वह खुद भी डूब गई। किनारे पर खड़ी भाभी चंपा ने लोगों से हादसे के बार में बताया।

- जब तक इनको बचाव का प्रयास शुरू होता, उस समय तक एक घंटे बीत चुका था। गहरे और मटमैले पानी को देख सिविल डिफेंस टीम के सदस्य नदी में नहीं उतरे।

- गांव के 6 युवा शवों को तलाशने जान जोखिम में डालकर घंटों तक नदी में गोता लगाते रहे। शाम 5.30 बजे तीनों शवों को निकाला जा सका।

15 दिन पहले ही आए थे, बारिश होते ही लौटना था

- मृतका जती के भाई राजाराम ने बताया, 15 दिन पहले ही रतलाम से बांसवाड़ा आए थे। यहां गेमन पुल के समीप पानी अच्छा होने से बैक वाटर में ही डेरा जमाया।

- परिवार के 20 से ज्यादा सदस्य साथ है। जती के 3 और बेटे हैं और लाडू की तीन बेटियां। यहां भेड़ों के लिए भोजन और पानी होने से ठहर गए थे। पहली बारिश होते ही लौटना था।

जांचने डॉक्टर तक नहीं बुलाया, पिकअप में ले गए शव

- हादसे ने मौके पर प्रशासन के राहत और बचाव के नाकाफी बंदोबस्त को भी उजागर कर दिया। शवाें को निकालने 8 युवा घंटों गहरे पानी में गोता लगा रहे थे। जिनके साथ भी हादसा होने की आशंका थी।

- इसके अलावा तीनों शवों को निकालने के बाद भी उन्हें जांचना था लेकिन एहतियात के तौर पर प्रशासन की और से कोई डॉक्टर मौके पर नहीं बुलाया गया।

- 16 सिख रेजिडेंट सिक्ख रेजिमेंट के सुबेदार ने तीनों की एडियां रगड़कर और छाती दबाकर जांचा लेकिन तीनों की मौत हो चुकी थी।

बहन,मां की मौत पर विलाप करता बेटा। बहन,मां की मौत पर विलाप करता बेटा।
परिजनों को खोने का दुख। परिजनों को खोने का दुख।
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माही नदी के बैक वाटर में 3.30 घंटेे बाद इस तरह निकाला मौसी लाडू का शव।माही नदी के बैक वाटर में 3.30 घंटेे बाद इस तरह निकाला मौसी लाडू का शव।
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