--Advertisement--

डॉक्टरों की हड़ताल के 10 दिनों में तीनों बड़े अस्पतालों में 193 मरीजों की मौत

कई जगह एक डॉक्टर ही था, तो कई जगह खाली कुर्सी दिखाई दी। अस्पतालों मे यूनिट हैड और विभागाध्यक्ष मरीजों को देखते नजर आए।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 06:33 AM IST

जोधपुर. जोधपुर मेडिकल कॉलेज के तीन बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल के दस दिनों के दौरान 193 मरीजों की मौत हुई है। इसमें सबसे ज्यादा 135 मरीजों की मौत संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमडीएमएच में हुई। इसके अलावा एमजीएच में 15 और उम्मेद अस्पताल में 43 की मौत हुई। वहीं हड़ताल के दौरान दस दिनों में एमडीएमएच में 1250, एमजीएच में 145 और उम्मेद अस्पताल में 620 मरीजों को भर्ती किया गया।


- सेवारत डॉक्टर्स की हड़ताल के 10वें दिन बुधवार को अस्पतालों में मरीज लंबी लाइन लगाकर ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कई जगह एक डॉक्टर ही था, तो कई जगह खाली कुर्सी दिखाई दी। अस्पतालों मे यूनिट हैड और विभागाध्यक्ष मरीजों को देखते नजर आए।

- दूसरी ओर मरीजों के भार से परेशान होकर मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य काली पट्टी बांधकर मरीजों को देखते नजर आए।

- मंगलवार देर रात सभी सहायक आचार्य मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमीलाल भाट को काम नहीं करने का ज्ञापन देने पहुंचे, बाद में डॉ. भाट की समझाइश के बाद पुन: काली पट्टी बांधकर काम करने पर सहमति बनाकर लौटे।

सकारात्मक कदम नहीं उठाने पर इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करनी पड़ती
- सहायक आचार्यों का कहना था कि एक डॉक्टर लगातार 25-30 घंटे काम कर रहा है। इससे शारीरिक और मानसिक तनाव हो रहा है। वहीं मरीजों को इलाज नहीं मिलने से भर्ती मरीज वार्डों में परेशान हो रहे हैं। वार्ड नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं।

- डॉक्टरों का यहां तक कहना था कि यदि सरकार की ओर से हड़ताल पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता, तो एमजीएच और एमडीएमएच में से एक जगह इमरजेंसी सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं।