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बिना ओटीपी-पिन हासिल किए कारोबारी के Paytm एकाउंट से पार हो गए 65 हजार रुपए

महामंदिर स्थित मिठाई विक्रेता ने दर्ज कराई एफआईआर, आईटी एक्ट के अधिकांश मामलों में पुलिस के हाथ खाली

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 08:07 AM IST
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जोधपुर. डिजिटल क्रांति के इस दौर में ऑनलाइन शातिरों द्वारा एक के बाद एक लगातार हजारों-लाखों रुपए की ठगी की वारदातें बदस्तूर जारी हैं। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसमें खाताधारक से बिना पिन या ओटीपी हासिल किए ही शातिर ने उनके पेटीएम एकाउंट से हजारों रुपए उड़ा लिए। पेटीएम एकाउंट से बिना पिन या ओटीपी के पैसा उड़ाने की यह पहली घटना है। करीब डेढ़ महीने पहले की इस घटना का पता लगने पर कारोबारी ने महामंदिर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।


नागौरी गेट के बाहर भगतसिंह मार्ग इलाके में रहने वाले व महामंदिर स्थित परिहार स्वीट्स के मालिक युधिष्ठिर सिंह परिहार ने महामंदिर थाने में रिपोर्ट दी है। इसमें उन्होंने बताया, कि उनके पेटीएम एकाउंट में करीब 70-80 हजार रुपए का बैलेंस था। कुछ दिन पहले उन्हें किसी को पेमेंट करना था और इसके लिए उन्होंने पेटीएम एकाउंट से भुगतान करने की कोशिश की, तो पता चला कि किसी ने उनके खाते से करीब 65 हजार रुपए निकाल लिए। खाते की विस्तृत जानकारी देखने पर पता चला कि गत 29 दिसंबर को अपरान्ह 3 बजे के बाद किसी ने पांच-पांच हजार रुपए के दो और 25 हजार व 30 हजार रुपए के ट्रांजेक्शन कर लिए।

परिहार के अनुसार, आमतौर पर वे अपने पेटीएम एकाउंट में 30-40 हजार रुपए जमा होने के बाद पैसा अपने बैंक एकाउंट में ट्रांसफर करते हैं, लेकिन इस बार व्यस्तता के चलते कई दिनों से यह राशि ट्रांसफर नहीं कर पाए थे। महामंदिर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना ओटीपी या मोबाइल नंबर हासिल किए ये ट्रांजेक्शन कैसे हुए, इससे निकली राशि किन-किन खातों में कब-कब गई है। इस केस की जांच थानाधिकारी सीताराम खोजा कर रहे हैं।

जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में न कोई विशेषज्ञ, न संसाधन

पिछले कुछ दिनों में ऑनलाइन ठगी के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें यूजर से ओटीपी या पिन ही नहीं पूछे गए हैं। ऐसे मामलों की जांच पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि वर्तमान में साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच के लिए जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में न तो विशेषज्ञों की टीम है और ना ही अत्याधुनिक संसाधन। ऐसे मामलों में पुलिस संबंधित बैंक, ऑनलाइन वॉलेट कंपनी की हेल्प डेस्क या अन्य एजेंसियों पर निर्भर रहती है। इनसे ठगी से जुड़ी एक वारदात की जानकारी हासिल करने में ही कई-कई दिन लग जाते हैं। तब तक और भी कई वारदातें हो चुकी होती हैं।

मामले आईटी एक्ट की बजाय सामान्य धोखाधड़ी में दर्ज
साइबर क्राइम के ऐसे मामलों की जांच पुलिस निरीक्षक या इससे ऊपर के अधिकारी ही कर सकते हैं। जानकारी नहीं होने के कारण कई थानों में तो आईटी एक्ट के मामलों को भी सामान्य धोखाधड़ी की धाराओं में दर्ज कर लिया जाता है। किसी भी थानाधिकारी के लिए भी आईटी एक्ट के मामलों की जांच पूरी करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है और थाने में नियमित कार्यों के बीच ऐसा संभव हो नहीं पाता। इसके लिए पुलिस कमिश्नरेट में डेडिकेटेड टीम बने जो सिर्फ साइबर क्राइम से जुड़े मामले ही देखे, तो ऐसी वारदातों का खुलासा होने की संभावनाएं भी बढ़ सकती है।

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